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Gorakhpur News: चार भाई बहनों से सबसे बड़ा था आकाश, पुलिस बनकर पिता को न्याय दिलाने की थी आस

Thu, 02 Oct 2025 01:59 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 02 Oct 2025 01:59 AM IST
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Gorakhpur News: Akash was the eldest of four siblings, he hoped to become a policeman and get justice for his father.
कुछ साल पहले सड़क हादसे में दाहिने हाथ हो गया था खराब, आरोपी का नहीं लग सका था सुराग
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मामूली विवाद ने बुझा दिया घर का चिराग
पाली। सहजनवां थाना क्षेत्र में किशोर आकाश की पीट-पीटकर हत्या के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। चार भाई-बहनों करन, अर्जुन व काजल में सबसे बड़ा आकाश घर का सहारा था। पिता दिलीप को न्याय दिलाने और मां दानी देवी का सहारा बनने की आस में उसने अपनी पढ़ाई और मेहनत से सपने बुने थे। लेकिन मामूली विवाद में उसकी जान चली गई।

दरअसल, कुछ साल पहले आकाश के पिता दिलीप सड़क हादसे का शिकार हो गए थे। हादसे में उनका दाहिना हाथ खराब हो गया था। ऐसे में वे मजदूरी करने में अक्षम हो गए। आरोपी का भी पुलिस कोई सुराग नहीं लगा सकी। धीरे-धीरे परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होती गई। ऐसी हालात में आकाश परिवार की उम्मीद बन गया था। पढ़ाई के साथ-साथ पुलिस सेवा में जाने का सपना देख रहा था। घरवालों का कहना है कि आकाश अक्सर कहता था, कि वह पुलिस बनकर अपने पापा को न्याय दिलाएगा और परिवार को किसी पर निर्भर नहीं रहने देगा। वह एनसीसी कैडेट भी था। इसी साल नौवीं क्लास में उसने जॉइन किया था। ताकि आगे चलकर उसे भर्ती में आसानी हो सके। आकाश पिता के साथ खेती-बाड़ी का भी काम करता था।
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मां की आंखों में बेटे का सपना अधूरा रह गया
आकाश की मां बेटे को याद करते ही फफक पड़ती हैं। सिसकते हुए कहती हैं, हमारा बेटा पुलिस बनना चाहता था। गरीब परिवार से था लेकिन मेहनत कर रहा था। छोटी-सी नोकझोंक ने मेरी दुनिया उजाड़ दी। मां ने बताया कि आकाश बेहद शांत और मिलनसार स्वभाव का था। मोहल्ले के सभी बच्चे उसे पसंद करते थे।
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पिता थाने में डटे रहे
हादसे के बाद घर की जिम्मेदारी आकाश ने खुद उठा रखी थी। छोटी बहन और भाइयों की पढ़ाई के लिए वह ट्यूशन पढ़ाने के साथ गांव में छोटा मोटा काम भी करता था। पिता का कहना है कि वे दाहिने हाथ से दिव्यांग हैं, लेकिन बेटे की मौत के बाद आरोपियों को सजा दिलाने के लिए हर हाल में संघर्ष करेंगे। हाथ कांपते हुए उन्होंने कहा कि बेटे ने मेरे लिए सपने देखे थे, अब मैं उसकी आखिरी इच्छा पूरी कराऊंगा।



बड़ा सहारा छिन गया
आकाश का एक भाई आठवीं में तो दूसरा पांचवीं का छात्र है। वहीं छोटी बहन काजल चौथी की छात्रा है। मां कहती हैं कि बड़े बेटे आकाश की मौत ने परिवार को तोड़ दिया है। पति दाहिने हाथ से दिव्यांग हैं और बेटे की हत्या कर दी गई। अब छोटे बच्चों के भविष्य की चिंता सताने लगी है। इधर, आकाश की मौत के बाद गांव में मातम का माहौल है। लोग बताते हैं कि वह मेहनती और होनहार था। हर कोई उसकी असमय मौत पर स्तब्ध है। बुजुर्ग कहते हैं कि इतने संघर्षशील बच्चे का जीवन इतनी बेरहमी से खत्म कर दिया गया, यह उन लोगों ने कभी सोचा भी नहीं था।
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