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क्लाइमेट स्मार्ट सिटी की दौड़ में शामिल हुआ गोरखपुर, इन खास मानकों के आधार हुआ चयन
Sat, 28 Nov 2020 02:41 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 28 Nov 2020 02:41 PM IST
सार
- शहरी विकास मंत्रालय की ओर से पांच लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में शुरू किया गया है सर्वे
- पांच मानकों के आधार पर क्लाइमेट स्मार्ट सिटी का होना है चयन, नगर निगम ने डाटा किया अपलोड
- नगर निगम के चीफ इंजीनियर को बनाया गया नोडल अधिकारी
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गोरखपुर शहर।
- फोटो : राजेश कुमार
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विस्तार
गोरखपुर क्लाइमेट स्मार्ट सिटी की दौड़ में शामिल हो गया है। विभिन्न पांच पैरामीटर के आधार पर शुरू किए गए 'क्लाइमेट स्मार्ट सिटी असेसमेंट फ्रेमवर्क 2.0' (सीएससीएएफ) के तहत इसका पूरा डाटा नगर निगम की ओर से शहरी विकास मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है। इस डाटा को योजना के तकनीकी सहयोगी के तौर पर गोरखपुर एनवायरमेंटल एक्शन ग्रुप ने इकट्ठा किया है। वहीं नगर निगम के चीफ इंजीनियर सुरेश चंद को इसका नोडल अधिकारी बनाया गया है।
आवास एवं शहरी विकास कार्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 11 सितंबर 2020 को जलवायु स्मार्ट शहरों के आकलन प्रारूप सीएससीएएफ-2.0 का शुभारंभ किया था। इसका उद्देश्य शहरों को निवेश समेत अपनी योजनाओं को क्रियान्वित करने के दौरान सामने आने वाली जलवायु चुनौतियों से निपटने के लिए स्पष्ट खाका उपलब्ध कराना है।
इन पांच मानकों के आधार पर तैयार हो रहा है फ्रेमवर्क
गोरखपुर एनवायरमेंटल एक्शन ग्रुप के विशेषज्ञ कैलाश पांडेय ने बताया कि यह आकलन फ्रेमवर्क विश्व में वर्तमान समय में अपनाए जाने वाले आकलन फ्रेमवर्क के अध्ययन और विभिन्न क्षेत्रों के 26 संस्थानों तथा 60 विशेषज्ञों से विचार विमर्श के बाद तैयार किया गया है। इस फ्रेमवर्क में पांच श्रेणियों में 28 संकेतकों को शामिल किया गया है। जिनमें एनर्जी एंड ग्रीन बिल्डिंग (ऊर्जा एवं हरित निर्माण), अर्बन प्लानिंग एंड ग्रीन कवर बायो डायवर्सिटी (शहरी नियोजन हरित आवरण और जैव विविधता), मोबिलिटी एंड एयर क्वालिटी (आवागमन और जलवायु गुणवत्ता), वाटर मैनेजमेंट (जल प्रबंधन) और वेस्ट मैनेजमेंट (कचरा प्रबंधन) शामिल हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स शहरों के लिए जलवायु केंद्र के प्रारूप के क्रियान्वयन में मंत्रालय का सहयोग कर रहा है।
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आवास एवं शहरी विकास कार्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 11 सितंबर 2020 को जलवायु स्मार्ट शहरों के आकलन प्रारूप सीएससीएएफ-2.0 का शुभारंभ किया था। इसका उद्देश्य शहरों को निवेश समेत अपनी योजनाओं को क्रियान्वित करने के दौरान सामने आने वाली जलवायु चुनौतियों से निपटने के लिए स्पष्ट खाका उपलब्ध कराना है।
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इन पांच मानकों के आधार पर तैयार हो रहा है फ्रेमवर्क
गोरखपुर एनवायरमेंटल एक्शन ग्रुप के विशेषज्ञ कैलाश पांडेय ने बताया कि यह आकलन फ्रेमवर्क विश्व में वर्तमान समय में अपनाए जाने वाले आकलन फ्रेमवर्क के अध्ययन और विभिन्न क्षेत्रों के 26 संस्थानों तथा 60 विशेषज्ञों से विचार विमर्श के बाद तैयार किया गया है। इस फ्रेमवर्क में पांच श्रेणियों में 28 संकेतकों को शामिल किया गया है। जिनमें एनर्जी एंड ग्रीन बिल्डिंग (ऊर्जा एवं हरित निर्माण), अर्बन प्लानिंग एंड ग्रीन कवर बायो डायवर्सिटी (शहरी नियोजन हरित आवरण और जैव विविधता), मोबिलिटी एंड एयर क्वालिटी (आवागमन और जलवायु गुणवत्ता), वाटर मैनेजमेंट (जल प्रबंधन) और वेस्ट मैनेजमेंट (कचरा प्रबंधन) शामिल हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स शहरों के लिए जलवायु केंद्र के प्रारूप के क्रियान्वयन में मंत्रालय का सहयोग कर रहा है।
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गोरखपुर एनवायरमेंटल एक्शन ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. सिराज वजीह ने बताया कि शहरी विकास मंत्रायल की ओर से क्लाइमेट स्मार्ट सिटी असेसमेंट फ्रेमवर्क के लिए गोरखपुर एनवायरमेंटल एक्शन ग्रुप को तकनीकी सहयोगी के तौर पर जिम्मेदारी मिली है। संस्था के विशेषज्ञ कैलाश पांडेय ने यह आंकड़ा इकट्ठा किया है। साथ ही इसे नगर निगम को दे दिया गया है।
नगर निगम के चीफ इंजीनियर सुरेश चंद ने बताया कि क्लाइमेट स्मार्ट सिटी केंद्र सरकार का एक कार्यक्रम है। केंद्र सरकार का मानना है कि पहले से ही 100 स्मार्ट सिटी हैं। उसमें और शहरों को शामिल किया जा सकता है। इसी क्रम में विभिन्न मानकों के आधार पर डाटा तैयार करके शहरी विकास मंत्रालय के पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है। तकनीकी सहयोग गोरखपुर एनवायरमेंटल एक्शन ग्रुप से मिला है।
नगर निगम के चीफ इंजीनियर सुरेश चंद ने बताया कि क्लाइमेट स्मार्ट सिटी केंद्र सरकार का एक कार्यक्रम है। केंद्र सरकार का मानना है कि पहले से ही 100 स्मार्ट सिटी हैं। उसमें और शहरों को शामिल किया जा सकता है। इसी क्रम में विभिन्न मानकों के आधार पर डाटा तैयार करके शहरी विकास मंत्रालय के पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है। तकनीकी सहयोग गोरखपुर एनवायरमेंटल एक्शन ग्रुप से मिला है।