राज्य बाल अधिकार संरक्षण के अध्यक्ष ने दिया सुझाव, बाल श्रम रोकने के लिए परिवार को रोजगार से जोड़ा जाए
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उत्तर प्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डॉ. विशेष गुप्ता ने कहा कि बालश्रमिकों के परिवार के सदस्यों को प्रदेश सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़कर बालश्रम की कुप्रथा को समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने बाल श्रम व भिक्षावृत्ति रोकने के लिए सभी संबंधित विभागों को समन्वित प्रयास करने को कहा।
डॉ. विशेष गुप्ता शुक्रवार को एनेक्सी भवन में बाल संरक्षण समिति की बैठक कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बालश्रम में लिप्त सभी बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए विद्यालयों में नामांकन कराया जाए। भिक्षावृत्ति करने वाले बच्चों को इससे मुक्त कराकर उनके परिवार में पुर्नस्थापित किया जाए। उनको शिक्षा एवं विभागीय योजनाओं से जोड़े जाने के लिए भी कार्रवाई की जाए।
जिला प्रोबेशन अधिकारी ने आयोग के अध्यक्ष को बताया कि जिले में नो चाइल्ड लेबर अभियान एक सितंबर से 30 सितंबर 2020 तक संचालित किया गया था। इसमें 62 बच्चों को बालश्रम से मुक्त कराकर उनके परिवारों में पुर्नस्थापित किया गया।
इसके अलावा कुल 30 बाल श्रमिक बच्चों को महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना एवं स्पांसरशिप योजना से जोड़ने के लिए कार्रवाई की जा रही है। बताया गया कि 30 मार्च 2021 तक नो चाइल्ड लेबर अभियान चलाने के लिए डीएम के स्तर से रेसक्यू टीम का गठन कर लिया गया है। बैठक में आयोग की सदस्य डॉ जया सिंह, एडीएम सिटी आरके श्रीवास्तव, एसपी क्राइम एवं विभिन्न विभागों के संबंधित अधिकारी तथा शैक्षिक संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
20 दिन में 12 बच्चों को बाल भिक्षावृत्ति से बचाया गया
बैठक में अफसरों ने बाल आयोग के अध्यक्ष को बाल भिक्षावृत्ति के संबंध में किए गए कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि इसकी रोकथाम के लिए जिले स्तर पर 26 दिसंबर 20 से 10 जनवरी 2021 तक अभियान चलाया गया। इसमें संलिप्त कुल 10 लड़कों एवं 2 लड़कियों को भिक्षावृत्ति से मुक्त कराकर उनके परिवार में पुर्नस्थापित किया गया है।
कारगर साबित होगा स्पांसरशिप कार्यक्रम: डॉ विशेष
स्पांसरशिप कार्यक्रम के संबंध में अध्यक्ष ने बताया कि इसके द्वारा बच्चों को चिकित्सकीय, भरण -पोषण एवं शैक्षिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए परिवारों को अनुपूरक सहायता के रूप में धनराशि प्रदान की जा रही है। बच्चे को किसी कारणों से स्कूल से विरत न किया जा सके। इसके लिए 2000 प्रतिमाह अनुदान दिए जाने का प्राविधान है। जिला प्रोबेशन अधिकारी ने बताया कि इस योजना के तहत कुल 26 बच्चों को लाभ दिया जा रहा है। 20 और बच्चों को चिन्हित किया गया है एवं शासन को 14 अन्य नए बच्चों के लिए मांग भेजी गई है।