{"_id":"670f508eee734e18f20cccd0","slug":"fake-hallmarking-is-being-used-to-smuggle-illegal-gold-in-gorakhpur-2024-10-16","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"अवैध सोना: धंधेबाजों की भी दिवाली- फर्जी हॉलमार्किंग के जरिए खपा रहे अवैध सोना- जानिए कैसे रहें सतर्क","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अवैध सोना: धंधेबाजों की भी दिवाली- फर्जी हॉलमार्किंग के जरिए खपा रहे अवैध सोना- जानिए कैसे रहें सतर्क
Wed, 16 Oct 2024 11:05 AM IST
रोहित सिंह
रोहित सिंह, गोरखपुर
रोहित सिंह, गोरखपुर
Published by: रोहित सिंह
Updated Wed, 16 Oct 2024 11:05 AM IST
सार
रअसल, धंधेबाज भी जान गए हैं कि ग्राहकों को हॉलमार्क वाले आभूषणों की खरीदारी ही भा रही है। ऐसे में उन्होंने भी बीच का रास्ता निकाला है। अब अवैध सोने से बने आभूषणों को खपाने के लिए इसपर फर्जी हॉलमार्किंग लगवा दे रहे हैं। जबकि, बैंक से खरीदे सोने (जीएसटी फर्म पर) से तैयार आभूषणों पर फर्म के नाम से बने बिल (जीएसटी नंबर के साथ) वाली बिलिंग कर रहे हैं।
विज्ञापन
पिछले दिनों पकड़ा गया अवैध सोना( बुलियन)
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दिवाली को लेकर अभी से सोने-चांदी के मार्केट में तेजी आ गई है। ऐसे में धंधेबाज भी अपनी दिवाली जगमग करने में जुट गए हैं। जिले के अलग-अलग गहना बाजारों में फर्जी हॉलमार्किंग के जरिए धंधेबाज अवैध सोना खपा रहे हैं। रोजाना करीब 25 किलो सोना के आभूषण इधर से उधर किए जा रहे हैं। शहर के ऐसे सात धंधेबाजों पर एजेंसियों की नजर है।
त्योहार के बीच ही इनपर कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में अगर आप गहनों की खरीदारी कर रहे हैं तो पर्याप्त सावधानी बरतें। सूत्रों के मुताबिक, धंधेबाजों ने चोरी से खुद की दुकान पर ही हॉलमार्किंग मशीन लगाकर एचएम-750 बीआईएस का मार्का लगाकर आभूषण तैयार करना शुरू कर दिया है।
विज्ञापन
त्योहार के बीच ही इनपर कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में अगर आप गहनों की खरीदारी कर रहे हैं तो पर्याप्त सावधानी बरतें। सूत्रों के मुताबिक, धंधेबाजों ने चोरी से खुद की दुकान पर ही हॉलमार्किंग मशीन लगाकर एचएम-750 बीआईएस का मार्का लगाकर आभूषण तैयार करना शुरू कर दिया है।
विज्ञापन
BIS Recruitment 2024
- फोटो : ANI
इसमें हिंदी बाजार के पांच और आर्यनगर के दो धंधेबाज शामिल हैं। लगभग 16 किलो बुलियन में अवैध सोना गोरखपुर के बाजारों में पहुंच रहा है। ऐसे लगभग 22 करोड़ रुपये के अवैध सोने से आभूषण तैयार कर इसे बिना जीएसटी वाले बिलिंग पर्ची (कच्ची पर्ची) से ग्राहकों को बेचा जा रहा है। ये खपत त्योहार के समय और बढ़ जाएगी।
दरअसल, धंधेबाज भी जान गए हैं कि ग्राहकों को हॉलमार्क वाले आभूषणों की खरीदारी ही भा रही है। ऐसे में उन्होंने भी बीच का रास्ता निकाला है। अब अवैध सोने से बने आभूषणों को खपाने के लिए इसपर फर्जी हॉलमार्किंग लगवा दे रहे हैं।
दरअसल, धंधेबाज भी जान गए हैं कि ग्राहकों को हॉलमार्क वाले आभूषणों की खरीदारी ही भा रही है। ऐसे में उन्होंने भी बीच का रास्ता निकाला है। अब अवैध सोने से बने आभूषणों को खपाने के लिए इसपर फर्जी हॉलमार्किंग लगवा दे रहे हैं।
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Istock
जबकि, बैंक से खरीदे सोने (जीएसटी फर्म पर) से तैयार आभूषणों पर फर्म के नाम से बने बिल (जीएसटी नंबर के साथ) वाली बिलिंग कर रहे हैं। बीआईएस को इसकी जानकारी भी मिली है। इसका फायदा है कि अवैध सोने के आभूषणों को बैंक के भाव वाले दर पर ग्राहकों को बेच देते हैं।
ग्राहक भी बैंक के भाव वाले दर से सस्ते के चक्कर में कच्ची पर्ची पर ही इस आभूषण को खरीद लेते हैं, लेकिन इसमें फायदा धंधेबाजों का ही होता है। जबकि, नियमानुसार ग्राहकों को पक्के पर्ची वाले बिल (जीएसटी बिल) ही दुकानदार से लेने चाहिए।
ग्राहक भी बैंक के भाव वाले दर से सस्ते के चक्कर में कच्ची पर्ची पर ही इस आभूषण को खरीद लेते हैं, लेकिन इसमें फायदा धंधेबाजों का ही होता है। जबकि, नियमानुसार ग्राहकों को पक्के पर्ची वाले बिल (जीएसटी बिल) ही दुकानदार से लेने चाहिए।
Fir demo
- फोटो : फाइल फोटो
अध्यक्ष के नाम पर ही बेची जा रही थी फर्जी हॉलमार्किंग
हिंदी बाजार में धंधेबाजों की संख्या अचानक बढ़ गई है। अभी कुछ दिनों पहले ही एक धंधेबाज के पास सराफा के अध्यक्ष की दुकान के नाम के फर्जी हॉलमार्किंग वाले जेवर रखे मिले थे। धंधेबाज ने बंधेल के जेवरों पर हॉलमार्किंग कराई थी। शिकायत पर पुलिस के साथ सराफा संगठन की टीम मौके पर पहुंची और कार्रवाई की गई थी। केस दर्ज कर कार्रवाई की गई थी।
हिंदी बाजार में धंधेबाजों की संख्या अचानक बढ़ गई है। अभी कुछ दिनों पहले ही एक धंधेबाज के पास सराफा के अध्यक्ष की दुकान के नाम के फर्जी हॉलमार्किंग वाले जेवर रखे मिले थे। धंधेबाज ने बंधेल के जेवरों पर हॉलमार्किंग कराई थी। शिकायत पर पुलिस के साथ सराफा संगठन की टीम मौके पर पहुंची और कार्रवाई की गई थी। केस दर्ज कर कार्रवाई की गई थी।
मोबाइल पर ऐप डाउनलोड कर लगा सकते हैं पता
- फोटो : istock
बीआईएस केयर एप से ग्राहक खुद कर सकते हैं जानकारी
ग्राहक खुद अपने स्तर से ही तय कर सकते हैं कि गहने नकली तो नहीं। जैसे, ग्राहक किसी दुकानदार के पास गया। अगर दुकानदार बाजार भाव से कम पर आभूषण बेच रहा है तो पहले देखें कि बिलिंग पर्ची कैसी दी है। कच्ची है या पक्की। इसके बाद मोबाइल में बीआईएस केयर एप से ग्राहक हॉलमार्किंग की जांच खुद कर सकते हैं।
शुद्धता जांचने के लिए ज्वेलरी का एचयूआईडी नंबर डालकर एप के वेरिफाई एचयूआईडी को जांचना होगा। बीआईएस की ओर से पंजीकृत दुकानदार होगा तो आईएसआई, हॉलमार्क और सीआरएस पंजीकरण चिह्नों की प्रामाणिकता एप पर दिख जाएगी।
ग्राहक खुद अपने स्तर से ही तय कर सकते हैं कि गहने नकली तो नहीं। जैसे, ग्राहक किसी दुकानदार के पास गया। अगर दुकानदार बाजार भाव से कम पर आभूषण बेच रहा है तो पहले देखें कि बिलिंग पर्ची कैसी दी है। कच्ची है या पक्की। इसके बाद मोबाइल में बीआईएस केयर एप से ग्राहक हॉलमार्किंग की जांच खुद कर सकते हैं।
शुद्धता जांचने के लिए ज्वेलरी का एचयूआईडी नंबर डालकर एप के वेरिफाई एचयूआईडी को जांचना होगा। बीआईएस की ओर से पंजीकृत दुकानदार होगा तो आईएसआई, हॉलमार्क और सीआरएस पंजीकरण चिह्नों की प्रामाणिकता एप पर दिख जाएगी।
सोना-चांदी
- फोटो : सोशल मीडिया
त्योहार में बीआईएस ने 200 दुकानदारों को दी बड़ी राहत
त्योहार के बीच भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने सोने-चांदी के 200 व्यापारियों को बड़ी राहत दी है। ये वे व्यापारी हैं, जिनका बीआईएस मानक पंजीकरण सस्पेंड हो गया था। वे फीस जमा कर फिर से अपने पंजीकरण को करवाने के चक्कर में थे।
अब बीआईएस ने त्योहारों को देखते हुए उनके पूर्व के लाइसेंस नंबर की वैधता बढ़ा दी है। इसके लिए उन्हें अतिरिक्त शुल्क भी नहीं देना होगा। सिर्फ अपने बीआईएस हॉलमार्क नंबर के साथ जाकर अपने आभूषणों पर एचयूआईडी मार्का करा सकते हैं। एबी हॉलमार्किंग सेंटर के सीईओ पवन वर्मा ने बताया कि बीआईएस के इस फैसले से बहुत से व्यापारियों को राहत मिली है।
बजट में पास तो कर दिया, लेकिन लिखित आदेश नहीं आया
सराफा मंडल के अध्यक्ष गणेश वर्मा ने बताया कि बजट में सोने पर लगने वाले कर में 6 प्रतिशत की छूट दी गई थी, लेकिन अभी इसे लेकर शासन की तरफ से लिखित आदेश नहीं आया है। बैंक से पहले वाले कर के भाव से ही खरीद-बिक्री हो रही है।
इसका फायदा धंधेबाज उठा रहे हैं। अवैध सोने की खरीद, बैंक के भाव से सस्ती पड़ती है। ऐसे में अभी भी पहले की तरह ही सोना खप रहा है। ग्राहकों को चाहिए कि बीआईएस मानक के अनुरूप नहीं होने पर सराफा कमेटी से शिकायत कर सकते हैं।
त्योहार के बीच भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने सोने-चांदी के 200 व्यापारियों को बड़ी राहत दी है। ये वे व्यापारी हैं, जिनका बीआईएस मानक पंजीकरण सस्पेंड हो गया था। वे फीस जमा कर फिर से अपने पंजीकरण को करवाने के चक्कर में थे।
अब बीआईएस ने त्योहारों को देखते हुए उनके पूर्व के लाइसेंस नंबर की वैधता बढ़ा दी है। इसके लिए उन्हें अतिरिक्त शुल्क भी नहीं देना होगा। सिर्फ अपने बीआईएस हॉलमार्क नंबर के साथ जाकर अपने आभूषणों पर एचयूआईडी मार्का करा सकते हैं। एबी हॉलमार्किंग सेंटर के सीईओ पवन वर्मा ने बताया कि बीआईएस के इस फैसले से बहुत से व्यापारियों को राहत मिली है।
बजट में पास तो कर दिया, लेकिन लिखित आदेश नहीं आया
सराफा मंडल के अध्यक्ष गणेश वर्मा ने बताया कि बजट में सोने पर लगने वाले कर में 6 प्रतिशत की छूट दी गई थी, लेकिन अभी इसे लेकर शासन की तरफ से लिखित आदेश नहीं आया है। बैंक से पहले वाले कर के भाव से ही खरीद-बिक्री हो रही है।
इसका फायदा धंधेबाज उठा रहे हैं। अवैध सोने की खरीद, बैंक के भाव से सस्ती पड़ती है। ऐसे में अभी भी पहले की तरह ही सोना खप रहा है। ग्राहकों को चाहिए कि बीआईएस मानक के अनुरूप नहीं होने पर सराफा कमेटी से शिकायत कर सकते हैं।
सोना खरीदते समय ये गलतियां आपको पड़ सकती हैं भारी
- फोटो : istock
दुकान छोटी, सौदा बड़ा
शहर के हिंदी बाजार से लेकर आर्यनगर इलाके और रुस्तमपुर क्षेत्र में दुकानें छोटी होने के बाद भी धंधेबाजों का धंधा बड़ा है। ये अवैध सोने के आभूषणों पर फर्जी हॉलमार्किंग लगाकर आस-पास के क्षेत्रों में आपूर्ति दे रहे हैं। इससे ग्रामीण अंचल में इनके आभूषण की खपत हो जा रही है।
सोने पर बैंक के भाव से दाम मिल जा रहा है। धंधेबाजी से जुड़े सूत्रों ने बताया कि इस समय बैंक के सोने का भाव 77,730 रुपये प्रति दस ग्राम है, जबकि धंधे वाले सोने का भाव 77,600 हजार रुपये प्रति दस ग्राम। ऐसे में कुल 300 रुपये प्रति दस ग्राम सस्ता है।
ये तब होता है, जब बाजार में धंधेबाजी वाले सोने की मांग औसत से कम हो जाती है। इस समय गोरखपुर की तुलना में धंधेबाजी वाला सोना नेपाल में खूब खपाया जा रहा है। इस वजह से गोरखपुर और आस-पास में इसका भाव कम हो गया है।
नेपाल में प्रति दस ग्राम 5 हजार रुपये अधिक का भाव
इन दिनों गोरखपुर की तुलना में यहां से नेपाल में सोने की तस्करी खूब हो रही है। गोरखपुर में सोने का भाव अगर 78 हजार रुपये प्रति दस ग्राम है तो नेपाल में इसका भाव भारतीय मुद्रा में 83 हजार रुपये होगा। ऐसे प्रति दस ग्राम 5 हजार रुपये अधिक के भाव से नेपाल में सोना खपाया जा रहा है।
सूत्रों ने बताया कि पिछले दिनों नेपाल से भारत में प्रवेश करने के बाद डीआरआई ने कुछ लोगों को अवैध सोने के साथ पकड़ा था। सूत्र ने बताया कि ये नेपाल से ही सोना खपाकर लौट रहे थे। इनके पास से बचे सोने और नकदी को एजेंसी ने पकड़ा था।
शहर के हिंदी बाजार से लेकर आर्यनगर इलाके और रुस्तमपुर क्षेत्र में दुकानें छोटी होने के बाद भी धंधेबाजों का धंधा बड़ा है। ये अवैध सोने के आभूषणों पर फर्जी हॉलमार्किंग लगाकर आस-पास के क्षेत्रों में आपूर्ति दे रहे हैं। इससे ग्रामीण अंचल में इनके आभूषण की खपत हो जा रही है।
सोने पर बैंक के भाव से दाम मिल जा रहा है। धंधेबाजी से जुड़े सूत्रों ने बताया कि इस समय बैंक के सोने का भाव 77,730 रुपये प्रति दस ग्राम है, जबकि धंधे वाले सोने का भाव 77,600 हजार रुपये प्रति दस ग्राम। ऐसे में कुल 300 रुपये प्रति दस ग्राम सस्ता है।
ये तब होता है, जब बाजार में धंधेबाजी वाले सोने की मांग औसत से कम हो जाती है। इस समय गोरखपुर की तुलना में धंधेबाजी वाला सोना नेपाल में खूब खपाया जा रहा है। इस वजह से गोरखपुर और आस-पास में इसका भाव कम हो गया है।
नेपाल में प्रति दस ग्राम 5 हजार रुपये अधिक का भाव
इन दिनों गोरखपुर की तुलना में यहां से नेपाल में सोने की तस्करी खूब हो रही है। गोरखपुर में सोने का भाव अगर 78 हजार रुपये प्रति दस ग्राम है तो नेपाल में इसका भाव भारतीय मुद्रा में 83 हजार रुपये होगा। ऐसे प्रति दस ग्राम 5 हजार रुपये अधिक के भाव से नेपाल में सोना खपाया जा रहा है।
सूत्रों ने बताया कि पिछले दिनों नेपाल से भारत में प्रवेश करने के बाद डीआरआई ने कुछ लोगों को अवैध सोने के साथ पकड़ा था। सूत्र ने बताया कि ये नेपाल से ही सोना खपाकर लौट रहे थे। इनके पास से बचे सोने और नकदी को एजेंसी ने पकड़ा था।