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Gorakhpur News: एम्स में पहली बार 11 सेंटीमीटर के कैंसर की पुष्टि, सफल ऑपरेशन
Mon, 02 Mar 2026 02:17 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Mon, 02 Mar 2026 02:17 AM IST
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- बच्ची के कान के पास ऑस्टियोमा कैंसर, सर्जरी कर डॉक्टरों ने दिया जीवनदान
- ऑस्टियोमा कैंसर की वजह से बाएं कान से नहीं दे रहा था सुनाई
गोरखपुर। एम्स ने 12 साल की बच्ची के कान के पास 11 सेंटीमीटर के ऑस्टियोमा कैंसर की सफल सर्जरी कर उसे नया जीवन दिया। पहली बार ऑस्टियोमा के इतने बड़े कैंसर की सर्जरी एम्स में हुई है। बच्ची को बाएं कान से सुनाई नहीं दे रहा था। ऑपरेशन के बाद सही हो गया और अब उसे सुनाई दे रहा है। इस बीमारी की वजह से परिजन और बच्ची पिछले तीन सालों से परेशान थे।
डॉ. गौरव गुप्ता ने बताया कि 12 वर्षीय बच्ची बाएं कान के पीछे सूजन की शिकायत लेकर परिजन ओपीडी में पहुंचे थे। यह समस्या बच्ची को पिछले तीन सालों से थी। सूजन धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा था। जांच करने पर पता चला कि 11 सेंटीमीटर के आकार का ऑस्टियोमा कैंसर है। वैसे तो इस कैंसर की साइज चार से पांच सेंटीमीटर होती है लेकिन पहली बार इतना बड़ा कैंसर कान के पास देखने को मिला। हालांकि, इस कैंसर से त्वचा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा लेकिन दिमाग के नसों तक इसका असर पहुंच गया था। डॉ. गुप्ता ने बताया कि एक्स-रे और सीटी स्कैन से पता चला कि ऑस्टियोमा की वजह से कान की बाहरी नली पर दबाव ज्यादा हो गया। इसकी वजह से बच्ची को बाएं कान से सुनाई नहीं दे रहा था। इसके बाद ऑस्टियोमा की सर्जरी का फैसला लिया गया। कान के पीछे चीरा लगाया गया और हड्डी की सूजन को चारों ओर से अलग किया गया। ईएनटी सर्जन डॉ. रुचिका अग्रवाल की मदद से मास्टॉयड को खुलने से रोकने के लिए मास्टॉयड ड्रिल का भी इस्तेमाल किया गया।
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- ऑस्टियोमा कैंसर की वजह से बाएं कान से नहीं दे रहा था सुनाई
गोरखपुर। एम्स ने 12 साल की बच्ची के कान के पास 11 सेंटीमीटर के ऑस्टियोमा कैंसर की सफल सर्जरी कर उसे नया जीवन दिया। पहली बार ऑस्टियोमा के इतने बड़े कैंसर की सर्जरी एम्स में हुई है। बच्ची को बाएं कान से सुनाई नहीं दे रहा था। ऑपरेशन के बाद सही हो गया और अब उसे सुनाई दे रहा है। इस बीमारी की वजह से परिजन और बच्ची पिछले तीन सालों से परेशान थे।
डॉ. गौरव गुप्ता ने बताया कि 12 वर्षीय बच्ची बाएं कान के पीछे सूजन की शिकायत लेकर परिजन ओपीडी में पहुंचे थे। यह समस्या बच्ची को पिछले तीन सालों से थी। सूजन धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा था। जांच करने पर पता चला कि 11 सेंटीमीटर के आकार का ऑस्टियोमा कैंसर है। वैसे तो इस कैंसर की साइज चार से पांच सेंटीमीटर होती है लेकिन पहली बार इतना बड़ा कैंसर कान के पास देखने को मिला। हालांकि, इस कैंसर से त्वचा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा लेकिन दिमाग के नसों तक इसका असर पहुंच गया था। डॉ. गुप्ता ने बताया कि एक्स-रे और सीटी स्कैन से पता चला कि ऑस्टियोमा की वजह से कान की बाहरी नली पर दबाव ज्यादा हो गया। इसकी वजह से बच्ची को बाएं कान से सुनाई नहीं दे रहा था। इसके बाद ऑस्टियोमा की सर्जरी का फैसला लिया गया। कान के पीछे चीरा लगाया गया और हड्डी की सूजन को चारों ओर से अलग किया गया। ईएनटी सर्जन डॉ. रुचिका अग्रवाल की मदद से मास्टॉयड को खुलने से रोकने के लिए मास्टॉयड ड्रिल का भी इस्तेमाल किया गया।
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