गोरखपुर विश्वविद्यालय: डीडीयू में स्थापित होगा जेंडर सेंसटाइजेशन सेल, कार्य परिषद से मिली स्वीकृति
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि विश्वविद्यालय में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जेंडर सेंसटाइजेशन सेल की स्थापना की गई है। यह सेल लिंग आधारित भेदभाव और उत्पीड़न से संबंधित नीतियों और रिपोर्टिंग प्रक्रियाओं की जानकारी विश्वविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी और विद्यार्थियों के बीच व्यापक रूप से प्रसारित करेगा।
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लैंगिक भेदभाव, उत्पीड़न और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने जैसे मुद्दों को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों, विद्यार्थियों और कर्मचारियों को सुरक्षित और सहज वातावरण सुनिश्चित करने के लिए विश्वविद्यालय ने जेंडर सेंसटाइजेशन सेल की स्थापना का निर्णय लिया है। इस प्रस्ताव को कुलपति प्रो. पूनम टंडन की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय की कार्य परिषद ने सहमति प्रदान कर दी है।
जेंडर सेंसटाइजेशन सेल लिंग आधारित भेदभाव और उत्पीड़न से संबंधित नीतियों और रिपोर्टिंग प्रक्रियाओं की जानकारी विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों के बीच व्यापक रूप से प्रसारित करेगा। इस सेल की कार्यप्रणाली की नियमित तौर पर समीक्षा भी की जाएगी। कुलपति द्वारा नामित शिक्षक इस सेल का अध्यक्ष होगा।
ये कार्य करेगा जेंडर सेंसटाइजेशन सेल
यह सेल लैंगिक मुद्दों के बारे में जागरूकता के लिए शैक्षिक संसाधन उपलब्ध कराने के साथ-साथ कार्यशालाएं, सेमिनार और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगा। यह सेल लिंग आधारित भेदभाव और उत्पीड़न को रोकने के लिए रणनीतियां विकसित करेगा। साथ ही ऐसे मामलों में गोपनीय रिपोर्टिंग और त्वरित हस्तक्षेप के लिए एक तंत्र भी स्थापित करेगा। यह सेल लिंग-आधारित भेदभाव से पीड़ितों को परामर्श देगा एवं लैंगिक समानता और यौन उत्पीड़न की रोकथाम के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिशा-निर्देशों के अनुरूप नीतियां निर्धारित करेगा।
इस सेल का अध्यक्ष कुलपति द्वारा नामित विश्वविद्यालय का शिक्षक होगा जो सेल के सुचारू रूप से संचालन और लैंगिक नीतियों के कार्यान्वयन के लिए उत्तरदायी होगा। साथ ही छह अन्य सदस्य भी होंगे, जो अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति/जनजाति, अल्पसंख्यक, महिला और गैर शैक्षणिक वर्ग का प्रतिनिधित्व करेंगे।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि विश्वविद्यालय में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जेंडर सेंसटाइजेशन सेल की स्थापना की गई है। यह सेल लिंग आधारित भेदभाव और उत्पीड़न से संबंधित नीतियों और रिपोर्टिंग प्रक्रियाओं की जानकारी विश्वविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी और विद्यार्थियों के बीच व्यापक रूप से प्रसारित करेगा।