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Gorakhpur News: गीडा की आवासीय योजना को रेरा से मंजूरी, अब होगा टेंडर
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गीडा ने कालेसर में लांच की है आवासीय योजना
करीब 350 प्लॉटों के अलावा ईडब्ल्यूएस श्रेणी में भी बनाए जाने हैं फ्लैट
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। गीडा की कालेसर में विकसित होने वाली आवासीय व व्यावसायिक योजना के लिए रियल एस्टेट (रेग्युलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट 2016 (रेरा) से भी मंजूरी मिल गई है। पंजीकरण के साथ ही इस आवासीय व व्यावसायिक योजना के निर्माण का रास्ता भी साफ हो गया है। जल्द ही इसके लिए विज्ञापन जारी किया जाएगा। यह योजना शहर के बाहर लखनऊ-मुजफ्फरपुर हाईवे पर गोरखपुर की नई पहचान बनाएगी।
लिंक एक्सप्रेसवे और वाराणसी-सोनौली हाईवे ओवरब्रिज बन जाने और गीडा क्षेत्र में बड़ी कंपनियों के आने के साथ ही सहजनवां से लेकर कालेसर तक अधिकारियों-कर्मचारियों के रहने के लिए किराए के मकान महंगे हो गए हैं।
क्षेत्र के विकास और भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए गीडा प्रशासन ने कालेसर जीरो प्वाइंट पर 200 हेक्टेयर क्षेत्रफल में आवासीय और व्यावसायिक योजना लांच की थी।
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गीडा के स्थापना दिवस 30 नवंबर के दिन मुख्यमंत्री ने इस योजना को लांच करते हुए कहा था कि हाईवे के किनारे यह नया क्षेत्र गोरखपुर की नई पहचान बनेगी।
पिछले दिनों मंडलायुक्त की अध्यक्षता में हुई गीडा बोर्ड की बैठक में इस आवासीय व व्यावसायिक योजना के लिए भूखंड और फ्लैट का बेस प्राइज तय किया गया था। यहां प्रति वर्ग मीटर 32600 रुपये की दर निर्धारित की गई है। इस योजना में अलग-अलग क्षेत्रफल के 350 प्लॉट हैं। इसमें 300 वर्ग मीटर, 250 वर्ग मीटर, 200 वर्ग मीटर, 180 वर्ग मीटर, 150 वर्ग मीटर, 120 और 90 वर्ग मीटर के प्लॉट हैं।
इसके अलावा अलग-अलग आय वर्ग की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 96 फ्लैट भी बनाए जाएंगे, जिसमें से 48 ईडब्ल्यूएस और 48 एलआईजी श्रेणी के लिए होगा। इन फ्लैट का निर्माण और पूरे क्षेत्र का विकास गीडा प्रशासन स्वयं करा रहा है। इसके लिए पहले रेरा में पंजीकरण जरूरी था। सोमवार को रेरा ने इसकी मंजूरी देते हुए नंबर आवंटित कर दिया।
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सभी व्यवसायिक और आवासीय प्रोजेक्टों पर लागू होता है रेरा
500 वर्ग मीटर क्षेत्रफल या आठ से अधिक अपार्टमेंट वाले सभी आवासीय प्रोजेक्ट का रेरा में पंजीकरण जरूरी होता है। पंजीकृत एजेंसी को कस्टमर्स से प्राप्त एडवांस राशि का 70 प्रतिशत एक अलग और इसी उद्देश्य के लिए बनाए गए प्रोजेक्ट अकाउंट में जमा करना होता है। कस्टमर्स से प्राप्त एडवांस राशि का उपयोग केवल प्रोजेक्ट के लिए किया जाएगा। प्रोजेक्ट की जानकारी, कानूनी जानकारी और फाइनेंशियल जानकारियों सहित सभी शर्तों की पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी होती है।
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कोट
गीडा की आवासीय व व्यावसायिक योजना को रेरा से पंजीकरण प्राप्त हो गया है। इस पंजीकरण के बाद ही योजना को लांच करने के लिए अन्य गतिविधियों को शुरू किया जा सकता है। अब इसी सप्ताह इससे जुड़े अन्य कार्य आरंभ हो जाएंगे। इस योजना के धरातल पर उतरने से गीडा को तो आर्थिक लाभ होगा ही, लोगों को हाईवे के किनारे एक नए गोरखपुर का एहसास भी होगा।
- अनुज मलिक, सीईओ गीडा
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करीब 350 प्लॉटों के अलावा ईडब्ल्यूएस श्रेणी में भी बनाए जाने हैं फ्लैट
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। गीडा की कालेसर में विकसित होने वाली आवासीय व व्यावसायिक योजना के लिए रियल एस्टेट (रेग्युलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट 2016 (रेरा) से भी मंजूरी मिल गई है। पंजीकरण के साथ ही इस आवासीय व व्यावसायिक योजना के निर्माण का रास्ता भी साफ हो गया है। जल्द ही इसके लिए विज्ञापन जारी किया जाएगा। यह योजना शहर के बाहर लखनऊ-मुजफ्फरपुर हाईवे पर गोरखपुर की नई पहचान बनाएगी।
लिंक एक्सप्रेसवे और वाराणसी-सोनौली हाईवे ओवरब्रिज बन जाने और गीडा क्षेत्र में बड़ी कंपनियों के आने के साथ ही सहजनवां से लेकर कालेसर तक अधिकारियों-कर्मचारियों के रहने के लिए किराए के मकान महंगे हो गए हैं।
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क्षेत्र के विकास और भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए गीडा प्रशासन ने कालेसर जीरो प्वाइंट पर 200 हेक्टेयर क्षेत्रफल में आवासीय और व्यावसायिक योजना लांच की थी।
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गीडा के स्थापना दिवस 30 नवंबर के दिन मुख्यमंत्री ने इस योजना को लांच करते हुए कहा था कि हाईवे के किनारे यह नया क्षेत्र गोरखपुर की नई पहचान बनेगी।
पिछले दिनों मंडलायुक्त की अध्यक्षता में हुई गीडा बोर्ड की बैठक में इस आवासीय व व्यावसायिक योजना के लिए भूखंड और फ्लैट का बेस प्राइज तय किया गया था। यहां प्रति वर्ग मीटर 32600 रुपये की दर निर्धारित की गई है। इस योजना में अलग-अलग क्षेत्रफल के 350 प्लॉट हैं। इसमें 300 वर्ग मीटर, 250 वर्ग मीटर, 200 वर्ग मीटर, 180 वर्ग मीटर, 150 वर्ग मीटर, 120 और 90 वर्ग मीटर के प्लॉट हैं।
इसके अलावा अलग-अलग आय वर्ग की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 96 फ्लैट भी बनाए जाएंगे, जिसमें से 48 ईडब्ल्यूएस और 48 एलआईजी श्रेणी के लिए होगा। इन फ्लैट का निर्माण और पूरे क्षेत्र का विकास गीडा प्रशासन स्वयं करा रहा है। इसके लिए पहले रेरा में पंजीकरण जरूरी था। सोमवार को रेरा ने इसकी मंजूरी देते हुए नंबर आवंटित कर दिया।
सभी व्यवसायिक और आवासीय प्रोजेक्टों पर लागू होता है रेरा
500 वर्ग मीटर क्षेत्रफल या आठ से अधिक अपार्टमेंट वाले सभी आवासीय प्रोजेक्ट का रेरा में पंजीकरण जरूरी होता है। पंजीकृत एजेंसी को कस्टमर्स से प्राप्त एडवांस राशि का 70 प्रतिशत एक अलग और इसी उद्देश्य के लिए बनाए गए प्रोजेक्ट अकाउंट में जमा करना होता है। कस्टमर्स से प्राप्त एडवांस राशि का उपयोग केवल प्रोजेक्ट के लिए किया जाएगा। प्रोजेक्ट की जानकारी, कानूनी जानकारी और फाइनेंशियल जानकारियों सहित सभी शर्तों की पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी होती है।
कोट
गीडा की आवासीय व व्यावसायिक योजना को रेरा से पंजीकरण प्राप्त हो गया है। इस पंजीकरण के बाद ही योजना को लांच करने के लिए अन्य गतिविधियों को शुरू किया जा सकता है। अब इसी सप्ताह इससे जुड़े अन्य कार्य आरंभ हो जाएंगे। इस योजना के धरातल पर उतरने से गीडा को तो आर्थिक लाभ होगा ही, लोगों को हाईवे के किनारे एक नए गोरखपुर का एहसास भी होगा।
- अनुज मलिक, सीईओ गीडा