गोरखपुर: लॉकडाउन के दौरान बाहर से आए मजदूरों को मिला ये तोहफा, अब नहीं छोड़ना पड़ेगा घर
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लॉकडाउन के बीच रोजगार छिनने के बाद दूसरे प्रांतों से घर लौटे मजदूरों को मनरेगा के तहत रोजगार देने में गोरखपुर पहले पायदान पर है। सीडीओ हर्षिता माथुर के निर्देश पर ऐसे लोगों को प्राथमिकता के आधार पर इस योजना में रोजगार देने का काम किया जा रहा है। दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र से लौट 9640 मजदूरों के जॉब कार्ड बनाए जा चुके हैं, जो प्रदेश में सबसे अधिक है।
जिले की कुल 1354 ग्राम पंचायतों में से 1059 पंचायतों में मनरेगा के तहत चल रहे कामों में 37348 जॉब कार्ड धारक काम कर रहे हैं। लॉकडाउन के कारण बड़ी संख्या में गैर प्रांतों और जिलों से प्रवासी मजदूर जनपद में आ रहे हैं। अभी बड़ी संख्या में और मजदूरों के पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में शासन के निर्देश पर इन्हें गांव स्तर पर ही रोजगार की गारंटी देने की संभावनाओं पर सीडीओ हर्षिता माथुर का भी जोर है।
जॉब कार्ड बनने में दिक्कत हो तो फोन करें
सीडीओ हर्षित माथुर ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान मनरेगा के तहत काम दिलाने व मजदूरों की समस्या के समाधान के लिए जनपद स्तर पर एक कंट्रोल रूम की भी स्थापना की गई है। इसका फोन नंबर 0551-2203150 एवं मोबाइल नंबर 9807872555 है।
उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में मनरेगा में कार्य करने के इच्छुक व्यक्ति को यदि किसी भी प्रकार की परेशानी हो तो वे जनपद स्तर पर स्थापित इस कंट्रोल रूम में सूचना दे सकता है, तत्काल समाधान कराया जाएगा।
सीडीओ हर्षिता माथुर कोविड-19 के संक्रमण को देखते हुए विकास कार्य, निर्माण कार्य बंद होने से मजदूरों को काम मिलना भी बंद हो गया था। लॉकडाउन में मजदूरों के सामने रोजी-रोटी के साथ-साथ आर्थिक दिक्कतें बढ़ गईं थीं लेकिन शासन ने मनरेगा के तहत ऐसे व्यक्तियों को प्राथमिकता के आधार पर कार्य दिए जाने का निर्णय किया है।
जिले में अब तक सबसे अधिक 9640 मजदूरों के जॉब कार्ड बनाए जा चुके हैं। एक हजार से अधिक पंचायतों में काम चल रहा है। जल्द ही सभी 1352 पंचायतों में काम शुरू हो जाएंगे।