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Exclusive: एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी ने बढ़ाई मरीजों की मुसीबत, असमंजस में पड़े डॉक्टर

Wed, 29 Sep 2021 02:58 PM IST
vivek shukla नीरज मिश्रा, गोरखपुर।
नीरज मिश्रा, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 29 Sep 2021 02:58 PM IST
सार

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चेस्ट विभागाध्यक्ष डॉ अश्वनी मिश्रा ने बताया कि एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी के मरीजों की संख्या बढ़ी है। हर दिन आठ से 10 मरीज ओपीडी में आ रहे हैं।

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Extra pulmonary TB increased trouble of patients
गोरखपुर मेडिकल कॉलेज। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

टीबी से ठीक होने के बाद भी मरीजों के शरीर में गांठें निकल रही हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक इसे एक्सट्रा पल्मोनरी टीबी कहते हैं। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। हालांकि, एक्सट्रा पल्मोनरी टीबी के 50 फीसदी से अधिक मरीज बिना इलाज के ठीक हो जाते हैं, जबकि 50 फीसदी को इलाज की जरूरत पड़ती है।

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जानकारी के मुताबिक, जिले में टीबी के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। ठीक होने वाले मरीजों की स्थिति भी बेहतर है। लेकिन ठीक होने वाले मरीजों के गले और फेफड़ों में गांठें मिल रही हैं। मरीजों के फेफड़े या पेट में पानी भरने की भी शिकायतें मिली हैं। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चेस्ट विभागाध्यक्ष डॉ अश्वनी मिश्रा ने बताया कि एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी के मरीजों की संख्या बढ़ी है। हर दिन आठ से 10 मरीज ओपीडी में आ रहे हैं।
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मरीजों को डर है कि गांठें कही कैंसर के लक्षण तो नहीं हैं। मरीजों को समझाया जा रहा है कि यह कैंसर के लक्षण नहीं है। यह गांठें आसानी से ठीक हो जाती है। 50 फीसदी मरीजों को ही इलाज की जरूरत होती है। अन्य मरीज खुद ही ठीक हो जाते हैं। ऐसे मरीजों का खानपान बेहतर रखना चाहिए, जिससे उनकी प्रतिरोधक क्षमता दुरुस्त रहे।  
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सरकारी केंद्रों पर इलाज मुफ्त

डॉ. अश्वनी मिश्रा ने बताया कि टीबी बाल और नाखून को छोड़कर शरीर के किसी भी अंग पर असर डाल सकता है। यह बेहद खतरनाक और संक्रामक बीमारी है। सरकारी केंद्रों पर टीबी का इलाज निशुल्क है। अगर टीबी के लक्षण दिखते हैं तो तत्काल जांच कराएं।

क्या है एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी
फेफड़े की टीबी को पल्मोनरी और शरीर के अन्य हिस्से की टीबी को एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी कहा जाता है। टीबी के मरीजों में करीब 70 फीसदी में पल्मोनरी और 30 फीसदी में एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी होती है। एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी से ग्रसित मरीजों से दूसरों को खतरा कम होता है, जबकि पल्मोनरी टीबी दूसरों को ज्यादा संक्रमित कर सकता है। एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी जिसे होता है, उसे सूजन, दर्द, हल्का बुखार, रात में पसीना, भूख नहीं लगती है। यही टीबी फेफड़े में हो जाए तो पानी भर जाता है या गांठ बना लेता है। उसी गांठ से पानी निकालकर जांच होती है। सामान्य स्थिति में नौ से 12 माह या गंभीर स्थिति में होने पर करीब दो साल तक दवा चलती है।  

यह लक्षण दिखें तो कराएं जांच
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. रामेश्वर मिश्र ने बताया कि दो सप्ताह या अधिक समय तक खांसी आना, खांसी के साथ बलगम आना, बलगम में कभी-कभी खून आना, सीने में दर्द होना, शाम को हल्का बुखार आना, वजन कम होना और भूख न लगना सामान्य लक्षण हैं। ऐसे लक्षण मिलने पर तत्काल जांच कराएं।

एक नजर मरीजों की स्थिति पर
वर्ष                             मरीज
2019                          11473
2020                          8658
2021                          6094
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