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गोलघर के व्यापारी के खाते से जालसाजों ने निकाला बीस हजार रुपये

Fri, 08 Jan 2021 12:59 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 08 Jan 2021 12:59 AM IST
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Frauds withdraw twenty thousand rupees from merchant's account
व्यापारी के खाते से जालसाजों ने निकाले बीस हजार रुपये
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गोरखपुर। अनजान नंबर से फोन करने वाले के कहने पर मोबाइल में एनी डेस्क एप इंस्टाल करना व्यापारी को भारी पड़ गया। जालसाजों ने एप के माध्यम से उनके खाते की जानकारी प्राप्त कर ली और बीस हजार रुपये निकाल लिए।
साइबर थाने के उपनिरीक्षक उपेंद्र सिंह ने बताया कि रुस्तमपुर ढाले के पास कार सजावट की दुकान चलाने वाले व्यापारी के साथ घटना हुई है। मोबाइल गेम खेलने के दौरान उनसे एप इंस्टॉल कराया गया था। इसके बाद उनके साथ जालसाजी हुई। बृहस्पतिवार को तहरीर लेकर वह केस दर्ज कराने आए थे। लेकिन एक लाख रुपये से कम की जालसाजी होने के कारण उन्हें स्थानीय थाने पर भेज दिया गया। क्योंकि साइबर थाना रेंज का थाना है यहां केवल एक लाख से ऊपर की जालसाजी के ही केस दर्ज किए जाते हैं।
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साइबर थाने में हैं दर्जन भर प्रार्थना पत्र
जानकारी के अनुसार एनी डेस्क व टीम व्यूअर एप्लीकेशन के माध्यम से जालसाजी का यह पहला मामला नहीं है। साइबर थाने में ऐसे करीब 12 प्रार्थना पत्र पड़े हुए हैं। किसी के पास केवीआईसी (नो योर कस्टमर) अपडेट कराने के नाम जालसाजों का फोन आया तो कोई कोविड की जानकारी लेने के नाम पर ठगा गया। जालसाजों ने भरोसे में लेने के लिए यह भी कहा कि एटीएम का पिन किसी से साझा न करें।
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ऐसे कर रहे खाते को खाली
जालसाज फोन कर एनी डेस्क या टीम व्यूअर एप इंस्टाल करने को कहते हैं। ऐसा करने से आपके मोबाइल की स्क्रीन जालसाजों के सिस्टम पर दिखने लगती है। इसके बाद वैरिफिकेशन के नाम पर एक या दो रुपये का ट्रांजेक्शन करने को कहा जाता है। ऐसा करते ही आपके खाते की जानकारी जालसाजों तक पहुंच जाती है और आपके खाते से रुपये चोरी कर लिए जाते हैं।

किसी के भी कहने पर मोबाइल फोन में किसी तरह का एप ना इंस्टॉल करें। किसी के साथ अपना एटीएम पिनकोड, ओटीपी या किसी यूपीआई एप का पिन या पासवर्ड साझा न करें। धोखाधड़ी होने पर अपने बैंक व पुलिस को तत्काल इसकी जानकारी दें। - उपेंद्र सिंह, उपनिरीक्षक साइबर थाना
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