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Gorakhpur News: मेडिकल कॉलेज में भी लगेगा 'नेकी का पालना', बजेगा अलार्म
Wed, 14 Dec 2022 11:11 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 14 Dec 2022 11:11 AM IST
सार
मां भगवती विकास संस्थान के संस्थापक योग गुरु देवेंद्र अग्रवाल ने बताया कि कोई भी महिला नवजात को इस पालने तक पहुंचा सकती है। पालने में एक मोशन सेंसर लगा है। इसमें नवजात को रखने के दो मिनट बाद महिला अस्पताल की इमरजेंसी में लगा अलार्म बज उठेगा।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
डस्टबिन, कटीली झाड़ियों, नदी और तालाबों में फेंके जाने वाले नवजातों को जीवन मिले, इसके लिए अब महिला जिला अस्पताल के बाद अब बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ‘नेकी का पालना’ लगाया जाएगा।
मंगलवार को मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य के साथ मां भगवती विकास संस्थान, उदयपुर के संस्थापक देवेंद्र अग्रवाल ने महिला अस्पताल के मुख्य द्वार के पास स्थान चिह्नित की। दो महीने में यहां ‘नेकी का पालना’ लगाया जाएगा। इसमें कोई भी लावारिस नवजात को रख सकेगा। रखने वाले का नाम-पहचान गोपनीय रखा जाएगा।
मां भगवती विकास संस्थान के संस्थापक योग गुरु देवेंद्र अग्रवाल ने बताया कि कोई भी महिला नवजात को इस पालने तक पहुंचा सकती है। पालने में एक मोशन सेंसर लगा है। इसमें नवजात को रखने के दो मिनट बाद महिला अस्पताल की इमरजेंसी में लगा अलार्म बज उठेगा।
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इससे वहां काम करने वाले डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों को नवजात के बारे में सूचना मिल जाएगी। इसके बाद नवजात का स्वास्थ्य परीक्षण कर जरूरत के हिसाब से उसका उपचार किया जाएगा। स्वस्थ होने पर उसे नजदीकी राजकीय शिशु गृह में भेज दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से भूमि आवंटन पत्र प्राप्त हो गया है।
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मंगलवार को मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य के साथ मां भगवती विकास संस्थान, उदयपुर के संस्थापक देवेंद्र अग्रवाल ने महिला अस्पताल के मुख्य द्वार के पास स्थान चिह्नित की। दो महीने में यहां ‘नेकी का पालना’ लगाया जाएगा। इसमें कोई भी लावारिस नवजात को रख सकेगा। रखने वाले का नाम-पहचान गोपनीय रखा जाएगा।
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मां भगवती विकास संस्थान के संस्थापक योग गुरु देवेंद्र अग्रवाल ने बताया कि कोई भी महिला नवजात को इस पालने तक पहुंचा सकती है। पालने में एक मोशन सेंसर लगा है। इसमें नवजात को रखने के दो मिनट बाद महिला अस्पताल की इमरजेंसी में लगा अलार्म बज उठेगा।
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इससे वहां काम करने वाले डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों को नवजात के बारे में सूचना मिल जाएगी। इसके बाद नवजात का स्वास्थ्य परीक्षण कर जरूरत के हिसाब से उसका उपचार किया जाएगा। स्वस्थ होने पर उसे नजदीकी राजकीय शिशु गृह में भेज दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से भूमि आवंटन पत्र प्राप्त हो गया है।