फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   EPFO helpful in Dainik Lok Adalat to help families of those who died in Coron

कोरोना ने छीने हाथ: 'वो' तो नहीं रहे मगर उनकी पीएफ ने दिया सम्मान से जीने का मौका

Fri, 15 Oct 2021 02:08 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 15 Oct 2021 02:08 PM IST
सार

इन दिनों क्षेत्रीय आयुक्त अभयानंद तिवारी, कोरोना के शिकार ईपीएफओ के सदस्यों के परिवारों को मदद पहुंचाने का अभियान छेड़े हुए हैं। इसके लिए वे 45 दिनों से निरंतर दैनिक लोक अदालत लगा रहे हैं।

विज्ञापन
EPFO helpful in Dainik Lok Adalat to help families of those who died in Coron
दैनिक लोक अदालत में समस्या का समाधान कराते क्षेत्रीय आयुक्त अभयानंद तिवारी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

कोरोना की पहली-दूसरी लहर में जिन परिवारों को तबाह करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, उन परिवारों का भविष्य संवारने में इंप्लाई प्रोविडेंट फंड आर्गनाइजेशन (ईपीएफओ) बहुत मददगार साबित हुआ।  इन दिनों क्षेत्रीय आयुक्त अभयानंद तिवारी, कोरोना के शिकार ईपीएफओ के सदस्यों के परिवारों को मदद पहुंचाने का अभियान छेड़े हुए हैं। इसके लिए वे 45 दिनों से निरंतर दैनिक लोक अदालत लगा रहे हैं।
विज्ञापन

 
उन लोक अदालतों में कई परिवारों ने राहत पाई। मसलन, कोरोना ने गोरखपुर के अंकुर उद्योग में काम करने वाले अशोक पटेल की जीवन लीला समाप्त कर दी। आज भी उस दौर को याद कर उनकी पत्नी प्रमिला सिसक उठती हैं। पति के गुजरने के बाद दोनों बच्चों की पढ़ाई और दो जून की रोटी के साथ जीवन यापन का बड़ा संकट सामने खड़ा था। मनोबल टूट चुका था, किसी प्रकार की कोई आय सुरक्षित नहीं थी। किसी ने इंप्लाई प्रोविडेंट फंड आर्गनाइजेशन (ईपीएफओ) कार्यालय गोरखपुर के बारे में बताया। ज्यादा पढ़ी-लिखी न होने की वजह से पहले तो प्रमिला झिझकीं, मगर बच्चों के भविष्य की चिंता उन्हें ईपीएफओ कार्यालय खींच ले आई।     
विज्ञापन


दैनिक लोक अदालत में आई प्रमिला ने अपनी समस्या क्षेत्रीय आयुक्त अभयानंद तिवारी को बताई। क्षेत्रीय आयुक्त ने समस्या सुनी और पीएफ इंस्पेक्टर समाधान में लगा दिया। इंस्पेक्टर को अंकुर उद्योग भेजकर क्लेम फार्म भरवाया और 24 घंटे के भीतर ही पीएफ इंश्योरेंस के 3,48,653 रुपये और 48,856 रुपये पीएफ के रूप में भुगतान भी करा दिया। 3,97,409 रुपये पाकर प्रमिला की चिंता कुछ दूर हुई।
विज्ञापन
विज्ञापन


क्षेत्रीय आयुक्त की पहल से ही प्रमिला को 2000 रुपये की मासिक पेंशन मिलने लगी। दोनों बच्चों की भी प्रतिमाह 500-500 रुपये की पेंशन बन गई। बकौल प्रमिला, पति ने पीएफ के बारे में पहले कुछ नहीं बताया था। ना ही इससे मिलने वाले लाभ के बारे में सुना था।

प्रमिला से कराया कार्यालय परिसर में पौध रोपण

ईपीएफओ कार्यालय में ये रवायत नहीं है कि किसी लाभार्थी से पौधरोपण कराया जाए, लेकिन प्रमिला से कार्यालय परिसर में पौधा लगवाया। पीएफ व पेंशन की समस्या जो भी लेकर आ रहा है, उसे गुणकारी पौधा देने की व्यवस्था सुनिश्चित कराई। गिलोय, तुलसी, एलोवेरा सहित तमाम पौधे दिए जा रहे हैं। इसके लिए क्षेत्रीय आयुक्त कार्यालय में नर्सरी तक बना दी गई है।

45 दिनों से चल रही दैनिक लोक अदालत
यह पहला मौका है, जब ईपीएफओ कार्यालय में लगातार दैनिक लोक अदालत लगाई जा रही है। 45वें दिन भी पेंशन व पीएफ के लाभार्थियों के समस्या के समाधान किए गए हैं। क्षेत्रीय आयुक्त अभयानंद तिवारी का कहना है कि लाभार्थियों के समस्या का समाधान लगातार होता रहेगा। दैनिक लोक अदालत नवंबर तक चलेगी। 45 दिन में ही 700 से ज्यादा समस्याएं दूर की गई हैं। किसी भी कार्यदिवस में आकर किसी भी तरह की समस्या का समाधान कराया जा सकता है।

हेल्पलाइन नंबर भी मददगार
अगर आप भी ईपीएफओ कार्यालय से जुड़ी अपनी किसी समस्या का समाधान कराना चाहते हैं तो फोन नंबर 0551-2200603 और व्हाटसएप नंबर 9044977792 पर संपर्क कर सकते हैं। कार्यालय आकर भी समस्या का समाधान करा सकते हैं।

रोहतक में पति की हुई मृत्यु, 24 घंटे में मिली पेंशन

शीला के पति रामकृपाल रोहतक में काम करते थे। वहां मृत्यु हुई तो पत्नी पेंशन की आस में ईपीएफओ कार्यालय गोरखपुर में चल रहे दैनिक लोक अदालत में शिकायत दर्ज कराई। क्षेत्रीय आयुक्त से पेंशन दिलाने की गुहार लगाई। दूसरे परिक्षेत्र के मामला होने के बावजूद आयुक्त ने रोहतक कार्यालय से संपर्क किया। सारे पेपर मंगवाए और उसी दिन पेंशन का कागज तैयार कराकर, उन्हें पेंशन भुगतान की कॉपी प्रदान की गई। अब हर महीने उन्हें पेंशन का लाभ मिल रहा है।
 
तीन गुना अधिक मिलने लगी पेंशन
वर्ष 1991 से 2007 तक भरूच की कंपनी से सेवानिवृत्त हुए नरसिंह पांडेय दो वर्षों से भागदौड़ कर रहे थे। उनकी समस्या थी कि नौकरी में भरूच से संबंधित सेवा को नहीं जोड़ा गया था। महज बरेली की सेवा के आधार पर पेंशन का पेपर बना दिया गया, जबकि नरसिंह ने 11 साल भरूच में काम किया था। कम सेवा दिखाने से पेंशन कम बन गई। मामला क्षेत्रीय आयुक्त तक पहुंचा। क्षेत्र उनका नहीं था, फिर भी प्रयास किया। नतीजा रहा कि तीन दिन में ही नया पीपीओ नंबर तैयार हुआ। अब उन्हें प्रतिमाह 990 रुपये के बजाय 2946 रुपये पेंशन मिल रही है।
 
ईपीएफओ के क्षेत्रीय आयुक्त अभयानंद तिवारी ने बताया कि ईपीएफओ कार्यालय की ओर से अंशधारकों की सहूलियत के लिए दैनिक लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रयास अनूठा है। पहला मौका है, जब केंद्र सरकार के किसी विभाग ने दैनिक लोक अदालत लगाने की व्यवस्था सुनिश्चित की है। दैनिक लोक अदालत में लाभार्थियों की समस्याएं सीधे सुनी जाती हैं। इसका तत्काल समाधान कराया जाता है। यह प्रयास आगे भी जारी रहेगा। इससे अंशधारकों को बड़ी राहत मिली है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed