फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   GDA passed 45 maps on land of Asuran Pokhara in Gorakhpur

असुरन पोखरे की जमीन पर जीडीए ने पास किए हैं 45 मानचित्र, जानिए कैसे हुआ खुलासा

Fri, 12 Feb 2021 01:54 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 12 Feb 2021 01:54 PM IST
विज्ञापन
GDA passed 45 maps on land of Asuran Pokhara in Gorakhpur
गोरखपुर विकास प्राधिकरण - फोटो : अमर उजाला।
गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने असुरन पोखरे की जमीन पर एक, दो नहीं बल्कि कुल 45 मानचित्र स्वीकृत किए हैं। प्राधिकरण के पूर्व उपाध्यक्ष राम सिंह की तरफ से वर्ष 2010 में पूर्व कमिश्नर पीके महांति को सौंपी गई एक रिपोर्ट से इसका खुलासा हुआ है। ये सभी मानचित्र वर्ष 1991 और 2008 के बीच जारी किए गए।
विज्ञापन


इन मानचित्रों से जुड़े आवेदन पर किस जेई, एई ने रिपोर्ट लगाई और कौन से तत्कालीन सचिव ने इसे स्वीकृति दी, यह सब स्पष्ट है। बावजूद इसके एक दशक से प्राधिकरण ने कोई कार्रवाई नहीं की, जबकि वर्ष 2010 में ही असुरन पोखरे की जमीन को पाटकर वहां प्लाटिंग और मकान बनवा लेने का मामला प्रकाश में आ गया था। अब जबकि फिर जांच शुरू हुई है तो इसकी एक-एक परत खुलनी शुरू हुई है। रिपोर्ट देने वाले जेई, एई और उसे स्वीकृति देने वाले सचिव में से कई सेवानिवृत्त हो गए हैं तो कई का तबादला हो चुका है।   
विज्ञापन


बता दें कि कमिश्नर जयंत नार्लिकर के निर्देश पर शुरू हुई अभी तक की जांच में जीडीए बुधवार तक यह दावा कर रहा था कि असुरन पोखरे की जमीन पर एक भी मानचित्र नहीं स्वीकृत किया गया है। प्राधिकरण का कहना था कि तीन नक्शे 2007, 2010 और 2017 में दाखिल किए गए थे, मगर सभी खारिज कर दिए गए। हालांकि जीडीए जमीन के भू-प्रयोग को लेकर महायोजना के दस्तावेजों को भी खंगालने के साथ ही विस्तृत जांच की बात कह रहा था। मगर अब जबकि यह खुलासा हुआ है तो प्राधिकरण ने इन सभी स्वीकृत मानचित्रों की फाइलों की भी तलाश शुरू कर दी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

पूर्व उपाध्यक्ष की रिपोर्ट में आराजी संख्या 27 पर संबंधित मानचित्र स्वीकृत होने की बात कही गई है। जीडीए का कहना है कि फाइलों से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आराजी संख्या 27 के कौन सी संख्या पर निर्माण के लिए ये मानचित्र स्वीकृत किए गए। प्राधिकरण के मुताबिक, आराजी संख्या 27 का कुछ भाग तालाब में नहीं आता है। सिर्फ 27/1 ही तालाब की जमीन है।     
 
पोखरे के बदले भूखंड देने की प्रक्रिया अभी चल रही
असुरन पोखरा की जमीन पर मकान बनाने वालों को सदर तहसील प्रशासन की तरफ से नोटिस भेजने के बाद पोखरे के बदले भूखंड देने की प्रक्रिया अभी चल रही है। लोगों को पोखरे की जमीन बेचने वाले ऋषभ जैन की तरफ से पूर्व में (वर्ष 2010) में प्रशासन से हुए समझौते के मुताबिक तहसील प्रशासन को अब तक छह भूखंडों का प्रस्ताव दिया जा चुका है। इनमें चार को नकार दिया गया है, जबकि दो जमीन की तहसील प्रशासन पड़ताल कर रहा है। इसी बीच ज्वाइंट मजिस्ट्रेट व एसडीएम सदर गौरव सिंह सोगरवाल की संस्तुति पर कमिश्नर जयंत नार्लिकर ने पोखरे की जमीन पर निर्माण के लिए मानचित्र स्वीकृत करने वालों की जवाबदेही तय करते हुए कार्रवाई करने के लिए जीडीए वीसी को पत्र लिखा है। बुधवार तक जांच जिस नतीजे पर पहुंची थी, उसी के मुताबिक, जीडीए ने एक भी मानचित्र स्वीकृत नहीं होने का दावा किया था।

इनके मानचित्र हुए हैं स्वीकृत
योगेंद्र त्रिपाठी, गिरजा देवी, कवलपति देवी, तुंगनाथ उपाध्याय, शीला द्विवेदी, विमला देवी, लीला देवी, बैजनाथ गुप्ता, उषा रानी, संगता देवी, रंजन मलिक, प्रदीप कुमार सिंह, छबीला साहू, संजय अग्रवाल, रवि शंकर गुप्ता, रोहिताष कुमार, श्रवण कुमार यादव, ललिता शर्मा, सुनीता पांडेय, रीता देवी, मंजुला अग्रवाल, बिंदा देवी, रत्न कुमार, रूकतणी देवी, भरत गिरी, तपम कुमार, कार्तिक मुखर्जी, मनोज कुमार वर्मा, विजय लक्ष्मी मिश्रा, रतन कुमार, शांति देवी, मनोरमा देवी, क्रांति त्रिपाठी, धनंजय प्रसाद, सरस्वती देवी, लाल बाबू गुप्ता, उमेश चन्द पटेल, विमला देवी, मिठाई लाल, चंद्र कांती शुक्ला, प्रतिमा सिंह, सेवाती देवी, शंभू नाथ गुप्ता, हरिश्चंद्र सिंह और विनय कुमार लाट।

इन अलग-अलग वर्षों में पास किए गए मानचित्र

जीडीए ने सभी 45 मानचित्र वर्ष 1991 से 2008 के बीच में स्वीकृत किए हैं। ये सभी 1991, 1996, 1997, 1998, 1999, वर्ष 2000, 2001, 2002, 2003, 2004, 2007 और 2008 में स्वीकृत किए गए हैं।

मानचित्र स्वीकृत करने में इन जेई ने लगाई थी रिपोर्ट
जेई सुनील कुमार सैनी, ज्ञानेश्वर सिंह, शिव प्रसाद श्रीवास्तव, भरत कुमार पांडेय, लक्ष्मण सिंह, यशोदानंद त्रिपाठी, सत्य प्रकाश यादव, सत्यदेव सिंह, नरेंद्र सिंह, शशीभूषण मिश्रा, हंसराज भटी,

इन एई की भी रही भूमिका
एई रवि जैन, अवनींद्र प्रताप सिंह, विजय भूषण दूबे, महमूद हसन खां, राजेश्वर सिंह, राजीव रतन प्रताप सिंह, एसके नागर, एमजेड अंसारी, बीजी सिंह, आरएल सरोज।
 
ये सचिव भी शामिल
सचिव वीके दुबे, सभाराज सिंह, चिंतामणि, शिव श्याम मिश्रा, मंत लाल, कपिल देव त्रिपाठी, पीके श्रीवास्तव, जीपी त्रिपाठी, छोटे लाल पासी, दर्शन सिंह।

भेड़ियागढ़ कॉलोनी के 48 घर अवैध

जीडीए के पूर्व उपाध्यक्ष राम सिंह के मुताबिक, वर्ष 2010 में हुई जांच में जहां बात यह सामने आई थी कि असुरन पोखरे से आच्छादित भूमि पर 45 निर्माण के लिए मानचित्र स्वीकृत किए गए हैं, वहीं 48 भवन अवैध भी मिले थे। इनपर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

जीडीए सचिव राम सिंह गौतम ने बताया कि कमिश्नर के निर्देश पर शुरू हुई अब तक की जांच के आधार पर यह दावा किया गया था कि असुरन पोखरे की जमीन पर कोई मानचित्र नहीं स्वीकृत किया गया है। जांच अभी पूरी नहीं हुई है। पूर्व उपाध्यक्ष की रिपोर्ट में जिन लोगों के मानचित्र स्वीकृत होने की जानकारी है, उन सभी से जुड़ी फाइलों की भी तलाश शुरू कर दी गई है। फाइल देखने पर ही यह पता चलेगा कि जो मानचित्र स्वीकृत हुए हैं आराजी संख्या 27 के कौन से भाग के हैं। क्योंकि इस आराजी संख्या में कुछ भाग ऐसे भी हैं, जो तालाब की जमीन नहीं हैं। विस्तृत जांच के बाद सब स्पष्ट हो जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed