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गोरखपुर मेडिकल कॉलेज: जीनोम सीक्वेंसिंग जांच के लिए 14 मरीजों के नमूने भेजे गए दिल्ली, डेल्टा प्लस की पुष्टि होने के बाद विभाग अलर्ट

Tue, 13 Jul 2021 08:48 AM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 13 Jul 2021 08:48 AM IST
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Gorakhpur Medical College sent samples of 14 patients to IGIB Delhi for genome sequencing test
BRD medical college - फोटो : अमर उजाला
कोरोना के सबसे खतरनाक वैरिएंट डेल्टा प्लस की पुष्टि होने के बाद बीआरडी मेडिकल कॉलेज का माइक्रोबायोलॉजी विभाग अलर्ट मोड में है। विभाग ने जुलाई में गैर राज्यों से आए 14 संक्रमितों के नमूने जीनोम सीक्वेंसिंग की जांच के लिए इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी, दिल्ली (आईजीआईबी) भेजा है।
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जानकारी के मुताबिक, माइक्रोबायोलॉजी विभाग में 30 लोगों के नमूनों की रिपोर्ट सात जुलाई को आई है। इसमें दो मरीजों में डेल्टा प्लस, एक में कप्पा और 27 मरीजों में डेल्टा की पुष्टि हुई है। इनमें से 14 मरीजों की मौत भी हो चुकी है। 13 मरीजों की तलाश के लिए संबंधित जिले के सीएमओ को जिम्मेदारी दी गई है। 
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दूसरी लहर में डेल्टा और डेल्टा प्लस वैरिएंट ने ज्यादा तबाही मचाई है। इसे देखते हुए कॉलेज प्रशासन ने जुलाई में संक्रमित मिले लोगों के जीनोम सीक्वेंसिंग जांच के लिए फैसला लिया है। यही कारण है कि जुलाई में दिल्ली, मुंबई और मध्य प्रदेश से आए पॉजिटिव लोगों के साथ ही स्थानीय लोगों के नमूने भेजे गए हैं। 
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विभाग का मानना है कि यदि स्थानीय लोगों में डेल्टा प्लस या कप्पा की पुष्टि होती है तो ज्यादा सतर्क रहना होगा। इन दोनों वैरिएंट में सबसे खतरनाक डेल्टा प्लस है। इस वैरिएंट की मृत्यु दर 60 फीसदी से अधिक है। ऐसे में जीनोम सीक्वेंसिंग की जांच के बाद ही वैरिएंट की सही जानकारी मिल सकेगी।
 
75 नमूने अब तक भेजे जा चुके
माइकोबायोलॉजी विभाग की टीम अब तक आईजीआईबी दिल्ली 75 लोगों के नमूने जांच के लिए भेज चुकी हैं। इनमें केवल 30 की रिपोर्ट आई है। अन्य के रिपोर्ट का विभाग को इंतजार है।

 
माइक्रोबायोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि जिन मरीजों की सीटी वैल्यू 25 से कम थी और जो लोग बाहर से आए हुए थे उन्हीं लोगों का नमूना जीनोम सीक्वेंसिंग की जांच के लिए इस बार भेजा गया है। 
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