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जरूरी खबर: अगस्त में छपेगा पूर्वांचल के सतत विकास पर पुस्तक का पहला अंक, जानिए किन भाषाओं में होगा इसका प्रकाशन

Tue, 29 Jun 2021 03:57 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 29 Jun 2021 03:57 PM IST
सार

सीएम के आर्थिक सलाहकार की मौजूदगी में प्रत्येक चैप्टर की हुई समीक्षा। गोविवि के कुलपति ने कहा कि पुस्तक के सुझावों पर सरकार बनाएगी पूर्वांचल के विकास की नीति।

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First issue of book on sustainable development of Purvanchal will be published in August
कुलपति प्रो राजेश सिंह के साथ मुख्यमंत्री के आर्थिक सलाहकार डॉ. केवी राजू। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में हुए पूर्वांचल के सतत विकास पर राज्य स्तरीय सेमिनार के सुझावों पर आधारित पुस्तक का पहला अंक अगस्त के पहले सप्ताह में प्रकाशित होगा। सोमवार को मुख्यमंत्री के आर्थिक सलाहकार डॉ. केवी राजू की मौजूदगी में पुस्तक के प्रत्येक चैप्टर की समीक्षा की गई और सुधार के लिए जरूरी सुझाव दिए गए।
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विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन के कमेटी हाल में बैठक हुई। सभी सेक्टर को-ऑर्डिनेटर्स ने प्राथमिक, विनिर्माण, सेवा, सामाजिक क्षेत्र, जल क्षेत्र पर 10-10 मिनट का पीपीटी प्रेजेंटेशन प्रस्तुत कर प्रगति रिपोर्ट दिखाई। कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने डॉ केवी राजू का स्वागत करते हुए कहा कि प्रेजेंटेशन के बाद प्रकाशन को बेहतर बनाने के लिए डिस्कशन रखा गया है ताकि उत्कृष्ट सुझावों के माध्यम से विवि पूर्वांचल के विकास का रोडमैप तैयार कर सकें। सेमिनार के सुझावों को पूर्वांचल में लागू करने के लिए कैबिनेट कमेटी का गठन किया गया है।
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अंग्रेजी व हिंदी दोनों भाषाओं में प्रकाशन होगा
कुलपति ने कहा कि अंग्रेजी और हिंदी दोनों भाषाओं में पुस्तक का प्रकाशन होगा। पहली प्राथमिकता अंग्रेजी भाषा में होने वाले प्रकाशन को दी जाए। उन्होंने कहा कि 10-12 दिसंबर, 2020 में आयोजित ‘पूर्वांचल का सतत विकास: मुद्दे, रणनीति और भावी दिशा’ विषयक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार की चर्चा हर जगह हो रही है।
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स्कॉलर्स से भी सरकार ने मांगे हैं सुझाव

डॉ. केवी राजू ने कहा कि पूर्वांचल के विकास के लिए सरकार ने स्कॉलर्स से भी सुझाव मांगे हैं। पुस्तक के प्रकाशन के लिए ऑथर गाइडलाइंस का पालन किया जाए। रिफरेंस, कांसेप्ट नोट, सब हैडिंग, सोर्स के साथ कनेक्टिविटी, कॉन्टिनुइटी और रेपीटेशन न होने पर फोकस किया जाए। प्रकाशन का केंद्र पूर्वांचल पर आधारित होना चाहिए। रिसर्च पेपर को तैयार करने के लिए एक्शन प्लान बेहद अहम है। उन्होंने कहा कि कुछ पेपर्स पर काम करने की जरूरत है। ऐसे में जो सुझाव दिए गए हैं, उन्हें सुधार के साथ पांच जुलाई तक जमा करा दें ताकि 5-15 जुलाई के बीच इनकी समीक्षा और 15-30 जुलाई तक ट्रांसलेशन और कॉपी एडिटिंग पर काम किया जा सके। अगस्त के पहले सप्ताह में इसे पब्लिशर के पास भेजा जाएगा। किताबों का डिजिटल पब्लिकेशन भी कराया जाएगा।

बैठक में डीन आर्ट्स प्रो. नंदिता सिंह, प्रो. एनपी भोक्ता, प्रो. शांतनु रस्तोगी, प्रो. चंद्रशेखर, प्रो. एके तिवारी, प्रो. चंद्रशेखर, डीएसडब्लू प्रो. अजय सिंह सहित विभागाध्यक्ष एवं शिक्षक मौजूद रहे।
 
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