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एम्स: पांच दिन भटकने के बाद की शिकायत तब बना मेडिकल सर्टिफिकेट
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सेना में भर्ती के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाने आए नौतनवा के एजाज ने की शिकायत
एम्स (गोरखपुर)। सेना में भर्ती के लिए एम्स से मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाना आसान नहीं है। पांच दिनों तक नौतनवा के मोहम्मद एजाज भटकते रहे और बृहस्पतिवार को उन्होंने एम्स की कार्यकारी निदेशक से शिकायत की तब सर्टिफिकेट बन पाया।
एजाज ने शिकायत करते हुए बताया कि वह फरवरी में हुई भर्ती परीक्षा में शामिल हुए थे और अप्रैल में रिजल्ट आने के बाद से ही आवश्यक प्रमाण पत्र के लिए एम्स आ रहे थे, लेकिन बार-बार आने के बावजूद मेडिकल प्रोसेस पूरी नहीं हो रही थी। उन्होंने बताया कि सोनोग्राफी रिपोर्ट अनिवार्य थी, लेकिन अस्पताल में भीड़ और स्टाफ की उदासीनता के चलते यह जांच नहीं हो पा रही थी। सर्टिफिकेट के लिए हर दिन अलग-अलग काउंटर और कर्मचारियों के बीच दौड़ाया जा रहा था। इससे परेशान होकर उन्होंने बृहस्पतिवार को कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता के ओपीडी निरीक्षण के दौरान उनसे शिकायत की। कार्यकारी निदेशक ने संबंधित विभाग को निर्देशित किया, जिसके बाद स्टाफ ने उन्हें सहयोग प्रदान किया और उनकी सोनोग्राफी की गई।
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एम्स (गोरखपुर)। सेना में भर्ती के लिए एम्स से मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाना आसान नहीं है। पांच दिनों तक नौतनवा के मोहम्मद एजाज भटकते रहे और बृहस्पतिवार को उन्होंने एम्स की कार्यकारी निदेशक से शिकायत की तब सर्टिफिकेट बन पाया।
एजाज ने शिकायत करते हुए बताया कि वह फरवरी में हुई भर्ती परीक्षा में शामिल हुए थे और अप्रैल में रिजल्ट आने के बाद से ही आवश्यक प्रमाण पत्र के लिए एम्स आ रहे थे, लेकिन बार-बार आने के बावजूद मेडिकल प्रोसेस पूरी नहीं हो रही थी। उन्होंने बताया कि सोनोग्राफी रिपोर्ट अनिवार्य थी, लेकिन अस्पताल में भीड़ और स्टाफ की उदासीनता के चलते यह जांच नहीं हो पा रही थी। सर्टिफिकेट के लिए हर दिन अलग-अलग काउंटर और कर्मचारियों के बीच दौड़ाया जा रहा था। इससे परेशान होकर उन्होंने बृहस्पतिवार को कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता के ओपीडी निरीक्षण के दौरान उनसे शिकायत की। कार्यकारी निदेशक ने संबंधित विभाग को निर्देशित किया, जिसके बाद स्टाफ ने उन्हें सहयोग प्रदान किया और उनकी सोनोग्राफी की गई।
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