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गोरखपुर में इस नई बीमारी को लेकर स्वास्थ्य विभाग हुआ अलर्ट, ऐसे करेगा बचाव

Thu, 11 Jun 2020 02:31 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 11 Jun 2020 02:31 PM IST
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For safety Kalazar disease insecticide medicine will be sprayed in Gorakhpur
- फोटो : PTI

गोरखपुर के पिपरौली ब्लॉक के भौवापार गांव में कालाजार की रोकथाम के लिए लगातार दस दिनों तक कीटनाशक का छिड़काव किया जाएगा। पिछले साल इस गांव में कालाजार का एक मामला प्रकाश में आया था। ऐसे स्थान जहां कालाजार का एक भी केस सामने आता है, वहां तीन साल तक वर्ष में दो बार छिड़काव करवाया जाता है।

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मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. श्रीकांत तिवारी ने बताया कि छिड़काव कार्य के सिलसिले में एसीएमओ डॉ. आईबी विश्वकर्मा और जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. एके पांडेय की मौजूदगी में पिपरौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया।
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प्रशिक्षण में विश्व स्वास्थ्य संगठन के जोनल कोआर्डिनेटर डॉ. सागर, स्वयंसेवी संस्था पाथ के प्रतिनिधि डॉ. ज्ञान ने भी सहयोग किया। प्रशिक्षण के दौरान प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. निरंकेश्वर राय समेत सीएचसी स्टॉफ, आशा, एएनएम और 06 कार्यकर्ताओं को छिड़काव के दौरान रखी जाने वाली सावधानी के बारे में जानकारी दी गई।
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आयोजन कोविड-19 प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए किया गया। सभी प्रशिक्षुओं को समझाया गया है कि वह शारीरिक दूरी रखते हुए मॉस्क व ग्लब्स का इस्तेमाल कर सावधानी के साथ छिड़काव करेंगे।

कालाजार को जानिए

कालाजार बालू मक्खी से फैलने वाली बीमारी है। यह मक्खी नमी वाले स्थानों पर अंधेरे में पाई जाती है। यह तीन से छह फीट ही उड़ पाती है। इसके काटने के बाद व्यक्ति बीमार हो जाता है। उसे बुखार होता है और रुक-रुक कर बुखार चढ़ता-उतरता है। लक्षण दिखने पर मरीज को चिकित्सक को दिखाना चाहिए। इस बीमारी में मरीज का पेट फूल जाता है। भूख कम लगती है। शरीर पर काला धब्बा पड़ जाता है।

ऐसे होगा छिड़काव
बालू मक्खी जमीन से छह फीट की ऊंचाई तक उड़ सकती है। ऐसे में सभी प्रशिक्षुओं को बताया गया है कि दवा का छिड़काव घर के अंदर तथा बाहर छह फीट तक कराना है। छिड़काव के बाद तीन माह तक छिड़काव स्थल पर पुताई नहीं होनी चाहिए।

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