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Gorakhpur News: यूनिवर्सिटी में नौकरी दिलाने के नाम पर ठग लिए 16.30 लाख, 'फर्जी इंस्पेक्टर' गिरफ्तार

Wed, 11 Feb 2026 02:15 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Wed, 11 Feb 2026 02:15 AM IST
सार

एसपी साउथ ने बताया कि दिग्विजयनाथ खुद को उत्तर प्रदेश पुलिस में इंस्पेक्टर बताकर लोगों से नौकरी लगवाने के नाम पर पैसे लेता था। भदारखास-बढ़यापार निवासी धीरज शर्मा उसके शिकार हुए हैं। उनकी तहरीर पर उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि आरोपी अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बना चुका है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि उसने करीब 16.30 लाख रुपये की ठगी की है।

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Fake inspector arrested for cheating of Rs 16.30 lakh in the name of providing job in Gorakhpur

विस्तार

पुलिस ने एक फर्जी इंस्पेक्टर को गिरफ्तार किया है। उस पर पुलिस और प्रयागराज विश्वविद्यालय में नौकरी दिलाने के नाम पर 16.30 लाख की ठगी का आरोप है। उसकी पहचान बेलघाट थाना क्षेत्र के लखवापाकड़ गांव निवासी दिग्विजयनाथ के रूप में हुई है।

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उसके कब्जे से पुलिस की वर्दी, फर्जी पहचान पत्र, नेम प्लेट, बैज, स्टार, पेन ड्राइव, मोबाइल फोन और एक कार बरामद हुई है। ठगी के पीड़ितों में अब तक प्रयागराज, अंबेडकरनगर और गोरखपुर के लोगों के नाम सामने आए हैं।

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एसपी साउथ दिनेश पुरी ने बताया कि पकड़ा गया दिग्विजयनाथ पुलिस की वर्दी पहनकर न सिर्फ लोगों पर रौब जमाता था, बल्कि नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी और सड़क पर चेकिंग के बहाने वसूली भी करता था।

सिकरीगंज थानाध्यक्ष आशीष कुमार तिवारी के नेतृत्व में एसआई वैजनाथ बिंद, एसआई दीपक कुमार, कांस्टेबल राजू यादव और संदीप कुमार की टीम को सूचना मिली कि सिकरीगंज कस्बा क्षेत्र में पुलिस की वर्दी पहनकर एक संदिग्ध घूम रहा है।
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पुलिस टीम ने सिकरीगंज-बेलघाट मार्ग पर डड़िहथ मोड़ के पास एक कार को रोका। कार सवार व्यक्ति पुलिस निरीक्षक की वर्दी पहने था, लेकिन पूछताछ में वह अपने पद और तैनाती के बारे में संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। कड़ाई से पूछताछ करने पर उसने फर्जी दस्तावेजों के सहारे खुद को पुलिस अधिकारी बताकर ठगी करने की बात स्वीकार की।

एसपी साउथ ने बताया कि दिग्विजयनाथ खुद को उत्तर प्रदेश पुलिस में इंस्पेक्टर बताकर लोगों से नौकरी लगवाने के नाम पर पैसे लेता था। भदारखास-बढ़यापार निवासी धीरज शर्मा उसके शिकार हुए हैं। उनकी तहरीर पर उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जा रही है।

पुलिस यह भी पता लगा रही है कि आरोपी अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बना चुका है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि उसने करीब 16.30 लाख रुपये की ठगी की है।
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18 दस्तावेजों पर आईपीएस अफसर के हस्ताक्षर
पुलिस ने आरोपी की कार से 18 दस्तावेज बरामद किए, जिनमें उत्तर प्रदेश पुलिस में हेड कांस्टेबल मिनिस्ट्रियल के आईपीएस अफसर के हस्ताक्षर थे। इन दस्तावेजों में उमा चौहान, पवन कुमार, सुशील कुमार, राम आशीष, अंकित वर्मा, शिवम, अर्पित शुक्ला, दिनेश वर्मा, अमित कुमार वर्मा, अंकित पटेल, धर्मेंद्र यादव, जालंधर कुमार, प्रेमचंद पांडेय, उपेंद्रनाथ पांडेय, आदित्य वर्मा, मयंक कुमार यादव, नीतिश सिंह और विशाल का नाम शामिल है। पुलिस इन सभी से पूछताछ करने की तैयारी में है।

फर्जी कागजातों का खुलासा, ठगी के शिकार तीन व्यक्ति आए सामने
पुलिस ने आरोपी के पास से बरामद दस्तावेजों के आधार पर गोला के वार्ड नं. 16 गोपालपुर दक्षिणी निवासी शशिकांत से संपर्क किया तो उसने बताया कि आराेपी ने उनसे पुलिस विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर 25 हजार रुपये और आजमगढ़ के अतरौलिया सिकौहुला निवासी भानू प्रताप मिश्रा से प्रयागराज विश्वविद्यालय में नौकरी दिलाने के नाम पर 6.46 लाख और अंंबेडकरनगर के राजे सुल्तानपुर निवासी अखिलेश यादव 55 हजार रुपये लिए थे। पुलिस दस्तावेजों के आधार पर अन्य लोगों से भी संपर्क कर उनके बयान दर्ज कराने के लिए थाने बुलाया है।
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