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UP News: गोरखपुर में 80 लाख के गबन में पूर्व बीडीओ समेत चार पर एफआईआर दर्ज, बिना काम कराए ही कर दिया था भुगतान

Fri, 27 May 2022 12:34 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 27 May 2022 12:34 PM IST
सार

सहजनवां के बीडीओ, जेई व जनप्रतिनिधियों ने बिना कार्य कराए करोड़ों का भुगतान फर्जी ढंग से किया है। सीडीओ ने इस पर जिला समाज कल्याण अधिकारी व सहायक अभियंता ग्राम्य विकास अभिकरण (डीआरडीए) की कमेटी गठित कर मामले की जांच कराई । कमेटी ने 11 और 12 मई को संबंधित 15 कार्यों का स्थलीय सत्यापन कर 13 मई को सीडीओ को रिपोर्ट सौंपी, जिसमें शिकायत सही पाई गई।

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FIR lodged against four including former BDO for embezzlement of 80 lakhs in Gorakhp
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

बिना काम कराए ही भुगतान कर देने के मामले में सहजनवां के पूर्व खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) दुर्योधन, आरईएस के जेई सुबोध कुमार तिवारी, लघु सिंचाई के जेई अजय कुमार और लेखाकार राघवेंद्र पाठक के खिलाफ बृहस्पतिवार को एफआईआर दर्ज हो गई है। यह मुकदमा डीएम विजय किरण आनंद की सख्ती से हुआ है।

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एडीओ पंचायत सहजनवां रामगोपाल तिवारी की तहरीर पर सहजनवां थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है। दरअसल, सीडीओ इंद्रजीत सिंह ने एक अप्रैल 2022 को सहजनवां ब्लॉक के सभाकक्ष में पिपरौली, सहजनवां और पाली ब्लॉक में कराए गए विकास कार्यों की समीक्षा की थी। इसी दौरान वार्ड संख्या 40 के क्षेत्र पंचायत प्रतिनिधि मनोज कुमार दूबे और वार्ड नंबर तीन के क्षेत्र पंचायत प्रतिनिधि धनंजय सिंह ने सीडीओ से मिलकर शिकायत की थी।
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आरोप था कि सहजनवां के बीडीओ, जेई व जनप्रतिनिधियों ने बिना कार्य कराए करोड़ों का भुगतान फर्जी ढंग से किया है। सीडीओ ने इस पर जिला समाज कल्याण अधिकारी व सहायक अभियंता ग्राम्य विकास अभिकरण (डीआरडीए) की कमेटी गठित कर मामले की जांच कराई । कमेटी ने 11 और 12 मई को संबंधित 15 कार्यों का स्थलीय सत्यापन कर 13 मई को सीडीओ को रिपोर्ट सौंपी, जिसमें शिकायत सही पाई गई।
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जांच रिपोर्ट के मुताबिक, स्थलीय सत्यापन से पता चला कि 15 में से 10 कार्य तो कराए ही नहीं गए। बाकी बचे पांच कार्य के बारे में भी रोजगार सेवक और प्रधान ने बताया कि सत्यापन के दो दिन पहले ही उन्हें कराया गया था। वह भी मानक के अनुरूप नहीं है। अभिलेखों की जांच में पता लगा कि सभी कार्यों का भुगतान नवंबर 2021 में ही कर दिया गया था।

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