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250 क्रांतिकारियों की मौत का गवाह है यह 'पीपल', इस वजह से जगह का नाम पड़ा था 'छावनी'
Mon, 14 Dec 2020 03:04 PM IST
vivek shukla
राजेश सिंह, विक्रमजोत (बस्ती)।
राजेश सिंह, विक्रमजोत (बस्ती)।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 14 Dec 2020 03:04 PM IST
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पीपल का पेड़।
- फोटो : अमर उजाला।
बस्ती जिले के छावनी में स्थित पीपल वृक्ष 250 क्रांतिकारियों के सजा-ए-मौत का गवाह है। क्योंकि इन क्रांतिकारियों को यहां 1857 में जलियांवाला बाग कांड के विद्रोह के दौरान ब्रितानिया (ब्रिटिश) हुकूमत ने भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों को एक साथ फांसी पर लटका दिया था।
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छावनी के इस शहीद मंदिर का इतिहास है कि यहां क्रांतिकारी अपना आश्रय बनाए हुए थे। अंग्रेजों ने जनरल कीले की हत्या के बाद राजद्रोह में इन क्रांतिवीरों को यहां फांसी के फंदे पर लटका कर शहीद कर दिया था।
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पूरे इलाके को अंग्रेजी हुकूमत ने सैनिक छावनी में तब्दील कर फांसी दी थी। उसी समय से इस क्षेत्र का नाम छावनी पड़ गया। हाईवे किनारे आज भी वह पीपल का पेड़ अपने गौरवमई इतिहास के साथ हरा भरा खड़ा है।
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स्वतंत्रता सेनानियों की याद में विधायक व सासंद निधि से प्रशासन ने यहां शहीद स्मारक का निर्माण कराया है, जिसे देखने के लिए दूरदराज से लोग आकर श्रद्धा सुमन अर्पित कर शीश नवाते हैं।