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गोरखपुर: जीडीए में भी सामने आया फर्जी तरीके से मानचित्र पास कराने का मामला, जांच शुरू

Tue, 20 Jul 2021 09:49 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Tue, 20 Jul 2021 09:49 AM IST
सार

लखनऊ के आर्किटेक्ट जितेंद्र त्रिपाठी ने कमिश्नर और जीडीए उपाध्यक्ष से की शिकायत। आर्किटेक्ट ने खुद के फर्जी हस्ताक्षर व पंजीकरण नंबर से कई मानचित्र पास होने का लगाया आरोप।
 

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case of passing map in fake way also surfaced in GDA gorakhpur
गोरखपुर विकास प्राधिकरण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) में भी फर्जी तरीके से कई मानचित्र पास कराने का मामला सामने आया है। प्राधिकरण ने इसकी जांच भी शुरू कर दी है। आर्किटेक्ट के फर्जी हस्ताक्षर व गलत तरीके से पंजीकरण संख्या का इस्तेमाल कर जीडीए से 50 से अधिक नक्शे पास कराए गए हैं, जिसकी जिम्मेदारों को भनक तक नहीं लगी। यह सिलसिला तीन साल से जारी है।
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मेरठ विकास प्राधिकरण में फर्जीवाड़ा सामने आने पर आर्किटेक्ट एसोसिएशन सक्रिय हुआ है। एसोसिएशन ने फर्जी तरीके से पास हुए मानचित्रों को निरस्त कर जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। लखनऊ आर्किटेक्ट एसोसिएशन के लंबे समय तक अध्यक्ष रहे आर्किटेक्ट जितेंद्र त्रिपाठी ने जीडीए के अध्यक्ष और कमिश्नर रवि कुमार एनजी और उपाध्यक्ष आशीष कुमार को ई मेल के जरिए शिकायत की है।
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आरोप है कि जीडीए में दाखिल 100 से अधिक मानचित्रों में उनके फर्जी हस्ताक्षर एवं काउंसिल आफ आर्किटेक्चर (सीओए) के पंजीकरण नंबर का उपयोग किया गया है। जालसाजों ने इनमें से 50 से अधिक मानचित्र तो स्वीकृत भी करा लिए हैं। इसमें आवासीय एवं व्यावसायिक दोनों तरह के मानचित्र हैं। कई भूखंड के क्षेत्रफल तो 350 वर्ग मीटर तक के हैं।
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गोरखपुर आर्किटेक्ट एसोसिएशन भी उठा चुका है मामला

गोरखपुर आर्किटेक्ट एसोसिएशन का दावा है कि उनकी तरफ से भी यह मामला कमिश्नर के सामने उठाया जा चुका है। शिकायत के समय जीडीए के भी अधिकारी मौजूद थे। लेकिन इस मामले में कोई ठोस जानकारी नहीं दे सके। गोरखपुर आर्किटेक्ट एसोसिएशन के मनीष मिश्रा का कहना है कि ऑनलाइन व्यवस्था में पारदर्शिता के साथ फर्जीवाड़े की भी आशंका रहती है। ऑनलाइन साफ्टवेयर में डिजिटल सिग्नेचर की व्यवस्था भी होनी चाहिए।

वहीं जीडीए का तर्क है कि आर्किटेक्ट के नाम का गलत इस्तेमाल हुआ है तो वह कार्रवाई कर सकते हैं, लेकिन आर्किटेक्ट का तर्क है कि जब जीडीए में फर्जीवाड़ा हुआ है तो उनके स्तर से कार्रवाई होनी चाहिए। इसमें लापरवाही उचित नहीं। वहीं अधिकारियों की माने तो पुरानी व्यवस्था में फर्जीवाड़े की आशंका थी, जो अब नए सिस्टम में संभव नहीं है। इस बात से आर्किटेक्ट संतुष्ट नहीं हैं। उनके अनुसार किसी आर्किटेक्ट के पंजीकरण नंबर का प्रयोग कर जालसाज अपना मोबाइल नंबर, ई मेल डालकर मानचित्र दाखिल कर सकता है।

शिकायतकर्ता आर्किटेक्ट जितेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि 2018 में मुझे सूचना मिली थी कि मेरे फर्जी हस्ताक्षर का उपयोग कर जीडीए में मानचित्र दाखिल किया जा रहा है। उस समय भी मैंने दो से तीन बार शिकायत की थी, लेकिन तत्कालीन उपाध्यक्ष का स्थानांतरण हो जाने से कोई कार्रवाई नहीं हुई। इधर मेरठ विकास प्राधिकरण में फर्जीवाड़ा सामने आने पर एसोसिएशन सक्रिय हुआ है तो फिर मैंने शिकायत की है। मेरी जानकारी के अनुसार 50 से अधिक मानचित्र पास हो चुके हैं। करीब 20 मानचित्रों का सबूत मेरे पास है। इसमें प्राधिकरण को कार्रवाई करनी चाहिए, क्योंकि कोई हादसा हुआ तो पहले आर्किटेक्ट को ही दोषी ठहराया जाएगा।

उपाध्यक्ष जीडीए आशीष कुमार ने बताया कि मामले की जानकारी हुई है। यह पिछले साल का मामला है। जांच कराई जा रही है। इसके बाद ही आगे कोई कार्रवाई होगी। नए साफ्टवेयर में गड़बड़ी नहीं है। 
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