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अब 250 साल पुराने 'सुंदर' की होगी रखवाली, तैनात किए गए दो जवान, जानिए क्या है वजह
Tue, 21 Jul 2020 09:07 AM IST
vivek shukla
रोहित सिंह, गोरखपुर।
रोहित सिंह, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 21 Jul 2020 09:07 AM IST
सार
- फरेंदा जंगल के एक पेड़ को किया जा रहा है संरक्षित
- सुंदर-मुंदर नाम से दो साखू वृक्षों में से एक हुआ धराशायी
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सुंदर की रखवाली में वनरक्षक तैनात हुए।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
सुंदर (साखू वृक्ष) की उम्र इस समय 250 वर्ष है। वन विभाग इसे संरक्षित करेगा और इसकी निगरानी भी दिन-रात की जाएगी। इसके लिए बाकायदा दो वनरक्षकों की तैनाती भी की गई है। गोरखपुर रेंज के फरेंदा जंगल में दो साखू के पुराने पेड़ थे। इसमें से एक अभी कुछ महीने पहले ही धराशायी हो गया। वन विभाग ने उसका नाम मुंदर रखा था। अब 250 वर्ष पुराने इस पेड़ को विभाग की तरफ से संरक्षित करने का फैसला किया गया।
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सुंदर की उम्र 250 साल से भी अधिक है। वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार इस वृक्ष की वास्तविक उम्र का पता नहीं है। दावा है कि विभाग ने फरेंदा क्षेत्र के कई बुजुर्गों से बातचीत के बाद इस पेड़ की उम्र को वन विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज किया है। जंगल में दो वृक्ष एक साथ के थे। वन विभाग की तरफ से ही उनकी आयु और महत्व को देखते हुए उन्हें सुंदर व मुंदर नाम दिया गया था।
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वृक्षों की खोज कर विरासत श्रेणी में करेंगे संरक्षित
सुंदर का तना 5.30 मीटर चौड़ा व 58 मीटर लंबा है। इलाके में इस जैसा हराभरा पेड़ दूसरा और है भी नहीं। इससे उसकी गुणवत्ता का भी अंदाजा लगता है। डीएफओ अविनाश कुमार ने बताया कि सुंदर को संरक्षित करने का फैसला लिया गया है। इसके लिए अतिरिक्त तैनाती की गई है।
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सुंदर वृक्ष को ‘विरासत वृक्ष’ का टैग बनाकर अन्य पेड़ों पर चस्पा किया जाएगा। इसकी तलाश फरेंदा के अलावा तरकुलहा, चौरीचौरा, अलीनगर, गोरखनाथ मंदिर सहित कई स्थलों पर की जाएगी। पुराने पेड़ों की उम्र पता लगाने की कोशिश चल रही है। ऐसे सभी वृक्षों पर उसके महत्व को लिखा जाएाग। पेड़ों के किनारे बाड़ (घेरा) बनाए जाएंगे ताकि इन्हें संरक्षित किया जा सकेगा।
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सुंदर वृक्ष को ‘विरासत वृक्ष’ का टैग बनाकर अन्य पेड़ों पर चस्पा किया जाएगा। इसकी तलाश फरेंदा के अलावा तरकुलहा, चौरीचौरा, अलीनगर, गोरखनाथ मंदिर सहित कई स्थलों पर की जाएगी। पुराने पेड़ों की उम्र पता लगाने की कोशिश चल रही है। ऐसे सभी वृक्षों पर उसके महत्व को लिखा जाएाग। पेड़ों के किनारे बाड़ (घेरा) बनाए जाएंगे ताकि इन्हें संरक्षित किया जा सकेगा।