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Gorakhpur News: लड़कियों की तालीम वक्त की जरूरत : मुफ्तिया गाजिया
Mon, 13 May 2024 01:22 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Mon, 13 May 2024 01:22 AM IST
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- तुर्कमानपुर में महिलाओं का जलसा आयोजित
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। मकतब इस्लामियात तुर्कमानपुर में महिलाओं की ''''बज्मे कनीजाने आयशा'''' जलसा आयोजित किया गया। कुरआन की तिलावत कर अलविया खान ने कार्यक्रम की शुरुआत की। इस दौरान सादिया व नात अफीना, शिफा, आयशा ने अल्लाह की बड़ाई बयान करते हुए हम्द पेश की। अध्यक्षता ज्या वारसी ने की। इस मौके पर मुख्य वक्ता मुफ्तिया गाजिया खानम अमजदी ने कहा कि लड़कियों की तालीम वक्त की अहम जरूरत है। अदब व पर्दे का ख्याल करते हुए लड़कियों को दीनी, आधुनिक व तकनीकी तालीम विशेष रूप से प्रदान कराई जाए। जिससे वह अच्छी मां बनकर आने वाली पीढ़ी को अच्छी तालीम दे सकें।
उन्होंने कहा कि लड़कियों का शिक्षित होना जरूरी है, क्योंकि लड़की अगर शिक्षित हो जाती है तो वो अपने पूरे खानदान को शिक्षित कर लेती है। किसी भी बच्चे का सबसे पहला स्कूल उसकी मां की गोद है। इस्लाम में औरतों का खास एहतराम, हुकूक और उसके लिए खास दर्जे रखे गए हैं। महिला मां, बहन, बीवी और बेटी के रूप में कई तरह से लोगों की जिंदगी को संवारती है। उन्होंने कहा कि इस्लाम में लड़कियों की अच्छी परवरिश, अच्छी तालीम और अच्छी तरबियत पर जोर दिया गया है।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए शिफा खातून व अदीबा फातिमा ने कहा कि समाज के निर्माण में औरतों की भूमिका हमेशा से अहम रही है। अच्छा समाज तब बनेगा जब औरतें अपनी जिम्मेदारी को बखूबी अंजाम दे पाएंगी।
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अंत में दरूदो सलाम पढ़कर मुल्क में खुशहाली, तरक्की व अमन की दुआ की गई। शीरीनी बांटी गई। महफिल में अदीबा फातिमा, शाजिया खातून, आलिया, आयशा, मरियम आदि मौजूद रहीं।
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अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। मकतब इस्लामियात तुर्कमानपुर में महिलाओं की ''''बज्मे कनीजाने आयशा'''' जलसा आयोजित किया गया। कुरआन की तिलावत कर अलविया खान ने कार्यक्रम की शुरुआत की। इस दौरान सादिया व नात अफीना, शिफा, आयशा ने अल्लाह की बड़ाई बयान करते हुए हम्द पेश की। अध्यक्षता ज्या वारसी ने की। इस मौके पर मुख्य वक्ता मुफ्तिया गाजिया खानम अमजदी ने कहा कि लड़कियों की तालीम वक्त की अहम जरूरत है। अदब व पर्दे का ख्याल करते हुए लड़कियों को दीनी, आधुनिक व तकनीकी तालीम विशेष रूप से प्रदान कराई जाए। जिससे वह अच्छी मां बनकर आने वाली पीढ़ी को अच्छी तालीम दे सकें।
उन्होंने कहा कि लड़कियों का शिक्षित होना जरूरी है, क्योंकि लड़की अगर शिक्षित हो जाती है तो वो अपने पूरे खानदान को शिक्षित कर लेती है। किसी भी बच्चे का सबसे पहला स्कूल उसकी मां की गोद है। इस्लाम में औरतों का खास एहतराम, हुकूक और उसके लिए खास दर्जे रखे गए हैं। महिला मां, बहन, बीवी और बेटी के रूप में कई तरह से लोगों की जिंदगी को संवारती है। उन्होंने कहा कि इस्लाम में लड़कियों की अच्छी परवरिश, अच्छी तालीम और अच्छी तरबियत पर जोर दिया गया है।
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कार्यक्रम का संचालन करते हुए शिफा खातून व अदीबा फातिमा ने कहा कि समाज के निर्माण में औरतों की भूमिका हमेशा से अहम रही है। अच्छा समाज तब बनेगा जब औरतें अपनी जिम्मेदारी को बखूबी अंजाम दे पाएंगी।
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अंत में दरूदो सलाम पढ़कर मुल्क में खुशहाली, तरक्की व अमन की दुआ की गई। शीरीनी बांटी गई। महफिल में अदीबा फातिमा, शाजिया खातून, आलिया, आयशा, मरियम आदि मौजूद रहीं।