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Gorakhpur News: फर्जी स्टांप प्रकरण- सरगना का बेटा मिले तो खुलेगा नकली नोट का राज- तलाश रही पुलिस
Sun, 14 Apr 2024 01:53 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 14 Apr 2024 01:53 PM IST
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पिछले दिनों पुलिस की कार्रवाई में मिला फर्जी स्टांप
- फोटो : अमर उजाला
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गोरखपुर के फर्जी स्टांप प्रकरण में सात लोगों की गिरफ्तारी के बाद से वांछित चल रहे आरोपियों की धर पकड़ के लिए पुलिस ने फिर दबिश दी। हालांकि, अभी आरोपी पकड़ से दूर है। बताया जा रहा है कि गिरोह का मास्टर माइंड कमरुद्दीन के बेटे के पकड़े जाने के बाद नकली नोट के रैकेट का पर्दाफाश हो सकता है।
यही वजह है कि पुलिस ने जांच तेज कर दी है। उधर, एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने इस प्रकरण में जल्द चार्जशीट करके गैंगस्टर की रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश भी दिया है। इसके बाद पुलिस गैंगस्टर एक्ट के तहत ही आरोपियों की अवैध कमाई से अर्जित की गई संपत्ति को जब्त करेगी।
पुलिस की अब तक की जांच में सामने आ चुका है कि 40 साल से धंधे करने वाला कमरुद्दीन पहले भी स्टांप बनाता था, लेकिन उसकी करतूत आसानी से पकड़ में आ जाती थी। यही वजह है कि धंधा शुरू करने के कुछ साल बाद ही वह 1986 में दबोच भी लिया गया।
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वह अपने समय में कम संख्या में ही स्टांप बनाता था, लेकिन जब उसका नाती साहेबजादे ने रसायन विज्ञान की पढ़ाई कर ली तो फिर वह इस धंधे में उतर गया। इसके साथ ही यह भी सामने आया कि आरोपी कमरुद्दीन का बेटा फर्जी स्टांप के साथ नकली नोट के कारोबार में भी लिप्त है।
इसके बाद पुलिस ने इसकी भी जांच शुरू कर दी है कि आखिर उसे इंक कहां से मिल रही थी। पुलिस की अब तक की जांच में पता चला है कि वाॅटर प्रिंट करके वह अदृश्य से दिखने वाले सिक्योरिटी फीचर को बनाया करता था, लेकिन इंक आदि पहलुओं पर जांच की जा रही है।
पुलिस को उम्मीद है कि बेटे के पकड़े जाने के बाद ही नकली नोट का गिरोह सामने आ सकता है क्योंकि नकली नोट के धंधे का असल माहिर कमरुद्दीन का बेटा ही है। पुलिस सरगर्मी से उसकी तलाश में जुटी है।
मौके से नहीं मिले थे नकली नोट
गिरफ्तारी के समय पुलिस को नकली स्टांप तो मिला, मगर नकली नोट नहीं मिल सका था। हालांकि, पुलिस को घर से मिले लैपटॉप में नकली नोट बनाने से जुड़े दस्तावेज मिले थे, जिसके आधार पर ही जांच को आगे बढ़ाया गया है। लैपटॉप में नकली नोट तैयार होने से पहले का फोटो भी मिला है।
यह है मामला
गोरखपुर के फर्जी स्टांप का मामला सामने आने के बाद कैंट थाने में केस दर्ज किया गया। इसी की जांच करते हुए पुलिस बिहार तक पहुंची और फिर सिवान जिले के मोफस्सिल थाना क्षेत्र के नई बस्ती निवासी मोहम्मद कमरुद्दीन, उनका नाती साहेबजादे, गोरखपुर के कोतवाली थाना क्षेत्र के समय माता मंदिर के पास रहने वाला रामलखन जायसवाल, कुशीनगर के कसया थाना क्षेत्र के जानकीनगर निवासी ऐश मोहम्मद, कुशीनगर के पडरौना के सिरसिया निवासी रविंद्र दीक्षित, देवरिया के भाटपार थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर 22 निवासी संतोष गुप्ता और पडरौना के बकुलहा निवासी नंदू उर्फ नंदलाल को गिरफ्तार कर लिया। इनके पास से एक करोड़ रुपये से अधिक के नकली स्टांप भी बरामद हुआ है। अब पुलिस नकली नोट की जांच कर रही है।
एसएसपी गौरव ग्रोवर ने बताया कि एसआईटी पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच कर रही है। वांछित आरोपियों की तलाश में पुलिस टीम लगी है। पुलिस आरोपियों पर गैंगस्टर की कार्रवाई भी करेगी।
यही वजह है कि पुलिस ने जांच तेज कर दी है। उधर, एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने इस प्रकरण में जल्द चार्जशीट करके गैंगस्टर की रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश भी दिया है। इसके बाद पुलिस गैंगस्टर एक्ट के तहत ही आरोपियों की अवैध कमाई से अर्जित की गई संपत्ति को जब्त करेगी।
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पुलिस की अब तक की जांच में सामने आ चुका है कि 40 साल से धंधे करने वाला कमरुद्दीन पहले भी स्टांप बनाता था, लेकिन उसकी करतूत आसानी से पकड़ में आ जाती थी। यही वजह है कि धंधा शुरू करने के कुछ साल बाद ही वह 1986 में दबोच भी लिया गया।
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वह अपने समय में कम संख्या में ही स्टांप बनाता था, लेकिन जब उसका नाती साहेबजादे ने रसायन विज्ञान की पढ़ाई कर ली तो फिर वह इस धंधे में उतर गया। इसके साथ ही यह भी सामने आया कि आरोपी कमरुद्दीन का बेटा फर्जी स्टांप के साथ नकली नोट के कारोबार में भी लिप्त है।
इसके बाद पुलिस ने इसकी भी जांच शुरू कर दी है कि आखिर उसे इंक कहां से मिल रही थी। पुलिस की अब तक की जांच में पता चला है कि वाॅटर प्रिंट करके वह अदृश्य से दिखने वाले सिक्योरिटी फीचर को बनाया करता था, लेकिन इंक आदि पहलुओं पर जांच की जा रही है।
पुलिस को उम्मीद है कि बेटे के पकड़े जाने के बाद ही नकली नोट का गिरोह सामने आ सकता है क्योंकि नकली नोट के धंधे का असल माहिर कमरुद्दीन का बेटा ही है। पुलिस सरगर्मी से उसकी तलाश में जुटी है।
मौके से नहीं मिले थे नकली नोट
गिरफ्तारी के समय पुलिस को नकली स्टांप तो मिला, मगर नकली नोट नहीं मिल सका था। हालांकि, पुलिस को घर से मिले लैपटॉप में नकली नोट बनाने से जुड़े दस्तावेज मिले थे, जिसके आधार पर ही जांच को आगे बढ़ाया गया है। लैपटॉप में नकली नोट तैयार होने से पहले का फोटो भी मिला है।
यह है मामला
गोरखपुर के फर्जी स्टांप का मामला सामने आने के बाद कैंट थाने में केस दर्ज किया गया। इसी की जांच करते हुए पुलिस बिहार तक पहुंची और फिर सिवान जिले के मोफस्सिल थाना क्षेत्र के नई बस्ती निवासी मोहम्मद कमरुद्दीन, उनका नाती साहेबजादे, गोरखपुर के कोतवाली थाना क्षेत्र के समय माता मंदिर के पास रहने वाला रामलखन जायसवाल, कुशीनगर के कसया थाना क्षेत्र के जानकीनगर निवासी ऐश मोहम्मद, कुशीनगर के पडरौना के सिरसिया निवासी रविंद्र दीक्षित, देवरिया के भाटपार थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर 22 निवासी संतोष गुप्ता और पडरौना के बकुलहा निवासी नंदू उर्फ नंदलाल को गिरफ्तार कर लिया। इनके पास से एक करोड़ रुपये से अधिक के नकली स्टांप भी बरामद हुआ है। अब पुलिस नकली नोट की जांच कर रही है।
एसएसपी गौरव ग्रोवर ने बताया कि एसआईटी पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच कर रही है। वांछित आरोपियों की तलाश में पुलिस टीम लगी है। पुलिस आरोपियों पर गैंगस्टर की कार्रवाई भी करेगी।