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कोरोना का कहर: पूर्वांचल के प्रसिद्ध वैद्य आत्माराम दुबे का कोरोना संक्रमण से निधन, मेदांता अस्पताल ली अंतिम सांस
Thu, 20 May 2021 02:31 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 20 May 2021 02:31 PM IST
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वैद्य आत्माराम दुबे की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला।
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देश विदेश में पूर्वांचल की पहचान बना चुके वैद्य आत्माराम दुबे का गुरुवार सुबह 6:30 बजे दिल्ली के मेदांता अस्पताल में कोरोना संक्रमण से निधन हो गया। 83 वर्ष की उम्र में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।
गोलोक वासी वैद्य आत्माराम दुबे का जन्म गोरखपुर जिले के चौरी चौरा के पास स्थित ब्रह्मपुर गांव में वैद्य गया प्रसाद दुबे के घर हुआ था, जिनकी वेद्यकी के चर्चे पूरे प्रदेश में थे।
ओजस्वी व्यक्तित्व और गंभीर वाणी के साथ बहुमुखी प्रतिभा के धनी, आयुर्वेद के साथ-साथ वेद, दर्शन, तंत्र, संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू साहित्य के ज्ञान और ज्योतिष तथा अध्यात्म की आभा से प्रकाशमान होकर वैद्य आत्माराम दुबे मानवीय संवेदनाओं के साथ चिकित्सकीय दायित्व का आजीवन निर्वहन किया।
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गर्मियों में धोती कुर्ता और कंधे पर एक गमछा और जाड़े में अचकन और चूड़ीदार पजामा और सर पर टोपी धारण करने वाले छह फीट से भी अधिक निकलते शरीर के स्वामी वैद्य आत्माराम के गोलोक वासी होने से पूरे पूर्वांचल को एक अपूरणीय क्षति हुई है।
देश विदेश में विभिन्न मंचों पर सम्मानित होकर क्षेत्र का नाम रोशन करने वाले वैद्य आत्माराम को कोरोना की शिकायत होने पर फातिमा, पेनेशिया, एयरफोर्स आदि अस्पतालों में इलाज से जब लाभ नहीं हुआ तो वायु मार्ग से उन्हें दिल्ली के मेदांता अस्पताल में वेंटिलेटर पर भर्ती किया गया। परंतु उनकी सांसों ने गुरुवार सुबह 6:30 बजे शरीर का साथ छोड़ दिया। उनका अंतिम संस्कार वाराणसी में किया जाएगा।
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गोलोक वासी वैद्य आत्माराम दुबे का जन्म गोरखपुर जिले के चौरी चौरा के पास स्थित ब्रह्मपुर गांव में वैद्य गया प्रसाद दुबे के घर हुआ था, जिनकी वेद्यकी के चर्चे पूरे प्रदेश में थे।
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ओजस्वी व्यक्तित्व और गंभीर वाणी के साथ बहुमुखी प्रतिभा के धनी, आयुर्वेद के साथ-साथ वेद, दर्शन, तंत्र, संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू साहित्य के ज्ञान और ज्योतिष तथा अध्यात्म की आभा से प्रकाशमान होकर वैद्य आत्माराम दुबे मानवीय संवेदनाओं के साथ चिकित्सकीय दायित्व का आजीवन निर्वहन किया।
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गर्मियों में धोती कुर्ता और कंधे पर एक गमछा और जाड़े में अचकन और चूड़ीदार पजामा और सर पर टोपी धारण करने वाले छह फीट से भी अधिक निकलते शरीर के स्वामी वैद्य आत्माराम के गोलोक वासी होने से पूरे पूर्वांचल को एक अपूरणीय क्षति हुई है।
देश विदेश में विभिन्न मंचों पर सम्मानित होकर क्षेत्र का नाम रोशन करने वाले वैद्य आत्माराम को कोरोना की शिकायत होने पर फातिमा, पेनेशिया, एयरफोर्स आदि अस्पतालों में इलाज से जब लाभ नहीं हुआ तो वायु मार्ग से उन्हें दिल्ली के मेदांता अस्पताल में वेंटिलेटर पर भर्ती किया गया। परंतु उनकी सांसों ने गुरुवार सुबह 6:30 बजे शरीर का साथ छोड़ दिया। उनका अंतिम संस्कार वाराणसी में किया जाएगा।