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Gorakhpur News: धुरियापार में वाइट और ग्रीन इंडस्ट्रीज को बढ़ावा देगा गीडा
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गोरखपुर। गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) अब धुरियापार क्षेत्र में वाइट और ग्रीन इंडस्ट्रीज को बढ़ावा देने की तैयारी में है। इसके लिए धुरियापार के सिक्स और सिक्स-ए ब्लॉक में विशेष रूप से ऐसे उद्योग स्थापित किए जाएंगे, जिनसे प्रदूषण का खतरा बेहद कम हो। इसके साथ ही गीडा के छठे चरण के विस्तार में भगवानपुर और भीटी रावत क्षेत्र को भी शामिल किया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने पर इस बार विशेष फोकस किया जा रहा है। यही वजह है कि ऐसे उद्योगों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिनसे आसपास की आबादी पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े। वाइट और ग्रीन इंडस्ट्रीज के लगने से ध्वनि, जल और वायु प्रदूषण में कमी आएगी और स्थानीय लोगों को राहत मिलेगी। एसीईओ रामप्रकाश के मुताबिक, वाइट इंडस्ट्रीज वे उद्योग होते हैं जिनसे लगभग नगण्य प्रदूषण होता है। इनमें आईटी यूनिट, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, इलेक्ट्रॉनिक असेम्बलिंग, डिजाइनिंग और सर्विस सेक्टर से जुड़े प्रतिष्ठान शामिल हैं। वहीं, ग्रीन इंडस्ट्रीज पर्यावरण के अनुकूल तकनीक पर आधारित होती हैं। इनमें सोलर उपकरण निर्माण, रीसाइक्लिंग यूनिट, जैविक उत्पाद और ऊर्जा संरक्षण से जुड़े उद्योग शामिल किए जाते हैं। एसीईओ ने कहा कि इस पहल से क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण का संतुलन भी कायम रहेगा।
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अधिकारियों के अनुसार, औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने पर इस बार विशेष फोकस किया जा रहा है। यही वजह है कि ऐसे उद्योगों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिनसे आसपास की आबादी पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े। वाइट और ग्रीन इंडस्ट्रीज के लगने से ध्वनि, जल और वायु प्रदूषण में कमी आएगी और स्थानीय लोगों को राहत मिलेगी। एसीईओ रामप्रकाश के मुताबिक, वाइट इंडस्ट्रीज वे उद्योग होते हैं जिनसे लगभग नगण्य प्रदूषण होता है। इनमें आईटी यूनिट, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, इलेक्ट्रॉनिक असेम्बलिंग, डिजाइनिंग और सर्विस सेक्टर से जुड़े प्रतिष्ठान शामिल हैं। वहीं, ग्रीन इंडस्ट्रीज पर्यावरण के अनुकूल तकनीक पर आधारित होती हैं। इनमें सोलर उपकरण निर्माण, रीसाइक्लिंग यूनिट, जैविक उत्पाद और ऊर्जा संरक्षण से जुड़े उद्योग शामिल किए जाते हैं। एसीईओ ने कहा कि इस पहल से क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण का संतुलन भी कायम रहेगा।
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