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Gorakhpur News: बेटी की जिद पर टूटते रहे पिता...बेटी को टूटने से नहीं बचा पाए
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गोरखपुर। बेटी संचिता की हर जिद को पूरा करने वाले पिता मनोचिकित्सक डॉ रामशरण उसकी दिमागी उलझन को भांप नहीं पाए। पहले से ही वित्तीय संकट के दबाव से टूट चुकी संचिता पति द्वारा खुदकुशी किए जाने की सूचना को बर्दाश्त नहीं कर पाई और आत्मघाती कदम उठा बैठी। डॉक्टर को यकीन नहीं हो पा रहा है कि नजाकत और शान-ओ- शौकत की परवरिश से पली उनकी लाडली उनके घर की छत से कूदकर अपनी जान दे देगी।
दो साल पहले पिता डॉ रामशरण दास ने अपनी बेटी की शादी हरीश के साथ गोरखपुर स्थित अपने फार्म हाउस से करवाई थी। बिना हरीश के परिजनों को बुलाए बेटी की शादी गोरखपुर से करवाने के पक्ष में डॉ रामशरण नहीं थे, लेकिन बच्चों के खुशी के लिए उन्होंने समझौता कर लिया।
पारिवारिक लोगों की मानें तो डॉ रामशरण की बेटी और पटना के हरीश के बीच पढ़ाई के दौरान ही आपसी संपर्क बन गया था और दोनों करीबी दोस्त बन गए थे। एमबीए किए हरीश और फैशन डिजाइनिंग की बेटी शादी के पहले भी एक साथ ही रहते थे। कोरोना के तीसरे चरण के बाद से दोनों शादी के लिए परेशान रहने लगे। शादी के कुछ दिन बाद वापस दोनों मुंबई चले गए थे। दोनों अपनी नौकरी के लिए संघर्ष करते हुए जीवन जी रहे थे। मुंबई में 45 हजार रुपये किराए के वन बीएचके फ्लैट में दोनों रहते थे। नौकरी छूटने और दूसरी नौकरी के प्रयास के बीच खुद के रहन-सहन और फ्लैट के किराए समेत अन्य वित्तीय संकटों को देखते हुए डॉ रामशरण फरवरी में दोनों को मुंबई से वापस गोरखपुर आवास पर लेकर चले आए।
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देवरिया बाईपास बुद्ध विहार में डॉ रामशरण का फार्म हाउस है। 31 जून को हरीश ने फार्म हाउस पर ही मुंबई के तर्ज पर गोरखपुर में भी थियेटर खोले जाने का प्रस्ताव रखा था। डॉ रामशरण ने फार्म के केयर टेकर संग इस योजना पर वित्तीय खर्च और होने वाली आय के बारे में एक डाटा तैयार करने को कहा था। मुनाफे का सौदा समझ में आने पर दोनों लोगों की साझेदारी में इसे खोलने की सहमति भी दे दी थी। लेकिन, इसे कुछ बाद शुरू करने की बात कही गई और फिर मामला रुक गया।
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0- पढ़ाई के लोन की किस्त ससुर जमा करते थे
पिता डॉ रामशरण के दामाद हरीश ने अपनी एमबीए की पढ़ाई के लिए एसबीआई से एजुकेशन लोन लिया था। इस लोन का प्रतिमाह 45 हजार रुपये ईएमआई कटती थी। इधर के दिनों में ये किस्त डॉ रामशरण ही जमा कर रहे थे। 5 जुलाई को भी उन्होंने 45 हजार रुपये की किस्त जमा कर अपने दामाद हरीश को इसकी पर्ची भेजी थी। उनसे डॉक्टर ने बैंक स्टेटमेंट भी मांगा था। 5 जुलाई की शाम को 6 बजकर 45 मिनट पर उन्होंने मैसेज किया था और चार मिनट बाद 6 बजकर 49 बजे हरीश ने ऑनलाइन ही बैंक स्टेटमेंट का स्क्रीन शॉट डॉ रामशरण को भेजा था।
0- अंतिम बार मैसेज से ही हो सकी बात
पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि पांच तारीख को दोपहर एक बजे हरीश पटना (अपने घर) जाने की बात बोलकर घर से निकले थे। पत्नी संचिता स्कूटी से हरीश को रेलवे स्टेशन छोड़ने गई थी। जिस समय स्टेशन पर हरीश को संचिता छ़ोड़ी थी, उसी के थोड़ी देर बाद दोपहर 1:50 बजे बापूधाम एक्सप्रेस गोरखपुर से बनारस जाती है। शाम को 8 बजे करीब हरीश ने मैसेज भेजकर पटना पहुंचने की बात कही थी। सुबह 8 बजे करीब हरीश ने संचिता को मैसेज कर बताया कि रात में पहुंचने में लेट हो गया था और सो जाने की वजह से बात नहीं कर सका। यह सब संचिता और हरीश के मोबाइल में रिकार्ड हैं।
0- हरीश की बहन के फोन के बाद बेचैन हो गई थी संचिता
हरीश ने पटना में अपने परिवार को भी बताया था कि शाम तक घर आ जाएंगे। शनिवार को सप्ताह में एक दिन चलने वाली ट्रेन पाटलिपुत्र सुबह 10 बजे चलकर दोपहर 3 बजे तक पटना पहुंचती है। शाम 6 बजे तक जब हरीश पटना अपने घर नहीं पहुंचे तो उनकी बहन ने संचिता को फोन किया और हरीश के बारे में पूछा। इसी के बाद संचिता के दिमाग को धक्का लग गया। पूरी बात संचिता ने अपने पिता को बताई थी। परिजन हरीश को लेकर बेचैन होने लगे।
0- रात 1 बजे कैंट में दर्ज कराई गुमशुदगी
संचिता ने छह जुलाई को शाम 6 बजे से लेकर रात 11 बजे तक अलग-अलग तरीकों से हरीश के बारे में जानकारी जुटाई। बनारस होने की जानकारी तो हो गई, लेकिन कहां हैं? इसकी जानकारी नहीं हो सकी। रात एक बजे संचिता ने कैंट थाने जाकर हरीश के मोबाइल नंबर, फोटो और अन्य डिटेल के साथ गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवा दी। सुबह परिजन बनारस जाने की तैयारी में थे। लेकिन, सुबह 9 बजे करीब हरीश के आत्महत्या की सूचना घर तक आ गई।
0- बेटी थी दिमागी रूप से कमजोर
शहर के प्रमुख मनोरोग चिकित्सक डॉ रामशरण दास ने बताया कि उनकी बेटी इंपल्सिव मेंटली डिसऑर्डर( मानसिक विकार) से होकर गुजर रही थी। यह कोई बीमारी नहीं है कि इसका लक्षण दिखे। इससे ग्रसित अचानक सही-गलत का फैसला नहीं कर पाते हैं। अचानक गलत लिए फैसले इसके लक्षण होते हैं। हमने बेटी और दामाद की खुशी के लिए हर संभव प्रयास किया था। क्या पता था कि बेटी बिना सोचे समझे छत से कूदकर जान दे देगी।
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दो साल पहले पिता डॉ रामशरण दास ने अपनी बेटी की शादी हरीश के साथ गोरखपुर स्थित अपने फार्म हाउस से करवाई थी। बिना हरीश के परिजनों को बुलाए बेटी की शादी गोरखपुर से करवाने के पक्ष में डॉ रामशरण नहीं थे, लेकिन बच्चों के खुशी के लिए उन्होंने समझौता कर लिया।
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पारिवारिक लोगों की मानें तो डॉ रामशरण की बेटी और पटना के हरीश के बीच पढ़ाई के दौरान ही आपसी संपर्क बन गया था और दोनों करीबी दोस्त बन गए थे। एमबीए किए हरीश और फैशन डिजाइनिंग की बेटी शादी के पहले भी एक साथ ही रहते थे। कोरोना के तीसरे चरण के बाद से दोनों शादी के लिए परेशान रहने लगे। शादी के कुछ दिन बाद वापस दोनों मुंबई चले गए थे। दोनों अपनी नौकरी के लिए संघर्ष करते हुए जीवन जी रहे थे। मुंबई में 45 हजार रुपये किराए के वन बीएचके फ्लैट में दोनों रहते थे। नौकरी छूटने और दूसरी नौकरी के प्रयास के बीच खुद के रहन-सहन और फ्लैट के किराए समेत अन्य वित्तीय संकटों को देखते हुए डॉ रामशरण फरवरी में दोनों को मुंबई से वापस गोरखपुर आवास पर लेकर चले आए।
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देवरिया बाईपास बुद्ध विहार में डॉ रामशरण का फार्म हाउस है। 31 जून को हरीश ने फार्म हाउस पर ही मुंबई के तर्ज पर गोरखपुर में भी थियेटर खोले जाने का प्रस्ताव रखा था। डॉ रामशरण ने फार्म के केयर टेकर संग इस योजना पर वित्तीय खर्च और होने वाली आय के बारे में एक डाटा तैयार करने को कहा था। मुनाफे का सौदा समझ में आने पर दोनों लोगों की साझेदारी में इसे खोलने की सहमति भी दे दी थी। लेकिन, इसे कुछ बाद शुरू करने की बात कही गई और फिर मामला रुक गया।
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0- पढ़ाई के लोन की किस्त ससुर जमा करते थे
पिता डॉ रामशरण के दामाद हरीश ने अपनी एमबीए की पढ़ाई के लिए एसबीआई से एजुकेशन लोन लिया था। इस लोन का प्रतिमाह 45 हजार रुपये ईएमआई कटती थी। इधर के दिनों में ये किस्त डॉ रामशरण ही जमा कर रहे थे। 5 जुलाई को भी उन्होंने 45 हजार रुपये की किस्त जमा कर अपने दामाद हरीश को इसकी पर्ची भेजी थी। उनसे डॉक्टर ने बैंक स्टेटमेंट भी मांगा था। 5 जुलाई की शाम को 6 बजकर 45 मिनट पर उन्होंने मैसेज किया था और चार मिनट बाद 6 बजकर 49 बजे हरीश ने ऑनलाइन ही बैंक स्टेटमेंट का स्क्रीन शॉट डॉ रामशरण को भेजा था।
0- अंतिम बार मैसेज से ही हो सकी बात
पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि पांच तारीख को दोपहर एक बजे हरीश पटना (अपने घर) जाने की बात बोलकर घर से निकले थे। पत्नी संचिता स्कूटी से हरीश को रेलवे स्टेशन छोड़ने गई थी। जिस समय स्टेशन पर हरीश को संचिता छ़ोड़ी थी, उसी के थोड़ी देर बाद दोपहर 1:50 बजे बापूधाम एक्सप्रेस गोरखपुर से बनारस जाती है। शाम को 8 बजे करीब हरीश ने मैसेज भेजकर पटना पहुंचने की बात कही थी। सुबह 8 बजे करीब हरीश ने संचिता को मैसेज कर बताया कि रात में पहुंचने में लेट हो गया था और सो जाने की वजह से बात नहीं कर सका। यह सब संचिता और हरीश के मोबाइल में रिकार्ड हैं।
0- हरीश की बहन के फोन के बाद बेचैन हो गई थी संचिता
हरीश ने पटना में अपने परिवार को भी बताया था कि शाम तक घर आ जाएंगे। शनिवार को सप्ताह में एक दिन चलने वाली ट्रेन पाटलिपुत्र सुबह 10 बजे चलकर दोपहर 3 बजे तक पटना पहुंचती है। शाम 6 बजे तक जब हरीश पटना अपने घर नहीं पहुंचे तो उनकी बहन ने संचिता को फोन किया और हरीश के बारे में पूछा। इसी के बाद संचिता के दिमाग को धक्का लग गया। पूरी बात संचिता ने अपने पिता को बताई थी। परिजन हरीश को लेकर बेचैन होने लगे।
0- रात 1 बजे कैंट में दर्ज कराई गुमशुदगी
संचिता ने छह जुलाई को शाम 6 बजे से लेकर रात 11 बजे तक अलग-अलग तरीकों से हरीश के बारे में जानकारी जुटाई। बनारस होने की जानकारी तो हो गई, लेकिन कहां हैं? इसकी जानकारी नहीं हो सकी। रात एक बजे संचिता ने कैंट थाने जाकर हरीश के मोबाइल नंबर, फोटो और अन्य डिटेल के साथ गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवा दी। सुबह परिजन बनारस जाने की तैयारी में थे। लेकिन, सुबह 9 बजे करीब हरीश के आत्महत्या की सूचना घर तक आ गई।
0- बेटी थी दिमागी रूप से कमजोर
शहर के प्रमुख मनोरोग चिकित्सक डॉ रामशरण दास ने बताया कि उनकी बेटी इंपल्सिव मेंटली डिसऑर्डर( मानसिक विकार) से होकर गुजर रही थी। यह कोई बीमारी नहीं है कि इसका लक्षण दिखे। इससे ग्रसित अचानक सही-गलत का फैसला नहीं कर पाते हैं। अचानक गलत लिए फैसले इसके लक्षण होते हैं। हमने बेटी और दामाद की खुशी के लिए हर संभव प्रयास किया था। क्या पता था कि बेटी बिना सोचे समझे छत से कूदकर जान दे देगी।