{"_id":"5f7a1df68ebc3e9bc61caf0a","slug":"food-corporation-of-india-gorakhpur-gorakhpur-city-news-gkp368098818","type":"story","status":"publish","title_hn":"ईपीएम से खाद्यान्न के आवंटन में आएगी पारदर्शिता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ईपीएम से खाद्यान्न के आवंटन में आएगी पारदर्शिता
विज्ञापन
ईपीएम से खाद्यान्न के आवंटन में आएगी पारदर्शिता
अविनाश शर्मा
गोरखपुर। भारतीय खाद्य निगम के किस डिपो में कितना सामान पहुंचा है, यह इलेक्ट्रॉनिक प्रॉक्योरमेंट मॉड्यूल (ईपीएम) के जरिए एक क्लिक पर पता चल सकेगा। इससे खाद्यान्न के आवंटन में पारदर्शिता आएगी। अब तक फसल खरीद के बाद महज रकम को ही पीएफएमएस पोर्टल के माध्यम से किसान के बैंक खाते में ऑनलाइन जमा कराया जाता था।
डिजिटल इंडिया मुहिम में अब इससे आगे अंतिम चरण तक पूरी व्यवस्था ऑनलाइन की जा रही है। मसलन, किसान से धान खरीद के बाद उसे मिल तक भेजने सहित संबंधित डाटा ऑनलाइन अपलोड होगा। मिल भेजने का काम पूरा होने पर मिलर से भारतीय खाद्य निगम को साफ-सुथरा चावल भेजने सहित संबंधित डाटा ऑनलाइन अपलोड मिलेगा। बाद की प्रक्रिया में एक क्लिक पर यह पता लग सकेगा कि किस-किस डिपो में कितना सामान पहुंचा है।
पूरी प्रक्रिया की बारीकियों और अन्य कामकाज को सिखाने के लिए भारतीय खाद्य निगम के मंडल कार्यालय के अधिकारियों के अधीनस्थ कर्मचारियों को अन्नागार, गोरखपुर में प्रशिक्षण दिया गया। मंडल प्रबंधक ऋषि कुमार सिन्हा ने सभी कर्मचारियों को प्रोजेक्टर पर व्यवस्था के सभी चरणों की जानकारी दी। दो वर्ष पहले तक उत्तर प्रदेश में यह व्यवस्था मैन्युअल थी। किसान से खरीद के बाद पीएफएमएस मॉड्यूल से उसके बैंक खाते में धनराशि ऑनलाइन जमा की जाती थी। इससे आगे के सभी चरण मैन्युअल थे, लेकिन अब पूरी व्यवस्था को ऑनलाइन किया जा रहा है। हालांकि छत्तीसगढ़ में करीब दस वर्ष से यह पूरी व्यवस्था ऑनलाइन है। उत्तर प्रदेश सरकार ने भी इसी तर्ज पर इस व्यवस्था का एडवांस प्रारूप तैयार कर इसे जल्द लागू करने का फैसला किया है।
विज्ञापन
सब कुछ होगा ऑनलाइन
उत्तर प्रदेश सरकार की योजना इस व्यवस्था को खरीद विपणन वर्ष 2020-21 तक प्रभावी तरीके से लागू करने की है। इसके लिए राज्य सरकार और भारतीय खाद्य निगम द्वारा हार्डवेयर, प्रिंटर और इंटरनेट के जरिए सबकुछ ऑनलाइन रखा जाएगा। ऑनलाइन सिस्टम के बाद किसान को अपनी फसल बेचने के लिए एनआईसी पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा। किसान के रकबे के अनुसार वहां की उत्पादक क्षमता के अनुसार तय किया जाएगा कि वह कितनी मात्रा में फसल को बेच सकेगा।
विज्ञापन
अविनाश शर्मा
गोरखपुर। भारतीय खाद्य निगम के किस डिपो में कितना सामान पहुंचा है, यह इलेक्ट्रॉनिक प्रॉक्योरमेंट मॉड्यूल (ईपीएम) के जरिए एक क्लिक पर पता चल सकेगा। इससे खाद्यान्न के आवंटन में पारदर्शिता आएगी। अब तक फसल खरीद के बाद महज रकम को ही पीएफएमएस पोर्टल के माध्यम से किसान के बैंक खाते में ऑनलाइन जमा कराया जाता था।
डिजिटल इंडिया मुहिम में अब इससे आगे अंतिम चरण तक पूरी व्यवस्था ऑनलाइन की जा रही है। मसलन, किसान से धान खरीद के बाद उसे मिल तक भेजने सहित संबंधित डाटा ऑनलाइन अपलोड होगा। मिल भेजने का काम पूरा होने पर मिलर से भारतीय खाद्य निगम को साफ-सुथरा चावल भेजने सहित संबंधित डाटा ऑनलाइन अपलोड मिलेगा। बाद की प्रक्रिया में एक क्लिक पर यह पता लग सकेगा कि किस-किस डिपो में कितना सामान पहुंचा है।
विज्ञापन
पूरी प्रक्रिया की बारीकियों और अन्य कामकाज को सिखाने के लिए भारतीय खाद्य निगम के मंडल कार्यालय के अधिकारियों के अधीनस्थ कर्मचारियों को अन्नागार, गोरखपुर में प्रशिक्षण दिया गया। मंडल प्रबंधक ऋषि कुमार सिन्हा ने सभी कर्मचारियों को प्रोजेक्टर पर व्यवस्था के सभी चरणों की जानकारी दी। दो वर्ष पहले तक उत्तर प्रदेश में यह व्यवस्था मैन्युअल थी। किसान से खरीद के बाद पीएफएमएस मॉड्यूल से उसके बैंक खाते में धनराशि ऑनलाइन जमा की जाती थी। इससे आगे के सभी चरण मैन्युअल थे, लेकिन अब पूरी व्यवस्था को ऑनलाइन किया जा रहा है। हालांकि छत्तीसगढ़ में करीब दस वर्ष से यह पूरी व्यवस्था ऑनलाइन है। उत्तर प्रदेश सरकार ने भी इसी तर्ज पर इस व्यवस्था का एडवांस प्रारूप तैयार कर इसे जल्द लागू करने का फैसला किया है।
विज्ञापन
सब कुछ होगा ऑनलाइन
उत्तर प्रदेश सरकार की योजना इस व्यवस्था को खरीद विपणन वर्ष 2020-21 तक प्रभावी तरीके से लागू करने की है। इसके लिए राज्य सरकार और भारतीय खाद्य निगम द्वारा हार्डवेयर, प्रिंटर और इंटरनेट के जरिए सबकुछ ऑनलाइन रखा जाएगा। ऑनलाइन सिस्टम के बाद किसान को अपनी फसल बेचने के लिए एनआईसी पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा। किसान के रकबे के अनुसार वहां की उत्पादक क्षमता के अनुसार तय किया जाएगा कि वह कितनी मात्रा में फसल को बेच सकेगा।