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Gorakhpur: कूड़ा प्रबंधन के लिए 100 एकड़ में अगल शहर बसाएगा जीडीए, पीपीपी मोड पर होगी तैयार
Fri, 18 Nov 2022 02:21 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 18 Nov 2022 02:21 PM IST
सार
जीडीए के प्रभारी मुख्य अभियंता किशन सिंह के मुताबिक इंट्रीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट सिटी एक गेटेड टाउनशिप होगी, जिसमें आवासीय कॉलोनी, सड़क, शौचालय, बिजली, पेयजल, सीवर, बच्चों के लिए विद्यालय, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, मार्केट, बैंक शाखा, एटीएम और पार्क की सुविधा होगी। जीडीए इसे सीएसआर फंड से विकसित कर मुहैया कराएगा।
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गोरखपुर विकास प्राधिकरण
- फोटो : Social Media
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विस्तार
गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) गोरखपुर में 100 एकड़ में इंटीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट सिटी विकसित करने की तैयारी में है। यहां शहर से लेकर नगर पंचायतों तक का कूड़ा और अवशिष्टों का प्रबंधन होगा। इससे पर्यावरण संरक्षण में तो मदद मिलेगी ही लोगों को रोजगार भी मिलेगा। इसे पीपीपी मोड पर विकसित किया जाएगा। प्राधिकरण ने जिला प्रशासन से जमीन मुहैया कराने के साथ ही एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) आमंत्रित की है। इच्छुक फर्मों को आवेदन करने के लिए 22 नवंबर तक का मौका दिया गया।
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प्राधिकरण के कार्यवाहक मुख्य अभियंता किशन सिंह के मुताबिक कूड़ा एवं अपशिष्ट प्रबंधन वाली फर्मों को पीपीपी मोड पर प्रोसेसिंग प्लांट लगाने के लिए निशुल्क जमीनें उपलब्ध कराई जाएंगी। सभी प्रकार के कचरा को इंटीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट सिटी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी नगर निगम और नगर पंचायतों की होगी।
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इस तरह के कचरों का होगा निस्तारण
इंट्रीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट सिटी में वेट वेस्ट (गीला कचरा), ड्राई वेस्ट (सूखा कचरा), सी एंड डी वेस्ट (मलबा), हार्टीकल्चर वेस्ट, सेनेटरी वेस्ट, ई- वेस्ट, बायोमेडिकल वेस्ट, स्ट्रीट स्वीपिंग वेस्ट एण्ड ड्रेन शिल्ट, कार-टायर वेस्ट और घरेलू कचरे का निस्तारण किया जाएगा। इसके लिए अलग- अलग कंपनियों को अपनी यूनिट लगाने के लिए प्राधिकरण जगह देगा।
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यह है वेस्ट मैनेजमेंट सिटी की खासियत
जीडीए के प्रभारी मुख्य अभियंता किशन सिंह के मुताबिक इंट्रीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट सिटी एक गेटेड टाउनशिप होगी, जिसमें आवासीय कॉलोनी, सड़क, शौचालय, बिजली, पेयजल, सीवर, बच्चों के लिए विद्यालय, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, मार्केट, बैंक शाखा, एटीएम और पार्क की सुविधा होगी। जीडीए इसे सीएसआर फंड से विकसित कर मुहैया कराएगा। यहां काम करने वालों को किराए पर कॉलोनी में आवासीय सुविधाएं भी मिलेंगी। प्रोसेसिंग यूनिट का खर्च कंपनियों को ही उठाना पड़ेगा। इससे होने वाली आय से कुछ राशि समझौते के मुताबिक जीडीए को भी देनी होगी। यहां निस्तारित होने वाले कचरे से बायो गैस, खाद समेत अन्य तरह के उत्पाद बनाए जाएंगे।
जीडीए महेंद्र सिंह तंवर ने कहा कि इंट्रीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट सिटी के जरिए कचरा प्रबंधन से न केवल पर्यावरण को बचाया जा सकेगा, बल्कि लोगों को रोजगार का भी मौका मिलेगा।
जीडीए महेंद्र सिंह तंवर ने कहा कि इंट्रीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट सिटी के जरिए कचरा प्रबंधन से न केवल पर्यावरण को बचाया जा सकेगा, बल्कि लोगों को रोजगार का भी मौका मिलेगा।