{"_id":"65409ca09496ae3745096247","slug":"gorakhpur-became-infamous-for-pollution-2023-10-31","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Gorakhpur Pollution: प्रदूषण के लिए बदनाम हुई गोरक्षनगरी...अब टूटी अफसरों की निद्रा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gorakhpur Pollution: प्रदूषण के लिए बदनाम हुई गोरक्षनगरी...अब टूटी अफसरों की निद्रा
Tue, 31 Oct 2023 11:57 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 31 Oct 2023 11:57 AM IST
सार
क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी अनिल कुमार शर्मा ने कहा कि गोरखपुर शहर में वायु की गुणवत्ता सुधारने के लिए सभी उपाय किए जा रहे हैं। निर्माण कार्य स्थलों पर पानी का छिड़काव करने, पराली नहीं जलाने सहित अन्य निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं।
विज्ञापन
बाइक से निकला धुआं।
- फोटो : अमर उजाला।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
गोरखपुर शहर में हवा का प्रदूषण रोकने के लिए दो साल से योजनाएं बन रही हैं, लेकिन इस पर अफसरों की लापरवाही भारी पड़ रही है। शहर को नवंबर 2020 में ही नॉन अटेनमेंट सिटी में शामिल किया जा चुका है, लेकिन अफसरों ने ठीक से इंतजाम नहीं किए। अब जब शहर का प्रदूषण सुर्खियों में है तो अफसरों की निद्रा भी टूटी है।
विज्ञापन
जनवरी माह में प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने नगर निगम सहित अन्य विभागों से इस संबंध में कार्ययोजना मांगी थी। इसके लिए जनवरी माह में 14 करोड़ 23 लाख का बजट शासन ने नगर निगम को उपलब्ध कराया। शहर के नान अटेनमेंट सिटी में शामिल होने के बाद राष्ट्रीय वायु स्वच्छता कार्यक्रम के तहत 42 उपायों से वायु प्रदूषण को कम करते हुए हवा की गुणवत्ता ठीक करने का लक्ष्य रखा गया है।
विज्ञापन
अब जबकि एक्यूआई बढ़ने लगा है, तो अधिकारी हरकत में आए हैं। इसके तहत सड़क के किनारे पटरियों को ठीक कर पौधे लगाने की योजना है। इसके अलावा पायलट प्रोजेक्ट के तहत दो एयर प्यूरीफायर शास्त्री चौराहे पर लगाए जाएंगे।
विज्ञापन
इसे भी पढ़ें: वंदे भारत एक्सप्रेस की तीसरी आंख पकड़ रही पत्थरबाजों की बदमाशी, ऐसे खुला था मामला
इस योजना में शहर की सड़कों की मशीन से सफाई करने के अलावा फुटपाथों पर इंटरलॉकिंग करने, दोनों किनारों पर अधिक पौधे लगाने, विभिन्न चौराहों पर फव्वारों की व्यवस्था करने, सड़कों के डिवाइडर पर ग्रीन बेल्ट का विकास करने, शहर में जगह-जगह पार्किंग की व्यवस्था, यातायात को नियंत्रित करने सहित अन्य इंतजाम किए जाने हैं।
कुछ उपायों पर काम शुरू भी हो गया है। इस योजना के तहत शहर में इंटरलॉकिंग का काम चल रहा है। लेकिन अन्य उपायों को अपनाने में अधिकारी पीछे रह गए हैं। सड़कों के डिवाइडर पर पौधों का अभाव नजर आता है।
इसे भी पढ़ें: घर से लापता बुजुर्ग की हत्या, खेत में फेंकी गई लाश मिली; पोस्टमार्टम में खुली हैवानियत
कुछ उपायों पर काम शुरू भी हो गया है। इस योजना के तहत शहर में इंटरलॉकिंग का काम चल रहा है। लेकिन अन्य उपायों को अपनाने में अधिकारी पीछे रह गए हैं। सड़कों के डिवाइडर पर पौधों का अभाव नजर आता है।
इसे भी पढ़ें: घर से लापता बुजुर्ग की हत्या, खेत में फेंकी गई लाश मिली; पोस्टमार्टम में खुली हैवानियत
क्या है नॉन अटेनमेंट सिटी
गोरखपुर शहर में लगातार पांच साल तक वायु की गुणवत्ता खराब होने पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इसे नॉन अटेनमेंट सिटी में शामिल कर देता है। इसमें सुधार करने के लिए सीपीसीबी के तहत वे सभी उपाय किए जाते हैं, जिनसे वायु प्रदूषण पर लगातार नजर रखते हुए उसका स्तर सुधारा जा सके।
क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी अनिल कुमार शर्मा ने कहा कि गोरखपुर शहर में वायु की गुणवत्ता सुधारने के लिए सभी उपाय किए जा रहे हैं। निर्माण कार्य स्थलों पर पानी का छिड़काव करने, पराली नहीं जलाने सहित अन्य निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं।
क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी अनिल कुमार शर्मा ने कहा कि गोरखपुर शहर में वायु की गुणवत्ता सुधारने के लिए सभी उपाय किए जा रहे हैं। निर्माण कार्य स्थलों पर पानी का छिड़काव करने, पराली नहीं जलाने सहित अन्य निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं।