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Gorakhpur News: पहले जीतते थे भरोसा, फिर लोन दिलाकर रकम कराते थे निवेश
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कंपनी में निवेश कराकर ठगी का मामला
पर्सनल लोन के सहारे निवेश के नाम पर बुना गया ठगी का जाल
भरोसे की बुनियाद पर खड़ा किया गया नेटवर्क, बैंक कर्मियों की भूमिका भी सवालों में
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। रिच सिग्नल मल्टी बिजनेस प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़ी ऑल ट्रेड मार्ट लिमिटेड की ओर से ठगी का मामला यह दिखाता है कि सुनियोजित तरीके से आम लोगों को निवेश के जाल में फंसाया गया। पीड़ितों से बातचीत में सामने आया कि जालसाजों ने छोटे निवेश पर रिर्टन दिलाकर भरोसा जीता। इसके बाद अधिक मुनाफे का लालच दिया। रकम न होने पर पर्सनल लोन दिलाया और लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दिया।
देवरिया के भाटपाररानी टीकमपार निवासी रविकांत कुमार ने बताया कि कंपनी से जुड़े एजेंट गणेश व छेदी खुद को भरोसेमंद निवेश सलाहकार बताकर संपर्क करते थे। शुरुआत में छोटे निवेश पर समय से रिटर्न देकर लोगों का विश्वास जीता जाता था। जब भरोसा पक्का हो जाता, तब ज्यादा मुनाफे का लालच देकर बड़ी रकम निवेश करने के लिए तैयार किया जाता। जिन लोगों के पास तत्काल पूंजी नहीं होती थी, उन्हें बैंक से पर्सनल लोन दिलाने का विकल्प दिया जाता था। एजेंट यह भरोसा दिलाते थे कि कंपनी खुद उनके पर्सनल लोन की ईएमआई भरेगी और निवेशक को किसी तरह की आर्थिक परेशानी नहीं होगी। इसी आश्वासन पर कई लोग लोन लेने को राजी हो गए।
जालसाजों ने झांसे में आए श्यामजी रावत, गिरिजेश और प्रहलाद सिंह ने बताया कि कंपनी के लोग उन्हें सीधे बैंक शाखाओं तक ले जाते थे या पहले से तय बैंक कर्मियों से संपर्क करवाते थे। लोन से जुड़े दस्तावेज पहले ही तैयार करा लिए जाते थे, जिससे पर्सनल लोन की प्रक्रिया बेहद आसान और तेज हो जाती थी। लोन की पूरी रकम सीधे निवेश के नाम पर कंपनी के खातों में जमा करा दी जाती थी। शुरुआती दौर में कंपनी की ओर से कुछ महीनों तक ईएमआई समय से भरी जाती थी। इससे निवेशकों को यह भरोसा हो जाता था कि उनका पैसा सुरक्षित है। लेकिन जैसे ही बड़ी संख्या में लोगों से मोटी रकम जुटा ली गई, कंपनी के दफ्तर बंद होने लगे, मोबाइल नंबर स्विच ऑफ हो गए और आरोपी भाग निकले।
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बैंक कर्मियों की भूमिका पर उठे सवाल
पीड़ितों का आरोप है कि बिना ठोस आय स्रोत और पर्याप्त जांच के पर्सनल लोन का पास होना संदेह पैदा करता है। कुछ मामलों में एक ही इलाके के कई लोगों को एक साथ लोन स्वीकृत किया गया, जो सामान्य बैंकिंग प्रक्रिया के विपरीत है। इससे बैंक कर्मियों की संभावित साठगांठ की आशंका जताई जा रही है।
जानकारों का कहना है कि यदि नियमों को नजरअंदाज कर लोन स्वीकृत किए गए हैं तो संबंधित कर्मियों की जवाबदेही तय हो सकती है। इधर, ठगी के शिकार विशाल सिंह यादव ने बताया कि एजेंट ने कहा था कि कंपनी सरकारी प्रोजेक्ट में काम कर रही है। शुरुआत में ईएमआई समय से भरी गई, इसलिए भरोसा हो गया। अब न निवेश बचा है और न लोन चुकाने की स्थिति। वहीं अखिलेश निषाद ने कहा कि जब अचानक ईएमआई का भुगतान बंद हुआ और बैंक से नोटिस आई तब समझ आया कि हम ठगी का शिकार हो चुके हैं।
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ठगी से बचने के उपाय और विशेषज्ञों की राय
एसपी क्राइम सुधीर जायसवाल का कहना है कि निवेश से पहले कंपनी का रजिस्ट्रेशन, आरओसी रिकॉर्ड, बैलेंस शीट और नियामक मंजूरी की जांच अनिवार्य है। केवल अधिक रिटर्न के वादे पर किसी योजना में पैसा लगाना खतरनाक साबित हो सकता है। विशेषज्ञ साफ तौर पर चेतावनी देते हैं कि निवेश के लिए पर्सनल लोन लेना बेहद जोखिम भरा होता है, क्योंकि रिटर्न रुकते ही पूरा बोझ निवेशक पर आ जाता है।
एसपी क्राइम के अनुसार, पर्सनल लोन लेते समय उसकी शर्तों, ब्याज दर और पुनर्भुगतान क्षमता को स्वयं समझना चाहिए। किसी भी एजेंट या बिचौलिए के भरोसे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर न करें। यदि कोई कंपनी ईएमआई खुद भरने का दावा करे तो उसे खतरे की घंटी समझें। इस तरह के मामलों में पीड़ितों को सामूहिक रूप से पुलिस, आर्थिक अपराध शाखा और संबंधित बैंकों में शिकायत करनी चाहिए। समय रहते शिकायत दर्ज कराने से रकम की रिकवरी और आरोपियों पर कार्रवाई की संभावना बढ़ जाती है।
पर्सनल लोन के सहारे निवेश के नाम पर बुना गया ठगी का जाल
भरोसे की बुनियाद पर खड़ा किया गया नेटवर्क, बैंक कर्मियों की भूमिका भी सवालों में
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। रिच सिग्नल मल्टी बिजनेस प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़ी ऑल ट्रेड मार्ट लिमिटेड की ओर से ठगी का मामला यह दिखाता है कि सुनियोजित तरीके से आम लोगों को निवेश के जाल में फंसाया गया। पीड़ितों से बातचीत में सामने आया कि जालसाजों ने छोटे निवेश पर रिर्टन दिलाकर भरोसा जीता। इसके बाद अधिक मुनाफे का लालच दिया। रकम न होने पर पर्सनल लोन दिलाया और लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दिया।
देवरिया के भाटपाररानी टीकमपार निवासी रविकांत कुमार ने बताया कि कंपनी से जुड़े एजेंट गणेश व छेदी खुद को भरोसेमंद निवेश सलाहकार बताकर संपर्क करते थे। शुरुआत में छोटे निवेश पर समय से रिटर्न देकर लोगों का विश्वास जीता जाता था। जब भरोसा पक्का हो जाता, तब ज्यादा मुनाफे का लालच देकर बड़ी रकम निवेश करने के लिए तैयार किया जाता। जिन लोगों के पास तत्काल पूंजी नहीं होती थी, उन्हें बैंक से पर्सनल लोन दिलाने का विकल्प दिया जाता था। एजेंट यह भरोसा दिलाते थे कि कंपनी खुद उनके पर्सनल लोन की ईएमआई भरेगी और निवेशक को किसी तरह की आर्थिक परेशानी नहीं होगी। इसी आश्वासन पर कई लोग लोन लेने को राजी हो गए।
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जालसाजों ने झांसे में आए श्यामजी रावत, गिरिजेश और प्रहलाद सिंह ने बताया कि कंपनी के लोग उन्हें सीधे बैंक शाखाओं तक ले जाते थे या पहले से तय बैंक कर्मियों से संपर्क करवाते थे। लोन से जुड़े दस्तावेज पहले ही तैयार करा लिए जाते थे, जिससे पर्सनल लोन की प्रक्रिया बेहद आसान और तेज हो जाती थी। लोन की पूरी रकम सीधे निवेश के नाम पर कंपनी के खातों में जमा करा दी जाती थी। शुरुआती दौर में कंपनी की ओर से कुछ महीनों तक ईएमआई समय से भरी जाती थी। इससे निवेशकों को यह भरोसा हो जाता था कि उनका पैसा सुरक्षित है। लेकिन जैसे ही बड़ी संख्या में लोगों से मोटी रकम जुटा ली गई, कंपनी के दफ्तर बंद होने लगे, मोबाइल नंबर स्विच ऑफ हो गए और आरोपी भाग निकले।
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पीड़ितों का आरोप है कि बिना ठोस आय स्रोत और पर्याप्त जांच के पर्सनल लोन का पास होना संदेह पैदा करता है। कुछ मामलों में एक ही इलाके के कई लोगों को एक साथ लोन स्वीकृत किया गया, जो सामान्य बैंकिंग प्रक्रिया के विपरीत है। इससे बैंक कर्मियों की संभावित साठगांठ की आशंका जताई जा रही है।
जानकारों का कहना है कि यदि नियमों को नजरअंदाज कर लोन स्वीकृत किए गए हैं तो संबंधित कर्मियों की जवाबदेही तय हो सकती है। इधर, ठगी के शिकार विशाल सिंह यादव ने बताया कि एजेंट ने कहा था कि कंपनी सरकारी प्रोजेक्ट में काम कर रही है। शुरुआत में ईएमआई समय से भरी गई, इसलिए भरोसा हो गया। अब न निवेश बचा है और न लोन चुकाने की स्थिति। वहीं अखिलेश निषाद ने कहा कि जब अचानक ईएमआई का भुगतान बंद हुआ और बैंक से नोटिस आई तब समझ आया कि हम ठगी का शिकार हो चुके हैं।
ठगी से बचने के उपाय और विशेषज्ञों की राय
एसपी क्राइम सुधीर जायसवाल का कहना है कि निवेश से पहले कंपनी का रजिस्ट्रेशन, आरओसी रिकॉर्ड, बैलेंस शीट और नियामक मंजूरी की जांच अनिवार्य है। केवल अधिक रिटर्न के वादे पर किसी योजना में पैसा लगाना खतरनाक साबित हो सकता है। विशेषज्ञ साफ तौर पर चेतावनी देते हैं कि निवेश के लिए पर्सनल लोन लेना बेहद जोखिम भरा होता है, क्योंकि रिटर्न रुकते ही पूरा बोझ निवेशक पर आ जाता है।
एसपी क्राइम के अनुसार, पर्सनल लोन लेते समय उसकी शर्तों, ब्याज दर और पुनर्भुगतान क्षमता को स्वयं समझना चाहिए। किसी भी एजेंट या बिचौलिए के भरोसे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर न करें। यदि कोई कंपनी ईएमआई खुद भरने का दावा करे तो उसे खतरे की घंटी समझें। इस तरह के मामलों में पीड़ितों को सामूहिक रूप से पुलिस, आर्थिक अपराध शाखा और संबंधित बैंकों में शिकायत करनी चाहिए। समय रहते शिकायत दर्ज कराने से रकम की रिकवरी और आरोपियों पर कार्रवाई की संभावना बढ़ जाती है।