गोरखपुर जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव: सत्ता, दिन और तारीख बदली, घटनाक्रम पुराना
- जनवरी 2016 कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट पर सपा समर्थकों का था कब्जा, मजबूर दिखे थे अफसर
- सपा समर्थकों ने भाजपा समर्थक पवन सिंह को पीटा था, इस बार सपा नेता पारस यादव की हुई पिटाई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
गोरखपुर में जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव के नामांकन के दौरान शनिवार को नजारा, बहुत कुछ पिछले मतदान वाले दिन जैसा रहा। फर्क बस इतना था कि तब सत्ता में सपा थी, इस बार भाजपा। तब सपा को जीत की भूख थी, इस बार भाजपा निर्विरोध जीत की भूखी थी। दिन और तारीख भले ही बदले हों, मगर जनवरी 2016 को जिला पंचायत अध्यक्ष के मतदान के दौरान कलेक्ट्रेट के आसपास जो घटा, ठीक वैसा ही दृश्य 26 जून 2021 (शनिवार) को दिखाई पड़ा। उस समय भी नियम-कानून को ठेंगा दिखा, कलेक्ट्रेट के भीतर बेरोकटोक आने-जाने के साथ ही गेट पर सपा समर्थक निगरानी कर रहे थे। इस बार भी नजारा कुछ ऐसा ही था, बस सपा की जगह भाजपा समर्थकों के चेहरे थे।
साल 2016 में सब गुणा-गणित बैठाने के बाद भी पूर्व जिला पंचायत सदस्य व भाजपा समर्थक पवन सिंह सपा नेता मनुरोजन यादव की पत्नी व जिला पंचायत अध्यक्ष प्रत्याशी गीतांजलि यादव के पक्ष में मतदान के लिए तैयार नहीं हुए थे। जैसे ही वह मतदान करने पहुंचे पहले से घात लगाए सपा समर्थकों और पुलिस ने कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट के बाहर उनकी जमकर पिटाई कर दी थी।
गोरखपुर | नामांकन स्थल पर सपा नेता से मारपीट का वीडियो वायरल। आरोप है कि भाजपा नेताओं ने जबरन गेट से बाहर किया। pic.twitter.com/1DPVsjZ58A
— Amar Ujala Gorakhpur (@AU_GKPNews) June 26, 2021
इस बार भाजपा समर्थकों ने सपा नेता व पूर्व जिला पंचायत सदस्य पारस यादव की ठीक उसी तरह पिटाई की। शनिवार को कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट के बाहर जब सपा जिलाध्यक्ष नगीना प्रसाद साहनी फोन पर बार-बार किसी से यह बात कह रहे थे कि सत्ता के दम पर चुनाव में मनमानी की जा रही है। पुलिस व प्रशासनिक अफसर मूक खड़े तमाशा देख रहे हैं तो वहीं जमे भाजपा समर्थक बार-बार सवाल उठा रहे थे कि अब क्यों तकलीफ हो रही, पिछला चुनाव क्यों भूल रहे हो। तब आपने मनमानी करने में कौन सी कसर छोड़ी थी?
तब भी हुआ था धरना-प्रदर्शन
जनवरी 2015 में हुए पंचायत चुनाव में 73 जिला पंचायत सदस्य चुने गए थे। उस समय प्रदेश में सपा की सरकार थी। जनवरी 2016 में जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव हुआ था। जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में जीत हासिल करने के लिए सत्ताधारी दल सपा ने प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया था। उस समय सपा की गीतांजलि यादव के मुकाबले गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा सीट से तत्कालीन भाजपा विधायक विजय बहादुर यादव के भाई अजय बहादुर चुनाव मैदान में थे।
73 जिला पंचायत सदस्यों में से 34 ने गीतांजलि यादव के पक्ष में मतदान किया था, जबकि अजय बहादुर यादव को 27 मत मिले थे। 11 मतों को अवैध माना गया था। एक सदस्य ने मतदान में भाग नहीं लिया था। सर्वाधिक मत पाकर गीतांजलि यादव विजयी रहीं।
इस चुनाव में यशवंत यादव ने भी जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए दावेदारी पेश की थी, लेकिन उन्हें एक भी मत नहीं मिला था। तब दूसरे प्रत्याशी के भाई व पूर्व विधायक के भाई ने भी प्रदर्शन किया था। धांधली का आरोप लगाया था। अब सपा वही आरोप लगा रही है। साल 2017 में विधानसभा चुनाव के बाद प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष बदले जाने के कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। गीतांजलि अपना कार्यकाल पूरा करने में सफल रहीं।