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संतकबीरनगर में इस सेनानी ने मंदिर पर फहराया था तिरंगा, आजादी की खुशी में झूम उठे थे लोग

Mon, 25 Jan 2021 06:24 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, संतकबीरनगर।
अमर उजाला नेटवर्क, संतकबीरनगर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 25 Jan 2021 06:24 PM IST
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freedom fighter Lalsa Prasad Mishra special story on Republic day 2021
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय लालसा प्रसाद मिश्र। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।

राष्ट्र भक्तों की गाथाओं को सुनकर लोगों के अंदर देश प्रेम की भावना जागृत हो जाती है। बुजुर्ग बताते हैं कि पहला गणतंत्र दिवस बस्ती जिले के कटेश्वर पार्क में मनाया गया था। जबकि मेंहदावल नगर के मोती मंदिर पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय लालसा प्रसाद मिश्र ने झंडा फहराया था।

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स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के परिजन पंडित जवाहर लाल मिश्र ने बताया कि देश को जब आजादी मिली और प्रथम झंडारोहण का समय आया तो नगर में हर्ष व उल्लास का माहौल था। 26 जनवरी को सुबह से ही कस्बे के बीचो-बीच स्थित मोती मंदिर पर लोग जुटे और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पूर्व विधायक पंडित लालसा प्रसाद मिश्र ने ध्वजारोहण किया।
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नगर की उपस्थित भीड़ ने राष्ट्रीय गीत एक सुर में गाते हुए देश की आजादी के लिए प्राण निछावर करने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को याद किया था। आज भी वह दृश्य आंखों के सामने है। उस वक्त बड़े पिता के साथ प्रथम ध्वजारोहण कार्यक्रम देखने का अवसर मिला था। उस समय लोगों के अंदर देश की आजादी का जश्न मनाने का जज्बा था। लोगों की टोलियां राष्ट्रीय गीत गाने के साथ ही जयकारे लगा रही थी। पूरे दिन कार्यक्रम का दौर चला था।
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दिनभर मनाते आजादी का जश्न

लोकतंत्र सेनानी गिरराज सिंह ने बताया कि 26 जनवरी-1950 को देश को पूर्ण स्वतंत्रता व अपना संविधान मिला। लोगों को प्रथम आजादी का जश्न मनाने का उत्साह लंबे समय से था। मेंहदावल के लोगों ने कस्बे के मोती मंदिर पर तिरंगा फहराकर आजादी का जश्न मनाया था।

बस्ती जनपद मुख्यालय पर लोगों ने बस्ती शहर के कटेश्वर पार्क में ध्वजारोहण कर प्रथम गणतंत्र दिवस मनाया था। पहले देश की स्वतंत्रता व गणतंत्र दिवस की तैयारी काफी पहले से शुरू हो जाती थी।

युवाओं की टोली जहां वीर रस की कविता गाते हुए लोगों को स्वतंत्रता की कहानी सुनाकर देश भक्ति की लौ जलाते थे, वहीं रंगमंच के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की कहानी बयां की जाती थी। इसे लोग देखते थे और अंग्रेजों से पूर्वजों की संघर्ष की आजादी गाथा देख लोगों के अंदर देशभक्ति की भावना जागृत होती थी। झांकियां भी निकाली जाती थीं।

 
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