गोरखपुर बिजली निगम: नियुक्ति में फर्जीवाड़े का खेल पुराना, रोक के बाद भी बनाया दबाव
डेढ़ साल पहले ही 38 कर्मचारियों की भर्ती की फर्जी सूची पकड़ी गई थी, फिर भी प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। कूटरचित दस्तावेज के सहारे नियुक्ति पाने वाले राधेश्याम शर्मा का तबादला नियम दरकिनार कर किया गया।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बिजली निगम की भर्ती प्रक्रिया में फर्जीवाड़े का खेल पुराना है। डेढ़ साल पहले भी 38 कर्मचारियों की भर्ती की फर्जी सूची भेजी गई थी, लेकिन तत्कालीन मुख्य अभियंता देवेंद्र सिंह ने मामला पकड़ लिया था।
मुख्य अभियंता ने आपत्ति के साथ फाइल संबंधित अफसरों को भेजी, फिर भी प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इसी का नतीजा रहा कि कूटरचित दस्तावेज के सहारे चार लोग नौकरी पाने में कामयाब हो गए। हालांकि, मामला पकड़ा गया और सभी बर्खास्त कर दिए गए। अब वेतन वसूली की प्रक्रिया चल रही है।
फर्जी नियुक्तियों के मामले में निगम के कुछ बड़े अफसर भी संदेह के घेरे में हैं। बताया जा रहा है कि बर्खास्त राधेश्याम शर्मा संविदाकर्मचारी था, लेकिन कूटरचित दस्तावेज तैयार करके नियमित कर्मचारी बन गया। नियुक्ति गलत थी, फिर भी बिजली निगम के एक अफसर की मिलीभगत सेअपना तबादला चौरीचौरा खंड कार्यालय करा लिया।
तबादला प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई। निगम के अफसर ने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर राधेश्याम को नई तैनात दी। अब संबंधित अफसर की भूमिका की जांच की बात कही जा रही है। इससे पहले तत्कालीन मुख्य अभियंता देवेंद्र सिंह ने अधिशासी अभियंता कसया कुशीनगर को पत्र भेजा था।
मुख्य अभियंता ने साफ किया था कि सितंबर 2020 में 38 कर्मचारियों की नियुक्ति की जो सूची मिली है, वह कूटरचित प्रतीत हो रही है। मामले की जांच कराके प्रभावी कार्रवाई की जाए। मामले को संबंधित अफसरों ने गंभीरता से नहीं लिया। इसी का नतीजा रहा कि दो नियमित कर्मचारियों की आड़ में चार फर्जी कर्मचारी नियुक्ति पाने में कामयाब हो गए।
फर्जीवाड़ा करने वालों ने कई महीने का वेतन भी लिया। बाद में फर्जीवाड़ा खुलकर सामने आया और जांच बैठा दी गई। वेतन भुगतान रोक दिया गया। अब कूटरचित दस्तावेज के सहारे नौकरी पाने की पुष्टि हुई। लिहाजा, राधेश्याम शर्मा, माधुरी श्रीवास्तव, सुदामा प्रसाद और सुधीर सिंह को बर्खास्त कर दिया गया। अब जिम्मेदार अफसर व कर्मचारियों पर गाज गिर सकती है। फर्जीवाड़े को बिजली निगम के आला अफसरों ने गंभीरता से लिया है। संवाद
रोक के बाद भी बनाया नियुक्ति का दबाव
इन सवालों के नहीं मिले जवाब
- तत्कालीन अधिशासी अभियंता ने मामले की जांच कर रिपोर्ट तय समय के भीतर जमा क्यों नहीं की?
- जिस पत्र में तत्कालीन मुख्य अभियंता ने आपत्ति दर्ज कराई, उसे अभियंता और मुख्य अभियंता कार्यालय के लिपिकों ने इतने हल्के में क्यों निपटा दिया?
- अगर समय से जांच कर कार्रवाई हुई होती तो फर्जी नियुक्तियों से निगम को लाखों रुपये का नुकसान नहीं उठाना पड़ता।
कूटरचित दस्तावेज के सहारे नौकरी का मामला सामने आया है। जांच के बाद चार लोगों की सेवा समाप्त कर दी गई। मामले में कानूनी कार्रवाई भी होगी। जिन अफसर व कर्मचारियों ने लापरवाही बरती है, उनके खिलाफ जांच होगी। रिपोर्ट आने के बाद प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। किसी को बख्शा नहीं जाएगा। - विद्या भूषण, एमडी पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम
फर्जी नियुक्तियों में विभागीय स्तर पर लापरवाही हुई है। ऐसा नहीं होता तो ये नियुक्तियां हो ही नहीं पातीं। इससे जुड़े कुछ और मामलों की गोपनीय जांच कराई जा रही है। कोई भी दोषी बचने नहीं पाएगा। - एके सिंह, मुख्य अभियंता