Exclusive: कोरोना की आशंका में इस बीमारी को पाल बैठे लोग, लंबे इलाज के बाद भी नहीं हो पा रहे पूरी तरह से स्वस्थ
कोरोना महामारी के कारण कई युवा ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी) से ग्रसित हो गए हैं। लंबे उपचार के बाद भी वे पूरी तरह से स्वस्थ नहीं हो पा रहे हैं।
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कोरोना महामारी ने कइयों के दिमाग पर गहरा असर डाला है। इसकी वजह से ऐसे लोगों की आदतें बदलकर मानसिक बीमारी में बदल गई। ऐसी एक मानसिक बीमारी है ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी)। इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति कोरोना के संक्रमण से इतना आशंकित रहता है कि वह न केवल बार-बार हाथ धोता है, बल्कि किसी चीज को छूने से पहले और बाद में सैनिटाइज भी करता है। चिकित्सक बताते हैं कि ऐसे लोग भय, संशय और शंका से ग्रसित रहते हैं।
चिकित्सक बताते हैं कि कोरोना महामारी के बीच ओसीडी के कई केस युवाओं से लेकर महिलाओं और बुजुर्गों तक में मिल रहे हैं। इस बीमारी से पीड़ित लोगों में एक ही काम करने की धुन सवार रहती है। यही नहीं हर जगह कोरोना फैलने की आशंका से ग्रसित भी रहते हैं। लंबे समय तक चले इलाज से भी ठीक नहीं हो पा रहे हैं। इन्हें डर लगता है कि बिजली के स्विच से लेकर दरवाजे के हैंडल, गेट, मोबाइल, बाहर से आने वाली सब्जियां, दूध के पैकेट, बाहर से आने वाले लोग कोरोना न फैला दें। जबकि ऐसे लोगों को यह पता होता है कि वह गलत कर रहे हैं, लेकिन खुद को रोक नहीं पाते हैं।
जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ अमित शाही ने बताया कि ओसीडी गंभीर बीमारी है। इससे ग्रसित कई मरीजों का इलाज कोरोना महामारी की पहली लहर से किया जा रहा है। कई मरीज ठीक हो चुके हैं, लेकिन कई हैं, जिनका इलाज चल रहा है। इन मरीजों में हमेशा संशय बना रहता है। मन में किसी बात को लेकर डर और शंका का भाव रहता है। किसी काम की धुन इस तरह सवार हो जाती है कि वह सनक में बदल जाती है। कुल मिलाकर ऐसे लोगों का दिमाग किसी एक ख्याल या काम पर अटक सा जाता है।
रिश्तेदारों के आने पर कर ले रहे झगड़ा
डॉ अमित शाही ने बताया कि कई ऐसे मरीज हैं, जिनके घरों पर रिश्तेदार अगर आ रहे हैं तो उन्हें वह कोरोना की वजह से घर में घुसने नहीं देते हैं। इस वजह से परिवार में झगड़ा हो रहा है। ऐसे मरीजों को इस बात का अहसास है कि वह गलत कर रहे हैं, लेकिन ऐसा करने से वह खुद को रोक नहीं पा रहे हैं। यही नहीं घर पर रहने वाले सदस्य अगर बाहर से आ रहे हैं तो वह उन्हें भी बार-बार नहाने के लिए टोक रहे हैं। किसी भी सामान को छूने के बाद खुद भी 30 से 40 बार हाथ धो रहे हैं। ऐसा दूसरों को भी करने के लिए कह रहे हैं।
क्या है ओसीडी
डॉ अमित शाही ने बताया कि ओसीडी बीमारी में दो कम्पोनेंटस होते हैं। ऑब्सेशन (सनक) और कंपल्शन (मजबूरी)। ऑब्सेशन में कोई सोच, कोई आइडिया होता है, जो इंसान के मन में बार-बार आता है। इस पर कंट्रोल नहीं होता है। जैसे-हाथ धोना या सफाई जैसे कामों से मरीज अपने मन की घबराहट को कंट्रोल करने की कोशिश करता है। यह बायोलॉजिकल और न्यूरोट्रांसमीटर्स का बैलेंस बिगड़ने की वजह से होता है। इसके इलाज में दवाइयों और साइकोथैरेपी का सबसे बड़ा रोल होता है।
केस-एक
सिद्धार्थनगर जिले के बांसी के रहने वाले 26 वर्षीय युवक के घर में कोरोना की पहली लहर में परिवार के दो सदस्य संक्रमित हुए थे। इसका असर युवक के दिमाग पर ऐसा पड़ा कि वह घर में भी किसी चीज को छूने से पहले सैनिटाइजर का इस्तेमाल करने लगा। दिन में 30 से 40 बार हाथ धोने लगा। रिश्तेदारों के आने पर उन्हें घर में घुसने तक नहीं देता था। परिजनों ने डॉक्टर से सलाह ली तो पता चला कि उसे ओसीडी नाम की बीमारी है। फिलहाल उसका जिला अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग में इलाज चल रहा है।
केस-दो
गोरखपुर शहर के रहने वाले 32 वर्षीय युवक के पिता कोरोना की पहली लहर में संक्रमित हो गए थे। इलाज के दौरान उनकी बीआरडी में मौत हो गई। इस बीच परिवार के दो अन्य सदस्यों के साथ युवक भी संक्रमित हो गया। युवक ठीक तो हो गया, लेकिन उसके मस्तिष्क पर ऐसा प्रभाव पड़ा कि वह अब भी दिन भर साफ-सफाई करता रहता है। दरवाजे के हैंडल से लेकर, बाहर से आने वाले सामान तक को छूने से डरता है। पहली लहर से ही उसका इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक युवक ओसीडी नामक बीमारी से ग्रसित है।