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स्वच्छ सर्वेक्षण: कूड़ामुक्त शहर की श्रेणी में गोरखपुर को शून्य न मिलते तो और मिलती उछाल
Mon, 03 Oct 2022 11:44 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 03 Oct 2022 11:44 AM IST
सार
स्वच्छ सर्वेक्षण के कुल 7500 अंक में से गोरखपुर को कुल 4456 अंक मिले हैं। इसमें गोरखपुर को एसएलपी श्रेणी में 2057, ओडीएफ श्रेणी में 600, सिटीजन फीडबैक श्रेणी में 1800 अंक हासिल हुए हैं। जबकि रैंकिंग में प्रदेश में पहला स्थान पाने वाले शहर नोएडा को जीएफसी में 1050 अंक और सिटीजन फीडबैक में 2126 अंक हासिल हुए हैं।
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प्रदेश में 7वां स्थान मिलने पर सहायक नगर आयुक्त को सम्मानित करते मेयर, साथ में नगर आयुक्त।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
भले ही स्वच्छ सर्वेक्षण में गोरखपुर ने बेहतर उछाल के साथ 74वीं रैंक हासिल की हो, लेकिन गार्बेज फ्री सिटी (कूड़ामुक्त शहर) की श्रेणी में गोरखपुर को शून्य अंक मिला है। सिटीजन फीडबैक श्रेणी में गोरखपुर को प्रदेश में पहला स्थान हासिल करने वाले नोएडा की तुलना में 326 अंक कम हासिल हुए हैं।
ऐसे में अगर गोरखपुर में कूड़े की समस्या का हल होने के साथ शहर को साफ रखने के प्रति लोगों में जागरुकता आ जाए तो स्वच्छ सर्वेक्षण की रैंकिंग में और उछाल आ जाएगी।
स्वच्छ सर्वेक्षण के कुल 7500 अंक में से गोरखपुर को कुल 4456 अंक मिले हैं। इसमें गोरखपुर को एसएलपी श्रेणी में 2057, ओडीएफ श्रेणी में 600, सिटीजन फीडबैक श्रेणी में 1800 अंक हासिल हुए हैं। जबकि रैंकिंग में प्रदेश में पहला स्थान पाने वाले शहर नोएडा को जीएफसी में 1050 अंक और सिटीजन फीडबैक में 2126 अंक हासिल हुए हैं। इस वजह से नोएडा की नेशनल रैंकिंग 37 और प्रदेश में पहली रैंक हासिल हुई है।
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गार्बेज फ्री सिटी का अर्थ है कूड़ामुक्त शहर। पिछले 12 साल से नगर निगम इसके लिए कवायद कर रहा है, लेकिन अब तक सफलता हासिल नहीं कर सका है। शहर के कूड़े को जहां तहां फेंका जाता है। अगर इस समस्या का निदान नगर निगम गोरखपुर निकाल ले तो आने वाले समय में गोरखपुर शहर की रैंकिंग और बेहतर हो जाएगी।
इसको लेकर नगर निगम की ओर से ठोस पहल शुरू कर दी गई है। सहजनवां के सुथनी में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के लिए निर्माण कार्य शुरू होने के साथ बायो सीएनजी प्लांट लगाने की कवायद भी शुरू हो चुकी है।
नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने कहा कि आने वाले समय में स्वच्छ सर्वेक्षण में गोरखपुर की रैंकिंग और बेहतर होगी। शहर कूड़ा मुक्त होगा और गोरखपुर की नेशनल रैंकिंग सुधर जाएगी।
इसे भी पढ़ें: कुशीनगर में प्रेमिका के दरवाजे पर प्रेमी की पीटकर हत्या, चाकू भी घोंपा
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ऐसे में अगर गोरखपुर में कूड़े की समस्या का हल होने के साथ शहर को साफ रखने के प्रति लोगों में जागरुकता आ जाए तो स्वच्छ सर्वेक्षण की रैंकिंग में और उछाल आ जाएगी।
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स्वच्छ सर्वेक्षण के कुल 7500 अंक में से गोरखपुर को कुल 4456 अंक मिले हैं। इसमें गोरखपुर को एसएलपी श्रेणी में 2057, ओडीएफ श्रेणी में 600, सिटीजन फीडबैक श्रेणी में 1800 अंक हासिल हुए हैं। जबकि रैंकिंग में प्रदेश में पहला स्थान पाने वाले शहर नोएडा को जीएफसी में 1050 अंक और सिटीजन फीडबैक में 2126 अंक हासिल हुए हैं। इस वजह से नोएडा की नेशनल रैंकिंग 37 और प्रदेश में पहली रैंक हासिल हुई है।
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गार्बेज फ्री सिटी का अर्थ है कूड़ामुक्त शहर। पिछले 12 साल से नगर निगम इसके लिए कवायद कर रहा है, लेकिन अब तक सफलता हासिल नहीं कर सका है। शहर के कूड़े को जहां तहां फेंका जाता है। अगर इस समस्या का निदान नगर निगम गोरखपुर निकाल ले तो आने वाले समय में गोरखपुर शहर की रैंकिंग और बेहतर हो जाएगी।
इसको लेकर नगर निगम की ओर से ठोस पहल शुरू कर दी गई है। सहजनवां के सुथनी में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के लिए निर्माण कार्य शुरू होने के साथ बायो सीएनजी प्लांट लगाने की कवायद भी शुरू हो चुकी है।
नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने कहा कि आने वाले समय में स्वच्छ सर्वेक्षण में गोरखपुर की रैंकिंग और बेहतर होगी। शहर कूड़ा मुक्त होगा और गोरखपुर की नेशनल रैंकिंग सुधर जाएगी।
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