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फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामला: साहब! प्रशासन ही रख ले मेरी बंदूक, कैसी दिखती थी, यह भी भूल गया

Wed, 29 Dec 2021 02:28 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 29 Dec 2021 02:28 PM IST
सार

ढाई साल पहले हुए शस्त्र लाइसेंस फर्जीवाड़े में सील रवि गन हाउस में 200 से अधिक लोगों की बंदूकें रखी हैं। रवि गन हाउस खुलवाने पहुंची टीम को फिर खाली हाथ लौटना पड़ा, दूर-दराज से अपने शस्त्र लेने आए लोग भी मायूस हुए।

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Fake arms license case licensee upset for weapons lying in Ravi Gun House
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

साहब! ढाई साल से इंतजार करके थक चुका हूं। मेरी बंदूक प्रशासन अपने पास ही रख ले। अब तो उसमें जंग भी लग गई होगी। कैसी दिखती थी, यह भी भूल गया हूं। यह पीड़ा थी महोबा के रहने वाले शस्त्र लाइसेंसधारी प्रभात की जो बड़ी आस लेकर मंगलवार को अपना शस्त्र लेने टाउनहाल स्थित रवि गन हाउस के सामने पहुंचे थे। प्रभात महज एक बानगी हैं, उनकी जैसी ही पीड़ा उन करीब 200 शस्त्र लाइसेंसधारियों की है जिनके शस्त्र रवि गन हाउस में बंद पड़े हैं।  

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जानकारी के मुताबिक 16 अगस्त 2019 को जिले में फर्जी शस्त्र लाइसेंस का मामला प्रकाश में आने के बाद गोलघर स्थित रवि गन हाउस को सील कर दिया गया था। उस समय लोकसभा चुनाव के समय दो सौ से अधिक लाइसेंसधारियों ने अपने असलहे इस दुकान में जमा किए थे। मगर दुकान सील होने के बाद वे इसे निकाल नहीं सके। पिछले ढाई साल से ये शस्त्र लाइसेंसधारी 25 से अधिक बार शस्त्र अनुभाग, डीएम व सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय के चक्कर लगा चुके हैं। इस बीच डीएम के निर्देश पर एसीएम के नेतृत्व में बनी विशेष कमेटी ने कई बार दुकान खोलने की तारीख तय की। संबंधित शस्त्र लाइसेंसधारियों को इसकी सूचना दी गई और वे समय पर पहुंचे भी। मगर हर बार दुकान के प्रोपराइटर के नहीं पहुंचने की वजह से सील नहीं खुल पाई और लाइसेंसधारियों को मायूस लौटना पड़ा।
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सोमवार को एक बार फिर वही हुआ। दुकान के प्रोपराइट के मौके पर नहीं पहुंचने की वजह से एसीएम के नेतृत्व में गई टीम को बैरंग लौटना पड़ा। अफसर लगातार प्रोपराइटर से दुकान पर आने का आग्रह करते रहे और वह नहीं आने की बात पर अड़ा रहा। ऐसे में गोरखपुर के अलावा महराजगंज, महोबा, बस्ती से आए तमाम शस्त्र लाइसेंसधारी प्रशासन को कोसते हुए मायूस वापस लौट गए। कुछ लाइसेंसधारियों का क्रोध व पीड़ा मौके पर ही छलक उठी। उनका कहना था कि अब उन्हें अपने शस्त्र की सूरत तक नहीं याद रह गई है। सुरक्षा के लिए उन्होंने तमाम कोशिशों के बाद किसी तरह असलहा लिया था मगर वह ढाई साल से एक दुकान में कैद है जो प्रशासन की लापरवाही से खुल नहीं पा रहा। ऐसे में यदि उनके साथ कोई घटना होती है तो उसका जिम्मेदार कौन होगा।        
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प्रोपराइटर नोटिस मांगता रहा, टीम आग्रह करती रही

लाइसेंसधारियों के अनुरोध पर डीएम विजय किरन आनंद ने मंगलवार को एसीएम के नेतृत्व में टीम को  दुकान खुलवाकर लाइसेंसधारियों को शस्त्र दिलाने का निर्देश दिया था। टीम और लाइसेंसधारी पहुंच गए लेकिन दुकान संचालक नहीं पहुंचा। मौके से एसीएम ने जब संचालक को फोन किया तो उसने आने से साफ इनकार कर दिया। मजबूरन टीम को वापस लौटना पड़ा। संचालक का कहना था कि प्रशासन ने इस संबंध में पूर्व में कोई नोटिस नहीं दिया। ऐसे में बिना नोटिस के वह दुकान पर कैसे आ सकते हैं। उनका कहना है कि नोटिस मिलेगी तो निश्चित तौर पर दुकान पर पहुंचेंगे और प्रशासन का पूरा सहयोग भी करेंगे। वहीं प्रशासन का कहना है कि उन्होंने पूर्व में ही प्रोपराइटर को सूचना देकर मंगलवार के दिन आने के लिए कहा था।  


 
डीएम विजय किरन आनंद ने बताया कि दुकान खोलकर लोगों के रखे असलहे निकालने के लिए टीम को भेजा गया था। दुकान के प्रोपराइटर के न आने के कारण टीम को लौटना पड़ा। प्रोपराइटर को चेतावनी दी गई है कि एक सप्ताह के अंदर दुकान पर मौजूद होकर ताला खुलवाने में मदद करें वर्ना उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बहानेबाजी नहीं चलेगी। 

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