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गोरखपुर: डिग्री कॉलेज के प्रवक्ता सहित 22 लोगों पर गिरोह ने दर्ज कराया केस, हाईकोर्ट में तलब हैं SSP

Thu, 13 Oct 2022 12:13 PM IST
vivek shukla शिवम सिंह, गोरखपुर।
शिवम सिंह, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 13 Oct 2022 12:13 PM IST
सार

कैंपियरगंज पीड़ित खालिद ने कहा कि 2016 में मेरे खिलाफ फर्जी केस दर्ज कराया गया। इसके बाद तीन और केस दर्ज हुए। मुझे लूट तक का आरोपी बनाया गया। सामूहिक दुष्कर्म का केस दर्ज होने के बाद घरवालों तक से नजर नहीं मिला पाता था। 2019 में इस दर्ज केस में मुझे जेल जाना पड़ा। 52 दिन जेल में कैसे बीते आज भी मुझे याद है।

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Gang filed case against 22 people including spokesman of degree college
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दुष्कर्म का केस दर्ज कराकर पीड़ितों से रुपये ऐंठने वाली महिलाओं के गिरोह ने प्रवक्ता सहित 22 लोगों पर केस दर्ज कराया है। एक सैनिक पर खोराबार थाने में केस दर्ज कराकर 9 लाख रुपये की वसूली करने के बाद महिला ने शपथपत्र देकर बताया था कि गुस्से में आकर उसने केस दर्ज कराया था। वहीं, चार मामलों में पुलिस ने जांच के बाद फाइनल रिपोर्ट (एफआर) लगा दी थी। एफआर लगाने वाले एक दरोगा पर गिरोह की महिला ने लूट का केस दर्ज कराया है।

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जानकारी के मुताबिक, पीड़ित कैंपियरगंज निवासी खालिद ने 30 अप्रैल 2022 को तत्कालीन एसएसपी डॉ. विपिन ताडा से मामले की शिकायत की। इसमें सभी मुकदमों का जिक्र अपराध संख्या के साथ किया गया था। अमर उजाला ने इस मुद्दे को उठाया, जिसके बाद एसएसपी ने पूरे प्रकरण की जांच सीओ कैंट, सीओ बांसगांव को सौंपी थी। दोनों सीओ की जांच में मामला सही पाए गया और फिर उनके तबादले के बाद एक बार फिर फाइल लटक गई।
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पीड़ित ने दोबारा एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर से मुलाकात की। इसके बाद एसएसपी के आदेश पर सात अगस्त 2022 को कैंट थाने में गिरोह के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया, लेकिन अब तक इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। बताया जा रहा है कि गिरोह का सरगना एक अधिवक्ता है। अधिवक्ता के खिलाफ भी केस दर्ज है।
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आरोपी के कोर्ट जाने पर पलट गया मामला

पूरा मामला आरोपी गिरोह के अधिवक्ता के हाईकोर्ट जाने पर पलट गया। कैंट थाने में दर्ज केस में आरोपी गिरोह के अधिवक्ता स्टे के लिए गए थे। तभी बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने दो सीओ की जांच रिपोर्ट का हवाला दे दिया। इसके बाद ही कोर्ट ने स्टे देने से इन्कार करते हुए पूरे मामले में अब तक हुई कार्रवाई के साथ एसएसपी गोरखपुर को 18 अक्तूबर को तलब कर लिया। और मामला कोर्ट के संज्ञान में आ गया। अब कोर्ट ने जिला अदालत में चल रही आपराधिक कार्रवाई पर रोक लगा दी।

एफआर लगाने वाले दरोगा ने दिया शपथपत्र
महिला ने 2016 के दौरान ही कैंपियरगंज थाने में तीन लोगों पर सामूहिक दुष्कर्म का केस दर्ज कराया था। मामले में आरोपी पहले जेल भेजे गए, फिर पुलिस ने मामले की गहनता से जांच की। अफसरों के आदेश पर हुई जांच में पुलिस ने पाया कि मामला पूरी तरह से फर्जी है। विवेचक ने मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी। महिला को जैसे ही इसकी जानकारी हुई, उसने फिर विवेचक रहे दरोगा पर ही लूट, बलवा, धमकी देने का केस दर्ज करा दिया। इस बार उसका आरोप था कि केस की जांच के दौरान दरोगा ने उससे रुपये छीन लिए और धमकी दी। दरोगा ने सीओ बांसगांव को दिए शपथपत्र में महिला को पेशेवर और अधिवक्ता को संरक्षक बताया है।

फर्जी केस कर ले ली चार लाख की सरकारी मदद
सीओ बांसगांव की जांच में सामने आया है कि एक मामले में न्यायालय के आदेश पर दर्ज केस में सरकार से चार लाख रुपये महिला ने ले लिए हैं। इस मुकदमे में भी नामजद अधिवक्ता वही हैं। जबकि, इस केस की जांच कर विवेचक ने एफआर (फाइनल रिपोर्ट) लगा दी थी।
 

आज भी याद है जेल में 52 दिन की यातना
कैंपियरगंज पीड़ित खालिद ने कहा कि 2016 में मेरे खिलाफ फर्जी केस दर्ज कराया गया। इसके बाद तीन और केस दर्ज हुए। मुझे लूट तक का आरोपी बनाया गया। सामूहिक दुष्कर्म का केस दर्ज होने के बाद घरवालों तक से नजर नहीं मिला पाता था। 2019 में इस दर्ज केस में मुझे जेल जाना पड़ा। 52 दिन जेल में कैसे बीते आज भी मुझे याद है। घरवालों ने एक समय के लिए मुंह मोड़ लिया था। बड़ी मुश्किल से परिवार को समझा पाया कि मैं गलत नहीं हूं। अब हाईकोर्ट से न्याय मिला है। दुष्कर्म का फर्जी केस दर्ज कराने वाली महिला व गिरोह के दूसरे सदस्यों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। महिलाओं को अधिवक्ता का संरक्षण प्राप्त है। अधिवक्ता के खिलाफ भी कार्रवाई जरूरी है।

दीवानी कचहरी अधिवक्ता मृत्युंजय राज सिंह ने कहा कि गिरोह ने कई लोगों पर फर्जी केस दर्ज कराया है। इसकी जानकारी होने के बाद मैंने केस की पैरवी की। मामला सही होने पर सफलता मिली। एक अधिवक्ता होने का कर्तव्य मैंने निभाया है और आगे भी इस का निर्वहन करुंगा।
 

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