गोरखपुर: महिला अस्पताल की डॉक्टर से वसूली का केस दर्ज, युवक ने वायरल किया था वीडियो
30 सितंबर को दोपहर तक 30 अल्ट्रासाउंड करने के बाद अपने चैंबर में रिपोर्ट बना रही थीं। इसी दौरान स्टॉफ ने बताया कि बाहर कोई युवक चिल्ला रहा है। वह सरकारी काम में बाधा डाल रहा है। इसके बावजूद अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए काम जारी रखा।
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गोरखपुर जिला महिला अस्पताल की रेडियोलॉजिस्ट डॉ. कविता रानी वर्मा ने शशांक नामक युवक के खिलाफ जबरन वसूली करने, सरकारी काम में बाधा डालने का केस दर्ज कराया है। आरोप है कि शशांक ने रुपये की मांग की और न देने पर मनगढ़ंत वीडियो वायरल कर उनकी छवि को धूमिल किया। डीएम के आदेश पर कोतवाली पुलिस ने केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
दरअसल, युवक एक वेब पोर्टल से जुड़ा है और उसने डॉक्टर पर काम न करने का आरोप लगाते हुए वीडियो वायरल किया था। एडिशनल सीएमओ डॉ. नंद कुमार की पत्नी डॉ. कविता ने पुलिस को दी तहरीर में लिखा है कि वह महिला अस्पताल के मातृ शिशु स्वास्थ्य विंग में रेडियोलॉजिस्ट के पद पर संविदा पर कार्यरत हैं। पूरी जिम्मेदारी से ड्यूटी करती हैं।
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30 सितंबर को दोपहर तक 30 अल्ट्रासाउंड करने के बाद अपने चैंबर में रिपोर्ट बना रही थीं। इसी दौरान स्टॉफ ने बताया कि बाहर कोई युवक चिल्ला रहा है। वह सरकारी काम में बाधा डाल रहा है। इसके बावजूद अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए काम जारी रखा।
बाद में सोशल मीडिया पर एक सूचना प्रसारित की गई और इसमें बताया गया कि चैंबर के भीतर एसीएमओ की पत्नी होने के नाते आराम फरमा रही हैं, जबकि उक्त कार्यदिवस में 30 अल्ट्रासाउंड किया था। आरोप है कि शशांक नामक युवक पहले भी अस्पताल में आ चुका है। इस दौरान रुपये की मांग की भी थी। रुपये नहीं देने पर ही उसने ऐसा कृत्य किया है। दूसरी तरफ, युवक ने आरोपों को बेबुनियाद बताया और कहा कि उसे जानबूझकर फंसाया जा रहा है।
तीमारदारों पर डॉक्टरों से बदसलूकी का आरोप
जिला महिला अस्पताल में शनिवार की देर रात गर्भवती को लेकर पहुंचे तीमारदारों पर स्वास्थ्यकर्मियों और डॉक्टरों के साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप लगा है। पुलिस के पहुंचने से पहले तीमारदार मौके से भाग खड़े हुए।
बताया जा रहा है कि अस्पताल में न तो कोई गार्ड था न ही कोई जिम्मेदार। इस पर स्वास्थ्यकर्मियों ने नाराजगी जताई है।
जानकारी के मुताबिक, गोपलापुर की एक गर्भवती के साथ कुछ लोग जिला महिला अस्पताल आए थे। गर्भवती का यह दूसरा सिजेरियन है। बताया जा रहा है कि एनेस्थेटिस्ट न होने से डॉक्टरों ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। इस पर गर्भवती के साथ आए लोग नाराज हो गए। खुद को बांसगांव का बताते हुए बदतमीजी करने लगे। डॉक्टरों के साथ भी बदसलूकी करते हुए उलटा सीधा कहा। इस पर डॉक्टर ने एक सहायक को तत्काल घोष कंपनी चौराहे पर जाकर पुलिस बुलाने को कहा। पुलिस का नाम सुनते ही तीमारदार मौके से भाग खड़े हुए।
अस्पताल में सुरक्षा के इंतजाम नहीं
महिला अस्पताल में सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। रात को सिस्टर और डॉक्टर के भरोसे पूरे महिला अस्पताल है। न तो कोई गार्ड है और न ही जिम्मेदार। शनिवार की रात हुई घटना के बाद सिस्टर और डॉक्टर दशहत में हैं। कर्मियों का कहना है कि महिला अस्पताल का कोई भी जिम्मेदार रात में नहीं रुकता। ऐसे में कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
रात को तीन गार्डों की ड्यूटी लगाई गई है। यदि वे ड्यूटी नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। एनेस्थेटिस्ट को आन कॉल बुलाने की व्यवस्था है। मामले की जांच कराई जाएगी। पुलिस की मदद से आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. एनके श्रीवास्तव, एसआईसी, महिला अस्पताल