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Ganga Dussehra 2021: आज मनाया जाएगा गंगा दशहरा, गंगा में नहाने से 10 तरह के पापों से मिलती है मुक्ति
Sun, 20 Jun 2021 02:44 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 20 Jun 2021 02:44 AM IST
सार
गंगा दशहरा के दिन पवित्र नदी में स्नान करने से मनुष्य के 10 तरह के पाप समाप्त हो जाते हैं। इसके साथ ही इन दिन स्नान के उपरांत दान-पुण्य करने से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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गंगा दशहरा 2021
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
मां-गंगा का अवतरण दिवस ‘गंगा दशहरा’ 20 जून को मनाया जाएगा। ऐसी मान्यता है कि गंगा दशहरा के दिन पवित्र नदी में स्नान करने से मनुष्य के 10 तरह के पाप समाप्त हो जाते हैं। इसके साथ ही इन दिन स्नान के उपरांत दान-पुण्य करने से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। वाराणसी से प्रकाशित हृषीकेश पंचांग के अनुसार 20 जून दिन रविवार को सूर्योदय पांच बजकर 13 मिनट पर और ज्येष्ठ शुक्ल दशमी तिथि का मान दोपहर 12 बजकर दो मिनट पश्चात एकादशी, चित्रा नक्षत्र दिन में तीन बजकर 27 मिनट तक और पद्म नामक महा औदायिक योग भी है। मध्याह्न मे व्याप्त दशमी होने से गंगा दशहरा व्रत के लिए यह दिन पूर्ण मान्य और प्रशस्त रहेगा।
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ये दस पाप होते हैं नष्ट
पंडित राकेश उपाध्याय के अनुसार गंगा में स्नान करने से 10 तरह के पाप नष्ट होते हैं। इनमें बिना अनुमति के दूसरे की वस्तु देना, हिंसा, पर स्त्री गमन, कटु वचन बोलना, झूठ बोलना, पीछे से बुराई या चुगली करना, निष्प्रयोजन बातें करना, दूसरे की वस्तु को अन्याय पूर्ण ढंग से लेने का विचार रखना, दूसरे के अनिष्ट का चिंतन करना, नास्तिक बुद्धि रखना शामिल है।
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गंगा दशहरा के दिन ऐसे करें पूजन
पंडित शरद चंद्र मिश्रा ने बताया कि गंगा दशहरा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें, यदि गंगा तट वासी हैं तो गंगा नदी में, अन्यथा समीप की पवित्र नदी, अगर यह भी संभव न हो तो घर पर ही जल में गंगा जल मिलाकर स्नान करें। फिर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद गंगा जी की विधि पूर्वक षोडशोपचार विधि से पूजन सम्पन्न करें। यह पूजन नाम मंत्र से भी किया जा सकता है। ‘ओम गं गंगायै नमः’ मंत्र जाप करें। इसके बाद गंगा जी को पृथ्वी पर अवतरित करने वाले भगीरथजी का तथा हिमालय का भी पूजन करें। अंत में दस-दस मुट्ठी अनाज एवं अन्य वस्तुएं दस ब्राह्मणों को दान करें। इस दिन जल और सत्तू का दान करना चाहिए। अगले दिन व्रत का पारण करें।
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मां गंगा के अवतरण की कथा
पंडित बृजेश पांडेय ने बताया कि पौराणिक कथा के अनुसार, मां गंगा को स्वर्गलोक से धरती पर राजा भागीरथ लेकर आए थे। इसके लिए उन्होंने कठोर तप किया था। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा ने भागीरथ की प्रार्थना स्वीकार की थी। लेकिन गंगा माता ने भागीरथ से कहा था कि पृथ्वी पर अवतरण के समय उनके वेग को रोकने वाला कोई चाहिए अन्यथा वे धरती को चीरकर रसातल में चली जाएंगी और ऐसे में पृथ्वीवासी अपने पाप से मुक्त नहीं हो पाएंगे। तब भागीरथ ने मां गंगा की बात सुनकर भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की। भागीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर प्रभु शिव ने गंगा मां को अपनी जटाओं में धारण किया। जिसके बाद माता गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हो सका।