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महराजगंज जिला पंचायत अध्यक्ष के वित्तीय-प्रशासनिक अधिकार सीज, अपर मुख्य सचिव ने जारी किया पत्र
Wed, 25 Nov 2020 12:16 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, महराजगंज
अमर उजाला नेटवर्क, महराजगंज
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 25 Nov 2020 12:16 AM IST
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जिला पंचायत अध्यक्ष प्रभु दयाल
- फोटो : सोशल मीडिया
चंद रोज पहले भाजपा छोड़कर सपा में शामिल हुए महराजगंज जिला पंचायत अध्यक्ष प्रभु दयाल के प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकार सीज कर दिए हैं। यह जानकारी अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह की ओर से जारी पत्र में दी गई है।
जिला पंचायत अध्यक्ष पर अपने करीबियों को लाभ पहुंचाने का आरोप है। इसकी जांच के लिए गोरखपुर के कमिश्नर को जांच अधिकारी बनाया गया है।
पंचायत राज अनुभाग दो अपर मुख्य सचिव की ओर से जारी पत्र के मुताबिक जिला पंचायत अध्यक्ष ने अपने रिश्तेदार को लाभ पहुंचाने के लिए उनका वाहन जिला पंचायत में किराए पर लगवाया।
बाद में उसी वाहन को अपने खास व्यक्ति के नाम से ट्रांसफर करा लिया। जिला पंचायत के 117 कार्यों की कार्ययोजना अध्यक्ष ने 16 नवंबर 2017 को निरस्त कर दी थी, लेकिन 12 दिसंबर 2017 को फिर बहाल कर दिया।
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उनपर यह भी आरोप है कि उन्होंने अपने रिश्तेदार को ठेकेदारी में जिला पंचायत में पंजीकरण कराने के बाद काम दिलाया। जिला पंचायत से संबद्ध गाड़ी को निजी कार्यों के लिए इस्तेमाल किया। पत्र में इसका भी जिक्र है कि उनके पद पर रहते हुए निष्पक्ष जांच नहीं हो सकती। ऐसे में आरोप मुक्त होने तक उनके वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार पर रोक लगाई जाती है।
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जिला पंचायत अध्यक्ष पर अपने करीबियों को लाभ पहुंचाने का आरोप है। इसकी जांच के लिए गोरखपुर के कमिश्नर को जांच अधिकारी बनाया गया है।
पंचायत राज अनुभाग दो अपर मुख्य सचिव की ओर से जारी पत्र के मुताबिक जिला पंचायत अध्यक्ष ने अपने रिश्तेदार को लाभ पहुंचाने के लिए उनका वाहन जिला पंचायत में किराए पर लगवाया।
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बाद में उसी वाहन को अपने खास व्यक्ति के नाम से ट्रांसफर करा लिया। जिला पंचायत के 117 कार्यों की कार्ययोजना अध्यक्ष ने 16 नवंबर 2017 को निरस्त कर दी थी, लेकिन 12 दिसंबर 2017 को फिर बहाल कर दिया।
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उनपर यह भी आरोप है कि उन्होंने अपने रिश्तेदार को ठेकेदारी में जिला पंचायत में पंजीकरण कराने के बाद काम दिलाया। जिला पंचायत से संबद्ध गाड़ी को निजी कार्यों के लिए इस्तेमाल किया। पत्र में इसका भी जिक्र है कि उनके पद पर रहते हुए निष्पक्ष जांच नहीं हो सकती। ऐसे में आरोप मुक्त होने तक उनके वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार पर रोक लगाई जाती है।