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Gorakhpur News: प्रतिस्पर्धा ने डाल दी परिवार में दरार, 40 हजार रुपये के लिए बेटे ने पिता को उतारा मौत के घाट

Tue, 14 Mar 2023 09:52 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 14 Mar 2023 09:52 AM IST
सार

मृतक मधुर के पड़ोसी रहे साकेत ने बताया कि उनके पट्टीदारों से रिश्ते अच्छे नहीं थे। आपसी मनमुटाव के कारण कई वर्ष पहले की सभी भाइयों के रास्ते अलग हो गए थे। सभी अलग-अलग रहने लगे और अपना व्यापार भी अलग कर लिया था। आर्थिक प्रतिस्पर्धा ने परिवार के लोगों में दरार डाल दी थी।

 

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Father murder case by son Ghopan Bania shop remained open
जाफरा बाजार स्थित घोपन बनिया की दुकान खुली हुई है। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर में सोमवार को जाफरा बाजार चौराहे पर घोपन बनिया की पुरानी दुकान खुली थी। यह देखकर सहज ही समझा जा सकता है कि परिवार में आपसी रिश्ते कैसे हैं। मधुर की मौत पर उनके भाइयों में न कोई गम था, न किसी के चेहरे पर शिकन दिखी। पूछने पर एक ही जवाब मिला, सब लोग अलग हैं, परिवार का नाम बदनाम मत करिए।

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मधुर के पड़ोसी रहे साकेत ने बताया कि उनके पट्टीदारों से रिश्ते अच्छे नहीं थे। आपसी मनमुटाव के कारण कई वर्ष पहले की सभी भाइयों के रास्ते अलग हो गए थे। सभी अलग-अलग रहने लगे और अपना व्यापार भी अलग कर लिया था। आर्थिक प्रतिस्पर्धा ने परिवार के लोगों में दरार डाल दी थी।
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जानकारी के मुताबिक, शहर के बड़े व्यापारी घोपन बनिया बच्चों के परिवारों में बिखराव के दूरगामी परिणाम के रूप में ही शनिवार की रात मधुर मुरली की हत्या उनके ही बेटे ने कर दी। परिवार से करीबी रिश्ते रखने वाले पूर्व पार्षद अरविंद चौरसिया ने बताया कि घोपन बनिया की दो संतानें वंशी और दयाराम थीं। फिर वंशी के दो बच्चे मधुर मुरली और विजय हुए। दोनों ने अलग-अलग व्यापार कर लिया।
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परिवार में एकता होती 40 हजार रुपये के लिए नहीं बनता कातिल

उधर, दयाराम का बेटा रवि आज भी जाफरा बाजार की पुरानी दुकान ही चलाता है। 1985 में मधुर मुरली ने परिवार से अलग होकर तिवारीपुर के सूर्य विहार में सीमेंट का कारोबार शुरू कर दिया। तब उनका व्यापार खूब चला और वह परिवार से कटते चले गए। बाद में भाइयों में बंटवारा हो गया। मधुर के भाई विजय ने अलग दुकान कर ली और उनके हिस्से में आए मकान में छह दुकानें निकल गईं। इसके बाद वह काफी संपन्न हो गए।

वहीं, समय बीतने के साथ धीरे-धीरे मधुर मुरली आर्थिक रूप से टूटते चले गए। सीमेंट के व्यापार में घाटा हुआ। इसके बाद उन्होंने हार्डवेयर की दुकान की। उसके भी बंद हो जाने पर उन्होंने एक साल पहले जनरल स्टोर शुरू किया था। बड़े बेटे प्रिंस को भी व्यापार कराने की कोशिश की, लेकिन उसके हाथ सिर्फ घाटा ही लगा। वह कर्ज में डूबता चला गया और हश्र पिता की हत्या के रूप में सामने आया।

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आज भी घोपन बनिया के परिवार के अन्य सदस्यों की आर्थिक स्थिति इतनी संपन्न है कि वह लाखों की मदद कर सकते हैं। लेकिन, मधुर मुरली के परिवार के संबंध किसी से भी संबंध मिठास भरा न होने की वजह से ही उनके बेटे की किसी ने 40 हजार रुपये तक की मदद नहीं की। मधुर रखे रुपयों को व्यापार में लगा चुके थे। पत्नी का इलाज फिर खुद के कैंसर के इलाज ने उन्हें तोड़ दिया। आर्थिक कमजोरी का ही आलम था कि व्यापार में घाटे के बाद बेटा प्रिंस ऑनलाइन फूड डिलिवरी का काम करने लगा। वहीं छोटा बेटा प्रशांत एक दुकान पर कर्मचारी के रूप में काम करने लगा।
 

भइया के व्यवहार से कभी नहीं लगा कि ऐसा करेंगे

घटना के दूसरे दिन भी छोटे भाई प्रशांत के बोल वही थे। सोमवार को उसने यही कहा कि बड़े भाई प्रिंस के व्यवहार से कभी भी ऐसा नहीं लगा कि वह ऐसा कुछ कर सकता है। इधर, कुछ दिनों से परेशान होने की वजह से घर में पिता से बहस जरूर हो जाती थी। बुआ ने कहा कि प्रिंस का व्यवहार काफी अच्छा रहा है। विश्वास ही नहीं हो रहा है कि वह ऐसा भी कर सकता है।

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पारिवारिक विघटन का परिणाम हैं ऐसी घटनाएं

गोविवि समाजशास्त्री डॉ. मनीष पांडेय ने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं पारिवारिक विघटन का परिणाम हैं। ऐसी स्थिति में सामाजिक नियंत्रण की संस्थाएं अप्रभावी हो जाती है, जिससे संवेदनहीनता बढ़ती है। पारिवारिक संबंध अस्थिर व विकृति हो जाते हैं। परिवार एक नियामक संस्था है, जिसका अपने सदस्यों पर नियंत्रण रहा है। लेकिन, वर्तमान संक्रमण के दौर में सामाजिक संस्थाएं अप्रभावी होती जा रही हैं। आर्थिक प्रक्रियाओं और असुरक्षा के कारण परिवार जैसी नैसर्गिक संस्थाओं में व्यापक परिवर्तन आया है। उपभोक्तावादी संस्कृति, पारंपरिक नैतिक मूल्यों के क्षरण तथा बढ़ती हुई व्यक्तिवादिता ने भावानात्मक बंधनों को कमजोर किया है।

 

विकृति का रूप ले चुकी थी सामाजिक असुरक्षा की भावना

मनौवैज्ञानिक सीमा श्रीवास्तव ने कहा कि सामाजिक असुरक्षा की भावना जब इंसान के अंदर घर कर लेती है तो अक्सर व्यक्ति अपनी समस्या लोगों से कहना बंद कर देता है। ऐसे में यह भावना एक विकृति का रूप ले लेती है। कभी भी कोई समस्या जीवन में आती है तो घर के बड़ों या मित्रों से बात कर उनकी राय लेनी चाहिए। लेकिन, इस घटना में साफ दिख रहा है कि परिवार के लोगों में ज्यादा बातचीत ही नहीं होती थी। न ही कोई परिवार का करीबी है, जो समस्या सुनकर समाधान की कोशिश करता। इसी का परिणाम यह घटना है।

 

पहले भी हुई हैं घटनाएं

18 मार्च 2020: पिपराइच इलाके में बेटे ने शराब के लिए पिता से रुपये की मांग की थी। रुपये नहीं देने पर बेटे जितेंद्र ने पिता प्रमोद की पीटकर हत्या कर दी थी। मां कलावती व बहन रागिनी सिंह बचाने के लिए दौड़ीं तो जितेंद्र ने उन पर भी हमला कर दिया। मां डर वश पास के गन्ने के खेत में जाकर छिप गई थी। वहीं पिटाई से रागिनी घायल हो गई थी। पुलिस ने केस दर्ज कर बेटे को जेल भेजा था।

18 मार्च 2022 : गुलरिहा इलाके के जंगल एकला नंबर दो हतवा टोला में बेटे ने ईंट से सिर कूंच कर पिता विद्या पासवान की हत्या कर दी थी। वह मजदूरी करके अपने परिवार का जीवन यापन करते थे। इनका बेटा राहुल (24) नशे का आदी था। पुलिस ने केस दर्ज कर बेटे को जेल भेजा था।

21 जुलाई 2022 : पिपराइच इलाके के बेलवार में प्रापर्टी डीलर चौथी गुप्ता ने पत्नी मंजू और बेटे महावीर को कार से रौंद दिया था। महावीर की मौके पर ही मौत हो गई थी, लेकिन पत्नी घायल हुई थी। इस मामले में पुलिस ने बेटी कंचन की तहरीर पर केस दर्ज कर पिता को जेल भेजा था।

 

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