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Gorakhpur News: जीडीए में 165 में से 105 मानचित्र आवेदन निरस्त, आर्किटेक्ट की चूक आई सामने
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मानचित्र पर आपत्तियों के निस्तारण के लिए हर 15 दिवस पर आयोजित होगा मानचित्र दिवस
गोरखपुर। गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) में पिछले पांच माह के दौरान बड़े निवेश से जुड़े 165 मानचित्र आवेदन आए। इसमें से 105 निरस्त कर दिए गए। प्राधिकरण के अनुसार, कुछ आवेदन नए बिल्डिंग बायलाज के अनुरूप नहीं थे। जबकि अधिकांश में आर्किटेक्ट स्तर पर की गई छोटी-बड़ी चूक मुख्य वजह रही।
इस स्थिति पर शुक्रवार को जीडीए के प्रभारी मुख्य अभियंता किशन सिंह ने अवर अभियंताओं और आर्किटेक्ट के साथ समीक्षा बैठक की। प्रत्येक आवेदन पर विस्तृत चर्चा की गई। समीक्षा में सामने आया कि कई मानचित्र पोर्टल यूपीओबीपीएएस की तकनीकी दिक्कतों के चलते निरस्त हुए। वहीं, कुछ आर्किटेक्ट ने पुराने आवेदन पर आपत्तियां दूर करने के बजाए नए बायलाज के अनुसार दोबारा आवेदन करना बेहतर समझा। किशन सिंह ने निर्देश दिया कि ऑनलाइन मानचित्र का एक मानक फार्मेट तैयार किया जाए और विनियमितिकरण क्षेत्र के मानचित्रों के समयबद्ध निस्तारण के लिए एसओपी बनाई जाए। साथ ही अब हर 15 दिन में मानचित्र मेला आयोजित करने का निर्णय लिया गया। ताकि ऑनलाइन और ऑफलाइन आपत्तियों का त्वरित निस्तारण हो सके।
प्रभारी मुख्य अभियंता ने चेतावनी दी कि जो आर्किटेक्ट आपत्तियां दूर किए बिना दोबारा मानचित्र दाखिल कर रहे हैं या अधूरे अभिलेख जमा कर रहे हैं, उन्हें चिह्नित कर उनकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। उन्होंने कहा कि निवेशकों और आवेदकों को अनावश्यक विलंब से बचाने के लिए प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित की जाएगी।
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गोरखपुर। गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) में पिछले पांच माह के दौरान बड़े निवेश से जुड़े 165 मानचित्र आवेदन आए। इसमें से 105 निरस्त कर दिए गए। प्राधिकरण के अनुसार, कुछ आवेदन नए बिल्डिंग बायलाज के अनुरूप नहीं थे। जबकि अधिकांश में आर्किटेक्ट स्तर पर की गई छोटी-बड़ी चूक मुख्य वजह रही।
इस स्थिति पर शुक्रवार को जीडीए के प्रभारी मुख्य अभियंता किशन सिंह ने अवर अभियंताओं और आर्किटेक्ट के साथ समीक्षा बैठक की। प्रत्येक आवेदन पर विस्तृत चर्चा की गई। समीक्षा में सामने आया कि कई मानचित्र पोर्टल यूपीओबीपीएएस की तकनीकी दिक्कतों के चलते निरस्त हुए। वहीं, कुछ आर्किटेक्ट ने पुराने आवेदन पर आपत्तियां दूर करने के बजाए नए बायलाज के अनुसार दोबारा आवेदन करना बेहतर समझा। किशन सिंह ने निर्देश दिया कि ऑनलाइन मानचित्र का एक मानक फार्मेट तैयार किया जाए और विनियमितिकरण क्षेत्र के मानचित्रों के समयबद्ध निस्तारण के लिए एसओपी बनाई जाए। साथ ही अब हर 15 दिन में मानचित्र मेला आयोजित करने का निर्णय लिया गया। ताकि ऑनलाइन और ऑफलाइन आपत्तियों का त्वरित निस्तारण हो सके।
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प्रभारी मुख्य अभियंता ने चेतावनी दी कि जो आर्किटेक्ट आपत्तियां दूर किए बिना दोबारा मानचित्र दाखिल कर रहे हैं या अधूरे अभिलेख जमा कर रहे हैं, उन्हें चिह्नित कर उनकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। उन्होंने कहा कि निवेशकों और आवेदकों को अनावश्यक विलंब से बचाने के लिए प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित की जाएगी।
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