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12 दिन में दो निगेटिव और दो बार पॉजिटिव हुए रेलवे के पूर्व चिकित्सक, विशेषज्ञ भी चिंतित
Sat, 05 Dec 2020 09:15 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 05 Dec 2020 09:15 PM IST
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कोरोना वायरस की जांच
- फोटो : Amar Ujala
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कोरोना वायरस की गुत्थी लोगों को उलझा रही है। रेलवे अस्पताल के एक पूर्व चिकित्सक और उनका परिवार कोरोना से परेशान हो गए हैं। पिछले 12 दिनों के अंदर वह दो बार पॉजिटिव और दो बार नेगेटिव आ चुके हैं। स्थिति यह है कि डॉक्टर कभी पॉजिटिव तो कभी नेगेटिव मानकर उनका इलाज कर रहे हैं। मौजूदा समय में वह बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन वार्ड में भर्ती हैं, जहां उनका इलाज चल रहा है।
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जानकारी के मुताबिक रेलवे अस्पताल में तैनात पूर्व चिकित्सक पहली बार 25 नवंबर को संक्रमित हुए थे। तेज बुखार होने पर परिजन उन्हें रेलवे अस्पताल ले गए। जहां एंटीजन किट से हुई। जांच में रिपोर्ट पॉजिटिव आई।
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इसके बाद एक दिसंबर को डॉक्टरों ने उनका सैंपल आरटीपीसीआर जांच के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज भेजा। वहां हुई जांच में रिपोर्ट नेगेटिव रही। पूर्व चिकित्सक की पुत्री डॉ. विभा शुक्ला ने बताया कि पिता डायबिटीज टाइप-टू के मरीज हैं।
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संक्रमण के बाद से शुगर लेवल कम नहीं हो रहा है। ऐसे में शुगर कंट्रोल करने के लिए इंसुलिन भी दी गई। इसके बाद भी शुगर नियंत्रण में नहीं आया। इस पर चार दिसंबर को दोबारा उनकी आरटीपीसीआर जांच शहर के एक निजी लैब में कराई गई। जहां रिपोर्ट पॉजिटिव आई।
जांच में जुटे विशेषज्ञ
इसके बाद रेलवे अस्पताल प्रशासन ने उन्हें बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। बीआरडी में आने के बाद फिर से उनकी जांच हुई तो रिपोर्ट निगेटिव आ गया। ऐसे में अब उन्हें मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन वार्ड में भर्ती कर दिया गया है। यहां भी शुगर कंट्रोल पूरी तरह से नहीं है। इसकी वजह से परिजन परेशान है।
माइक्रोबायोलॉजी के विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने कहा कि कोई भी व्यक्ति इतना जल्दी दोबारा संक्रमण का शिकार नहीं हो सकता है। ऐसा हो सकता है कि एक बार उनका सैंपल लेने में चूक हुई हो। ऐसे में वायरस निष्क्रिय हो और रिपोर्ट निगेटिव आ सकती है।
माइक्रोबायोलॉजी के विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने कहा कि कोई भी व्यक्ति इतना जल्दी दोबारा संक्रमण का शिकार नहीं हो सकता है। ऐसा हो सकता है कि एक बार उनका सैंपल लेने में चूक हुई हो। ऐसे में वायरस निष्क्रिय हो और रिपोर्ट निगेटिव आ सकती है।