{"_id":"5fbd641a8ebc3e9bcb6f2ae2","slug":"environment-taking-a-sigh-relief-stubble-burning-and-strong-west-wind-gorakhpur-city-news-gkp3744125101","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"पराली कम जलने और तेज पछुवा हवा चलने से पर्यावरण ले रहा राहत की सांस, यहां देखें एयर क्वालिटी इंडेक्स","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पराली कम जलने और तेज पछुवा हवा चलने से पर्यावरण ले रहा राहत की सांस, यहां देखें एयर क्वालिटी इंडेक्स
Wed, 25 Nov 2020 11:53 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 25 Nov 2020 11:53 AM IST
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : PTI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में लगातार पछुवा हवा चलने और पराली कम जलाने से पर्यावरण भी राहत की सांस ले रहा है। प्रदूषण नहीं बढ़ने से हवा की गुणवत्ता सुधरी है। दिवाली के दिन एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) खराब होकर 190 तक पहुंच गया था। दिवाली के बाद से वायु गुणवत्ता सूचकांक 130 से 150 के बीच बना हुआ है। हालांकि, हवा की यह गुणवत्ता भी अच्छी नहीं मानी जाती है, लेकिन पिछले कुछ दिनों में आया सुधार थोड़ी राहत देने वाला जरूर है।
विज्ञापन
बता दें कि दिल्ली समेत एनसीआर में एयर क्वालिटी इंडेक्स पिछले महीने भर से 300 से 400 के बीच बना हुआ है। वहीं, गोरखपुर में यह आंकड़ा 130 तक पहुंच गया है। विशेषज्ञों के अनुसार हवा की गुणवत्ता में सुधार पराली पर रोक की वजह से भी हुआ है। वहीं, पछुवा हवा की तेज रफ्तार भी इसे बेहतर बनाने में सहायक रही है।
विज्ञापन
11 किलोमीटर से ज्यादा रफ्तार से चल रही पछुवा हवा
मौसम विशेषज्ञ कैलाश पांडेय के अनुसार पिछले कुछ दिनों से पछुवा हवा चल रही है। इसकी रफ्तार 11 किलोमीटर से ज्यादा बनी हुई है। इस वजह से हवा की गुणवत्ता थोड़ी बेहतर बनी हुई है। दूसरी वजह यह भी है कि इस बार पराली जलाने की मात्रा में भी काफी कमी आई है। हालांकि, अब पुरवा हवा चलने लगी है। ऐसे में एक्यूआई के फिर से खराब होने की आशंका है। पुरवा हवा चलने से हवा में नमी बढ़ जाती है और प्रदूषण ऊपर की ओर नहीं जा पाता है।
विज्ञापन
वाहनों की वजह से होता है सबसे ज्यादा प्रदूषण
पर्यावरणविद एवं मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के शिक्षक प्रो. गोविंद पांडेय का कहना है कि एक आकलन के अनुसार हवा की गुणवत्ता को खराब करने में 49 प्रतिशत योगदान वाहनों का होता है। 25-30 प्रतिशत उद्योगों से निकलने वाले धुएं का और 8 से 10 प्रतिशत प्रदूषण शहर में होने वाले निर्माण कार्यों की वजह से होता है। इसके अलावा पराली जलाने समेत कुछ अन्य वजहों से भी हवा की गुणवत्ता खराब होती है।
एयर क्वालिटी इंडेक्स
0-50 बेहतर
51-100 संतोषजनक
101-200 सामान्य
201-300 खराब
301- 400 बहुत खराब
401-500 गंभीर
एयर क्वालिटी इंडेक्स
0-50 बेहतर
51-100 संतोषजनक
101-200 सामान्य
201-300 खराब
301- 400 बहुत खराब
401-500 गंभीर
कुछ यूं बना हुआ है पिछले कुछ दिनों से एयर क्वालिटी इंडेक्स
तारीख - एक्यूआई (माइक्रो ग्राम क्यूबिक मीटर)
09 नवंबर 155
15 नवंबर 190
16 नवंबर 155
17 नवंबर 147
18 नवंबर 152
19 नवंबर 151
20 नवंबर 152
21 नवंबर 138
22 नवंबर 130
23 नवंबर 146
09 नवंबर 155
15 नवंबर 190
16 नवंबर 155
17 नवंबर 147
18 नवंबर 152
19 नवंबर 151
20 नवंबर 152
21 नवंबर 138
22 नवंबर 130
23 नवंबर 146