{"_id":"6694d5aa86ec0278d00ea236","slug":"family-filed-a-case-after-murder-of-property-dealer-azim-in-gorakhpur-2024-07-15","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"अजीम हत्याकांड: साहब ने दी शह तो पहले कबाड़ी... फिर बन गया होटल मालिक; अफसर ने की नौशाद की खूब मदद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अजीम हत्याकांड: साहब ने दी शह तो पहले कबाड़ी... फिर बन गया होटल मालिक; अफसर ने की नौशाद की खूब मदद
Mon, 15 Jul 2024 02:33 PM IST
शाहरुख खान
रोहित सिंह, अमर उजाला, गोरखपुर
रोहित सिंह, अमर उजाला, गोरखपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 15 Jul 2024 02:33 PM IST
सार
गोरखपुर के अजीम हत्याकांड में परिजनों ने होटल संचालक नौशाद आलम पर भी केस दर्ज कराया है। राजघाट थाने में नौशाद के खिलाफ कई केस दर्ज हैं। हालांकि, इसमें अधिकतर केस 2012 से लेकर 2017 के बीच दर्ज हुए।
विज्ञापन
Property Dealer Azim Case
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
गोरखपुर के तुर्कमानपुर में प्रॉपर्टी डीलर अजीम की हत्या के बाद उनके परिजनों ने राजघाट थाने में केस दर्ज कराया है। इसमें नौशाद आलम को भी आरोपी बनाया है। ये नाम नौशाद का सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार है, लेकिन वह कबाड़ के व्यवसाय से होटल मालिक बनने तक के सफर में गुड्डू प्लाजा के तौर पर जाना जाता है।
उसे जानने वाले बताते हैं कि एक अफसर की शह पर पहले उसने कबाड़ के धंधे में सिक्का जमाया फिर होटल मालिक तक बन गया। जानने वालों का दावा है कि अफसर ने नौशाद की खूब मदद की। मदद के बदले वह अपने होटल में उस अफसर और उनके जानने वालों की आवभगत करता था।
वारदात के शिकार अजीम के एक करीबी सूत्र की मानें तो सरकारी सिस्टम की दखल से नौशाद पर कभी पुलिसिया कार्रवाई नहीं हो सकी। हिस्ट्रीशीटर से लेकर गैंगस्टर तक की कार्रवाई नौशाद के ऊपर हो चुकी है, लेकिन पुलिस उसे इन मामलों में जेल नहीं भिजवा सकी। इसके पीछे भी पूरी सेटिंग इसी अधिकारी की रही है।
विज्ञापन
सूत्रों ने बताया कि नौशाद के परिवार के लोग पहले कबाड़ का छोटा-मोटा काम करते थे। इसी दौरान नौशाद का संपर्क घासीकटरा के एक शख्स से हो गया। 1990 में नौशाद नेपाल से गर्म मसाला, ड्राई फ्रूट और अन्य सामान भी बिना फर्म के नेपाल से गोरखपुर में लाने का एक माध्यम बना था। इस दौरान उसके पास ठीक-ठाक मुनाफा होने लगा। इस समय हिंदी बाजार के कुछ धंधेबाजों के संपर्क में आने पर वह अवैध सोने के धंधेबाजों से भी जुड़ा।
विज्ञापन
उसे जानने वाले बताते हैं कि एक अफसर की शह पर पहले उसने कबाड़ के धंधे में सिक्का जमाया फिर होटल मालिक तक बन गया। जानने वालों का दावा है कि अफसर ने नौशाद की खूब मदद की। मदद के बदले वह अपने होटल में उस अफसर और उनके जानने वालों की आवभगत करता था।
विज्ञापन
वारदात के शिकार अजीम के एक करीबी सूत्र की मानें तो सरकारी सिस्टम की दखल से नौशाद पर कभी पुलिसिया कार्रवाई नहीं हो सकी। हिस्ट्रीशीटर से लेकर गैंगस्टर तक की कार्रवाई नौशाद के ऊपर हो चुकी है, लेकिन पुलिस उसे इन मामलों में जेल नहीं भिजवा सकी। इसके पीछे भी पूरी सेटिंग इसी अधिकारी की रही है।
विज्ञापन
सूत्रों ने बताया कि नौशाद के परिवार के लोग पहले कबाड़ का छोटा-मोटा काम करते थे। इसी दौरान नौशाद का संपर्क घासीकटरा के एक शख्स से हो गया। 1990 में नौशाद नेपाल से गर्म मसाला, ड्राई फ्रूट और अन्य सामान भी बिना फर्म के नेपाल से गोरखपुर में लाने का एक माध्यम बना था। इस दौरान उसके पास ठीक-ठाक मुनाफा होने लगा। इस समय हिंदी बाजार के कुछ धंधेबाजों के संपर्क में आने पर वह अवैध सोने के धंधेबाजों से भी जुड़ा।
यही समय था कि जब नौशाद अफसर के संपर्क में आया। साहब की सलाह पर उसने गोलघर में होटल सन प्लाजा खोल दिया। इसी होटल में वह अफसर अपने वरिष्ठों के रुकने-टिकने का इंतजाम करता था। दावा है कि अपने विभागीय पकड़ की बदौलत अफसर ने बिजली निगम के अधिकारियों से संपर्क कराया और वह ठेकेदारी में उतर गया।
इसी बीच 2007 में बसपा सरकार आ गई। ऑनलाइन टेंडर की शुरुआत हुई तो नौशाद ने ठेकेदारी के काम से किनारा कर लिया। इस दौरान बसपा सरकार में प्रभावी रहे माफिया विनोद से भी उसके करीबी संबंध हो गए फिर वह रियल एस्टेट के धंधे में उतर गया।
राजघाट का 19 ए हिस्ट्रीशीटर है नौशाद
राजघाट थाने में नौशाद के खिलाफ कई केस दर्ज हैं। हालांकि, इसमें अधिकतर केस 2012 से लेकर 2017 के बीच दर्ज हुए। इस दौरान की सरकार में प्रभावी उसके एक सहयोगी ने बहुत से केस दर्ज करवाए थे।
राजघाट थाने में नौशाद के खिलाफ कई केस दर्ज हैं। हालांकि, इसमें अधिकतर केस 2012 से लेकर 2017 के बीच दर्ज हुए। इस दौरान की सरकार में प्रभावी उसके एक सहयोगी ने बहुत से केस दर्ज करवाए थे।
थानाध्यक्ष ने न्यायालय में लिखकर दिया था
नौशाद आलम की सेटिंग और प्रभाव को खाकी भी समझती थी। राजघाट थाने में तत्कालीन प्रभारी ने जिला मजिस्ट्रेट को बाकायदा लिखकर सूचना भेजी थी। पत्र लिखकर बताया था कि नौशाद आलम गुंडा है। इसके भय और आतंक से कोई भी व्यक्ति केस दर्ज कराने एवं गवाही देने का साहस नहीं कर पाता। इसका स्वतंत्र रहना जनहित में नहीं है। इसके बाद भी नौशाद को पुलिस जेल नहीं भिजवा सकी।
नौशाद आलम की सेटिंग और प्रभाव को खाकी भी समझती थी। राजघाट थाने में तत्कालीन प्रभारी ने जिला मजिस्ट्रेट को बाकायदा लिखकर सूचना भेजी थी। पत्र लिखकर बताया था कि नौशाद आलम गुंडा है। इसके भय और आतंक से कोई भी व्यक्ति केस दर्ज कराने एवं गवाही देने का साहस नहीं कर पाता। इसका स्वतंत्र रहना जनहित में नहीं है। इसके बाद भी नौशाद को पुलिस जेल नहीं भिजवा सकी।
कॉल डिटेल और सर्विलांस से खुल जाएंगी परतें
अजीम को जानने वाले करीबी सूत्र का दावा है कि पुलिस अगर नौशाद की कॉल रिकॉर्ड की जांच कर लेगी तो अधिकारी के साथ अन्य कई नाम सामने आ जाएंगे। इस वारदात में एक प्रभावशाली नेता, मछली कारोबारी, हिंदी बाजार के धंधेबाजों के नाम भी सामने आए हैं। सूत्रों ने बताया कि गुड्डू कबाड़ी ने पुलिसिया पूछताछ में शुरू से लेकर अंत तक की सारी कहानी पुलिस को बता दी है।
अजीम को जानने वाले करीबी सूत्र का दावा है कि पुलिस अगर नौशाद की कॉल रिकॉर्ड की जांच कर लेगी तो अधिकारी के साथ अन्य कई नाम सामने आ जाएंगे। इस वारदात में एक प्रभावशाली नेता, मछली कारोबारी, हिंदी बाजार के धंधेबाजों के नाम भी सामने आए हैं। सूत्रों ने बताया कि गुड्डू कबाड़ी ने पुलिसिया पूछताछ में शुरू से लेकर अंत तक की सारी कहानी पुलिस को बता दी है।
हत्या के आरोपी ने ही शव को एंबुलेंस में रखवाया
स्थानीय सू्त्रों ने बताया कि हमला कर जान लेने के बाद मौके पर जब पुलिस आई तो भागने की जगह आरोपी मौके पर ही खड़ा रहा। उसी ने अजीम के शव को एंबुलेंस में पुलिस के सामने रखवाया। शव एंबुलेंस में रखने के बाद पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। इसी के बाद पूछताछ में उसने जूर्म कबूलने के अलावा पूरा घटना खोलकर सामने रख दी।
स्थानीय सू्त्रों ने बताया कि हमला कर जान लेने के बाद मौके पर जब पुलिस आई तो भागने की जगह आरोपी मौके पर ही खड़ा रहा। उसी ने अजीम के शव को एंबुलेंस में पुलिस के सामने रखवाया। शव एंबुलेंस में रखने के बाद पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। इसी के बाद पूछताछ में उसने जूर्म कबूलने के अलावा पूरा घटना खोलकर सामने रख दी।
अजीम के पारिजनों की तहरीर के आधार पर केस दर्ज किया गया है। जांच चल रही है। सभी पहलुओं को जांच में शामिल जाएगा। जो भी दोषी होंगे, कार्रवाई की जाएगी।-कृष्ण कुमार बिश्नोई, एसपी सिटी