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Gorakhpur News: जीआईएस प्रशिक्षण से संवरेंगे विद्यार्थियों के कॅरिअर
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गोरखपुर। दिग्विजयनाथ पीजी कॉलेज में आयोजित पांच दिवसीय जीआईएस (भौगोलिक सूचना प्रणाली) प्रशिक्षण विद्यार्थियों के लिए रोजगार के नए अवसरों के द्वार खोलेगा। कॉलेज के भूगोल विभाग की ओर से आयोजित इस प्रशिक्षण में 50 से अधिक प्रतिभागी अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर और कंप्यूटर की मदद से तकनीकी कौशल सीख रहे हैं। इस प्रशिक्षण से विद्यार्थियों को नेविगेशन, शहरी नियोजन, कृषि, आपदा प्रबंधन, दूरसंचार, पर्यावरण और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में कॅरिअर बनाने में मदद मिलेगी।
बुधवार को प्रशिक्षण के तीसरे दिन कॉलेज के प्राचार्य प्रो. ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि जीआईएस का प्रशिक्षण लेने के लिए अब विद्यार्थियों को दूसरे शहरों में नहीं जाना पड़ेगा। कॉलेज में ही यह सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। प्रशिक्षण कॉलेज में स्थापित डॉ. टीपी शाही जीआईएस लैब में दिया जा रहा है। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. कमलेश कुमार मौर्य ने बताया कि विद्यार्थियों को रोजगारपरक शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भूगोल विभाग भविष्य में भी इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगा।
प्रशिक्षक धर्मचंद्र विश्वकर्मा, डॉ. अनूप राय, डॉ. अनुपमा मिश्रा और सत्येंद्र ने कहा कि उचित संसाधन और अवसर मिलने पर विद्यार्थी अपनी प्रतिभा को निखार सकते हैं। वहीं, भूगोल विभाग के प्राध्यापक डॉ. रवींद्र कुमार और संजीत कुमार सिंह ने जीआईएस के सैद्धांतिक और व्यावहारिक ज्ञान को विद्यार्थियों के भविष्य के लिए उपयोगी बताया।
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बुधवार को प्रशिक्षण के तीसरे दिन कॉलेज के प्राचार्य प्रो. ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि जीआईएस का प्रशिक्षण लेने के लिए अब विद्यार्थियों को दूसरे शहरों में नहीं जाना पड़ेगा। कॉलेज में ही यह सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। प्रशिक्षण कॉलेज में स्थापित डॉ. टीपी शाही जीआईएस लैब में दिया जा रहा है। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. कमलेश कुमार मौर्य ने बताया कि विद्यार्थियों को रोजगारपरक शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भूगोल विभाग भविष्य में भी इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगा।
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प्रशिक्षक धर्मचंद्र विश्वकर्मा, डॉ. अनूप राय, डॉ. अनुपमा मिश्रा और सत्येंद्र ने कहा कि उचित संसाधन और अवसर मिलने पर विद्यार्थी अपनी प्रतिभा को निखार सकते हैं। वहीं, भूगोल विभाग के प्राध्यापक डॉ. रवींद्र कुमार और संजीत कुमार सिंह ने जीआईएस के सैद्धांतिक और व्यावहारिक ज्ञान को विद्यार्थियों के भविष्य के लिए उपयोगी बताया।
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