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Gorakhpur News: नारी शक्ति का गवाह बना एम्स का पहला दीक्षांत, मेडल पाकर चहक उठे मेधावी

Tue, 01 Jul 2025 01:24 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 01 Jul 2025 01:24 AM IST
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Gorakhpur News: AIIMS' first convocation became a witness to women power, meritorious students were delighted after getting medals
गारेखपुर एम्स के प्रथम दीक्षांत समारोह में स्मारिका का विमोचन करती राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सा
राष्ट्रपति, राज्यपाल, केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री और एम्स की कार्यकारी निदेशक थीं मंच पर
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मंच पर मेडल पाने वाले आठ मेधावियों में से चार बेटियां थीं, कार्यक्रम शुरू होने से पहले राष्ट्रपति के साथ हुई ग्रुप फोटो
गोरखपुर। एम्स का पहला दीक्षांत इस मायने में भी यादगार रहा कि मंच की सात में चार प्रमुख कुर्सियों पर (राष्ट्रपति, राज्यपाल, केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री और एम्स की कार्यकारी निदेशक) महिलाएं विराजमान थीं। वहीं जिन आठ मेधावियों को मंच पर राष्ट्रपति के हाथों मेडल मिला, उसमें भी चार लड़कियां थीं। इस क्षण को यादगार बनाने के लिए राष्ट्रपति ने ग्रुप फोटो भी खिंचवाई। इसके अलावा एम्स के छात्र-छात्राओं की तरफ से बनाए गए एक स्मारिका का भी विमोचन किया गया।
शाम 4:30 बजे पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार दीक्षांत समारोह के लिए राष्ट्रपति का काफिला एम्स के ऑडिटोरियम पहुंचा। उनके आने से पहले ही प्रमाणपत्र पाने वाले एम्स के एमबीबीएस प्रथम बैच की पढ़ाई पूरी करने वाले 48 डॉक्टरों के अलावा एमएससी नर्सिंग के आठ और एमएससी मेडिकल के पांच कुल 63 छात्र-छात्राओं को बाहर बुलाया गया। वहां राष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, एम्स प्रेसिडेंट, कार्यकारी निदेशक और सांसद के साथ ग्रुप फोटो कराया गया। इसके बाद दीक्षांत परेड शुरू हुआ। इस दौरान मेधावियों के साथ आए उनके माता-पिता इस क्षण को देखकर उत्साहित थे।
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अंग वस्त्र और स्मृति चिह्न देकर किया सम्मानित
मंच पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एम्स की तरफ से अंग वस्त्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। इसके बाद प्रेसिडेंट देश दीपक वर्मा और कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने एम्स की स्थापना, चुनौतियों और उपलब्धियों का बखान किया।
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डॉक्टर कभी सेवानिवृत्त नहीं होता : राष्ट्रपति
गोरखपुर। मेधावियों को मेडल देने के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नए डॉक्टरों को नैतिकता और कर्तव्य का पाठ पढ़ाया। कहा कि डॉक्टर कभी सेवानिवृत नहीं होता। आपको यह सेवा जिंदगी भर करनी है। स्वास्थ्य रूपी संपदा लोगों को देते जाइए, आपको सुकून मिलेगा। आपके चेहरे पर खुशी मिलेगी। आपका नाम सदा गूंजता रहेगा। कॅरियर व जीवन में हमेशा याद रखें कि चिकित्सा मानव की सेवा है। जहां भी कार्य करें, करुणा व ईमानदारी को चिकित्सा का हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि आप कभी रात में थके हारे सोए हैं, लेकिन आधी रात में किसी ने फोन किया तो आपको जगना पड़ता है। राष्ट्रपति ने कहा कि डॉक्टरों को इम्पैथी के महत्व को समझना आवश्यक है। मेडिकल एजुकेशन से जुड़े हितधारकों से अपील करूंगी कि भावी डॉक्टरों को शुरूआत से ऐसा ईको सिस्टम प्रदान करें, जिसमें वे अपने कौशल के साथ-साथ डॉक्टर-पेशेंट कम्युनिकेशन, रोल ऑफ इम्पैथी इन हिलिंग और ट्रस्ट बिल्डिंग जैसे विषयों के बारे में भी जानें।
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मरीजों के मुस्कान की तुलना कभी धन से नहीं की जा सकती
राष्ट्रपति ने कहा कि डॉक्टर बनने के बाद आप कितने धनवान हुए, कितना सामाजिक सम्मान मिला, इससे अधिक महत्वपूर्ण है कि इलाज से मरीजों व उनके परिवार के चेहरे पर कितनी मुस्कान आई है। इस मुस्कान की, तुलना कमाए गए धन से नहीं की जा सकती।
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टेक्नोलॉजी पर भी दिया जोर
राष्ट्रपति ने कहा कि टेक्नोलॉजी इन मेडिसिन के बारे में सभी जानते हैं। टेली मेडिसिन, एआई इन डायग्नोस्टिक, रोबोटिक सर्जरी, वेरिएबुल हेल्थ टेक जैसे तकनीक चिकित्सा सेवा को बेहतर बना रहे हैं। एम्स के द्वारा रोबोट असिस्टेंट सर्जरी, एआई बेस्ड कैंसर डिटेक्शन का उपयोग किया जा रहा है, जो चिकित्सा नवाचार के लिए भारत की तत्परता को दर्शाता है। एआई डिवेन हेल्थ केयर में एथिक्स डेटा प्राइवेसी और ह्यूमन टच बनाए रखने पर भी विचार करना आवश्यक है।

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आपकी सफलता में माता-पिता व शिक्षकों की भूमिका
राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों से कहा कि आप जिस मुकाम पर पहुंचे हैं, वह आपकी मेहनत व दृढ़ संकल्प का परिणाम है। लेकिन, इस सफलता में माता-पिता व शिक्षकों की भी भूमिका है। आप अपने ज्ञान का उपयोग केवल कॅरियर में आगे बढ़ने के लिए न करें, बल्कि समाज के उन वर्गों के लिए भी कार्य करें, जिन्हें चिकित्सा सेवाओं की सर्वाधिक आवश्यकता है। उन्होंने कई ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में वंचित समुदायों के लिए उच्च स्तर की स्वास्थ्य सेवाओं का भी जिक्र किया।
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