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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Gen Z returns to work while grappling with the grief of losing loved ones, anxious about keeping the home fires burning.

Gorakhpur News: अपनों को खोने का गम समेटे फिर नौकरी पर लौटे जेनजी, चिंता घर का चूल्हे जलने की

Sat, 29 Aug 2026 02:17 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 29 Aug 2026 02:17 AM IST
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Gen Z returns to work while grappling with the grief of losing loved ones, anxious about keeping the home fires burning.
नेपाल। आपदा के बाद का दर्द सिर्फ उन परिवारों तक ही सीमित नहीं है, जिनके घर और सामान बाढ़ में बह गए। उनके लिए भी जीना बड़ी चुनौती है, जिन्हें अपनों के लौटने का बेसब्री से इंतजार है और सामने जिंदगी चलाने की मजबूरी भी खड़ी है। इनमें एक बड़ा वर्ग जेन-जी का है जो आंखों में अपनों को खोने का गम और दिल में उनके सकुशल लौटने की उम्मीद लिए दोबारा काम पर लौट आए हैं। वजह साफ है कि उजड़े घर को फिर से बसाना है और चूल्हा भी तो जलाना है।
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नेपाल में रसुआ गांव में जलप्रवाह से भारी तबाही मची है। पूरा बाजार उजड़ गया है। यहां के रहने वाले 24 साल के सुभाष तमांग अपने गांव से 120 किमी दूरी पर मालेखू में एक होटल में काम करते हैं। जब त्रासदी आई तो गांव पर ही थे। जब जलप्रवाह से हुए नुकसान की चर्चाएं शुरू हुईं तो उनकी आंखें भर आईं। बोले, मेरे मेरी मौसी सुनिका तमांग और निशा, मामा कमल थापा लापता हैं। बाजार में उनका घर है, दुकानें बह गईं। कंट्रोल रूम में सूचना दी है पर अभी तक कुछ पता नहीं चला है। तीनों के मोबाइल फोन बंद हैं। यह कहते हुए वे सुबकने लगे। घर की पीड़ा साझा करते हुए कहा, सब कुछ तबाह हो गया है। नौकरी पर आने की मजबूरी है। अगर कमाऊंगा नहीं तो घर को फिर से खड़ा कैसे पर पाऊंगा। घर के चूल्हे भी तो जलाने हैं, बिना रुपये के कहां संभव है।
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वहीं, बीए की छात्रा स्नेहा एक दुकान पर नौकरी करती हैं। बोली, पापा नहीं है और भाई छोटे हैं इसलिए पढ़ाई के साथ मां का हाथ भी बंटाती हूं। हर महीने पांच हजार रुपये (नेपाली) मिलता है तो किसी तरह काम चल जाता है। वे कहती हैं, पढ़ लिखकर टीचर बनना चाहती हूं पर इसके साथ ही घर को भी संभालना है। भारी मन से बोलीं, घर की हालत ऐसी है कि अगर काम पर नहीं जाऊंगी तो रोजमर्रा की जरूरतें कैसे पूरी होंगी। उसकी आवाज में बेबसी साफ झलकती है।
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