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Gorakhpur News: चित्रकूट के जंगलों में पीली आंखों वाले जटायु तलाश रहे वनकर्मी, मांस खाने से कम हो रही संख्या
Wed, 10 May 2023 11:53 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 10 May 2023 11:53 AM IST
सार
पशुओं को दर्दनाशक के रुप में एक दवा डायक्लोफेनाक दी जाती है। पशु की मौत के बाद उसका मांस खाने से दवा के असर से गिद्ध भी मर जाते हैं। वन विभाग की तरफ से किए सर्वे में इसी दवा के असर से ज्यादातर गिद्धों की मौत होने की बात सामने आई है।
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गिद्ध (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay
विस्तार
वनकर्मी इन दिनों चित्रकूट के जंगलों में पीली आंखों वाले जटायु (नर राजगिद्ध) तलाश रहे हैं। कैंपियरगंज के भारी वैसी क्षेत्र में बन रहे जटायु संरक्षण केंद्र में फिलहाल तीन मादा जटायु लाई जा चुकी हैं। पीली आंखों वाले जटायु के आ जाने से जोड़ा तैयार हो जाएगा। इसके बाद केंद्र के उद्घाटन की तिथि निर्धारित की जाएगी।
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कैंपियरगंज में पांच हेक्टेयर जमीन पर जटायु संरक्षण केंद्र का निर्माण बॉंबे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी और प्रदेश सरकार की साझेदारी में हो रहा है। यहां आगामी आठ-दस साल में 40 जोड़े जटायु तैयार करने का लक्ष्य है।
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इसके लिए पहले साल केंद्र में दो ब्रीडिंग एवियरी बनाई गई है। केंद्र में तीन मादा जटायु पहुंच चुकी हैं। नर जटायु की दरकार है। इस वजह से टीम चित्रकूट के जंगलों में पीली आंखों वाले जटायु को तलाश रही हैं। मादा जटायु की आंखें काली जबकि नर जटायु की आंखें पीली होती हैं। डीएफओ विकास यादव ने बताया कि भवन समेत अन्य काम पूरे कर लिए गए हैं। जोड़े पूर्ण होते ही उद्घाटन की तिथि पर तय कर दी जाएगी।
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मृत मवेशियों के मांस खाने से कम हो रही संख्या
पशुओं को दर्दनाशक के रुप में एक दवा डायक्लोफेनाक दी जाती है। पशु की मौत के बाद उसका मांस खाने से दवा के असर से गिद्ध भी मर जाते हैं। वन विभाग की तरफ से किए सर्वे में इसी दवा के असर से ज्यादातर गिद्धों की मौत होने की बात सामने आई है।
डीएफओ ने बताया कि उपचार के बाद पशुओं के शरीर में इस दवा के रसायन घुल जाते हैं और जब ये पशु मरते हैं तो उनका मांस खाने वाले गिद्धों की किडनी और लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचता है, जिससे वे मौत का शिकार हो जाते हैं। इन्हीं कारणों से भारत में गिद्धों की संख्या तेजी से कम हो रही है।